भारत तथा यूएस दोनों में फार्मा सेक्टर के सबसे बड़े नामों में एक भारतीय महिला विनीता गुप्ता का जीवन परिचय

भारत तथा यूएस दोनों में फार्मा सेक्टर के सबसे बड़े नामों में एक नाम भारतीय महिला का है। 

एक व्यक्ति केवल महिला या पुरुष यानी लिंग के आधार पर परिभाषित नहीं होना चाहिए। ज्ञान और योग्यता का मापदंड आवश्यक है। 

क्षेत्र चाहे जो भी हो भागीदारी महिला और पुरुष दोनों की अनिवार्य है। इसमें किसी एक को बड़ा और दूसरे को छोटा दिखाने जैसा भाव नहीं होना चाहिए। 

देश की उन्नति और प्रगति के लिए महिलाओं की भागीदारी भी आवश्यक हैं। बिजनेस के क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। यह देश के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। 

वर्ष 1968 में दिवंगत बिजनेस टाइकून देश बंधु गुप्ता द्वारा स्थापित फार्मा कंपनी ल्यूपिन लिमिटेड की दूसरी पीढ़ी की लीडर, उनकी बेटी विनीता गुप्ता सीईओ हैं। 

बिजनेस को अंतर्राष्ट्रीय और नए स्तर पर ले जाने का श्रेय विनिता गुप्ता को जाता है।

ल्यूपिन लिमिटेड मुंबई में स्थित एक भारतीय बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी है। यह वैश्विक स्तर पर राजस्व के हिसाब से सबसे बड़ी जेनेरिक दवा कंपनियों में से एक है।

विनीता गुप्ता उन कुछ महिलाओं में से एक हैं जो फार्मा दिग्गजों में एक शीर्ष नाम हैं। वह 2013 से ल्यूपिन लिमिटेड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। 

वह ल्यूपिन इनकॉरपोरेटेड (LI) और अमेरिकी सहायक कंपनी ल्यूपिन फार्मास्यूटिकल्स इनकॉरपोरेटेड (LPI) की अध्यक्ष हैं। और वर्ष 2007 से ल्यूपिन की जापानी सहायक कंपनी क्योवा फार्मास्यूटिकल्स की बोर्ड निदेशक हैं।

ल्यूपिन अमेरिका की चौथी सबसे बड़ी फार्मास्यूटिकल्स कंपनियों में से एक हैं। और वैश्विक राजस्व के हिसाब से तीसरी सबसे बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनी है।

आइए जानते हैं, विनीता गुप्ता का फार्मा कंपनी को शीर्ष तक पहुंचाने का सफर…

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प्रारंभिक जीवन

विनीता गुप्ता उद्यमी देश बंधु गुप्ता और मंजू गुप्ता की बेटी है। 

उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से फार्मेसी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, अमेरिका से उन्होंने एमबीए की डिग्री ली।

अपने पिता की ल्यूपिन लिमिटेड फार्मा कंपनी में शामिल होने से पहले ही विनीता गुप्ता का उद्देश्य कंपनी को अमेरिकी बाजार तक पहुंचाना था। 

उन्होंने ल्यूपिन को विकसित बाजारों में लाने के लिए एबॉट के साथ अपनी इंटर्नशिप को माध्यम बनाया।

अमेरिका में पढ़ाई के दौरान उन्होंने वहां के बाजार का अध्ययन किया। उनके पिता ने उन्हें अमेरिकी बाजार का खाका तैयार करने की सलाह दी थी। जिसे उन्होंने बखूबी किया।

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आजीविका 

विनीता गुप्ता ल्यूपिन में 1993 में शामिल हुईं। कंपनी से जुड़ने के पहले तीन वर्षों तक उन्होंने अपना पूरा ध्यान कंपनी की नियामक आवश्यकताओं, आईपी और पेटेंट परिदृश्य को समझने में केंद्रित किया।

उन्होंने मैक्सिको, अर्जेंटीना और अमेरिका जैसे देशों में बड़े पैमाने पर यात्राएं की जिससे अपनी रणनीतियों में क्षमता का निमार्ण बेहतर रूप से कर सकें। साथ टीम की क्षमताओं का आंकलन करने और बढ़ाने के लिए बाहर से विशेषज्ञों को जोड़ने में भी प्रयत्नशील थीं।

उन्होंने पहली व्यवसायिक योजना एंटी संक्रामक सेफालोस्पोरिन जो टीबी के इलाज में उपयोग होती है, के लिए अमेरिका, यूरोप और जापान में $10 बिलियन निवेश के साथ बनाई। पर चीजें योजना के अनुरूप नहीं हुई और इसमें उनके 2 साल खराब हो गए। 

फिर उन्होंने संयुक्त उद्यम से बहार निकलने का फैसला किया। प्यूर्टो रिको में संयुक्त उद्यम में उन्होंने जो निवेश किया था, उसके $5 मिलियन की लागत से उन्होंने भारत के मंडीदीप में अपनी सुविधा उपलब्ध कराई थी।

वर्ष 2001 में यूएस की FDA द्वारा सेफालोस्पोरिन की मंडीदीप में सुविधा के लिए अनुमोदन प्राप्त करने वाली ल्यूपिन एकमात्र एशिया की फार्मा कंपनी बनी।

वॉटसन फार्मास्यूटिकल्स के साथ अपने दो उत्पादों (cefuroxime axetil और suprax) के लिए समझौते पर हस्ताक्षर के करीब थी। लेकिन वायथ कंपनी जो मार्च 2003 तक सुप्राक्स का विपणन कर रही थी उसने उसका प्रचार बंद करने का निर्णय लिया।

यह ल्यूपिन कंपनी के लिए बड़ा झटका था लेकिन कहते है न जहां चाह वहां राह। विनीता गुप्ता ने ल्यूपिन को एक ब्रांड के रूप में लॉन्च करने का लक्ष्य लिया।

उनके फैसले का समर्थन उनके पिता ने किया। जिससे उन्हें बहुत बल मिला। उस समय अमेरिकी कार्यलय में उनके सहित केवल तीन लोग थे।

उन्होंने अनुबंध बिक्री संगठन के साथ साझेदारी कर वर्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया। इट्स बैंक नामक अभियान के साथ उन्होंने सुप्राक्स लॉन्च किया। लॉन्च के पहले वर्ष के अंत में उन्होंने मूत्र पथ संक्रमण (UTI) के सुप्राक्स को सबसे अच्छी दवाओं में से एक पाया। जिससे उनकी दवा और राजस्व दोनों में वृद्धि हुई।

2003 में वह कंपनी की अध्यक्ष बनीं और 2013 से वह सीईओ पद पर कार्यरत हैं।

उन्होंने अपने भाई नीलेश गुप्ता के साथ यूरोप की मर्क और अमेरिका फुजिसावा जैसी कंपनियों के साथ जैविक विकास और साझेदारी के साथ अधिग्रहण किया।

उन्होंने वर्ष 2007 में अपना पहला अंतराष्ट्रीय अधिग्रहण क्योवा फार्मास्यूटिकल्स, जापान का था।

फिर उन्होंने जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, फिलिपिंस, मैक्सिको, रूस और अमेरिका में अधिग्रहण किया। जिसका उद्देश्य जटिल जेनेरिक और विशेष उत्पादों में विशेषज्ञता और ब्रांड निर्माण करना रहा।

दो दशकों बाद वह अमेरिकी फार्मा क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक हैं।

उन्होंने ल्यूपिन के कुल कारोबार में अमेरिकी व्यापार को 5% से 45% तक बढ़ा दिया है। आज अमेरिका ल्यूपिन का सबसे बड़ा बाजार है।

विनीता गुप्ता अपने भाई नीलेश गुप्ता, जो कि कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के साथ मिलकर ल्यूपिन का कार्यभार संभाल रहीं हैं।

अमेरिकन स्वास्थ्य प्रणाली में ल्यूपिन की अनुमानित वार्षिक लागत बचत $15 अरब है। कंपनी ने मार्च 2016 में, समरसेट, न्यू जर्सी में $880 मिलियन में गेविस फार्मा का अधिग्रहण किया। जो किसी भारतीय कंपनी द्वारा किया गया सबसे बड़ा विदेशी अधिग्रहण है।

कंपनी द्वारा वर्ष 2016 में अमेरिकी बाजार में $1 बिलियन से अधिक का निवेश किया गया। उनकी अमेरिका आधारित कंपनी में लगभग 674 कर्मचारी कार्यरत है।

विनीता गुप्ता को अप्रैल 2017 में, इंट्रेक्सन का गैर – कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया।

विनीता गुप्ता ने कंपनी में निजी इक्विटी निवेशकों को लाने में भी महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्ष 1994 में, रियल एस्टेट में ल्यूपिन के गैर-प्रमुख विविधीकरण की भारी कीमत चुकानी पड़ी और कंपनी कर्ज में डूब गई। 

वर्ष 2002 में, कंपनी 6.30 अरब के कर्ज में थी। आखिरकार वर्ष 2004 में, उन्हें लंदन मुख्यालय आधारित एक निजी इक्विटी फर्म CVC वर्ल्डवाइड में उपयुक्त भागीदारी मिली। कंपनी ने ल्यूपिन में 12.55% की भागीदारी प्राप्त करने के लिए 1.25 बिलियन रूपये निवेश किए। जिससे कंपनी के कर्ज को कम करने में मदद मिली।

उन्होंने कंपनी की विकास रणनीति को आकार दे क्रियान्वित करने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई है। ल्यूपिन वैश्विक स्तर पर फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र का एक बड़ा नाम है।

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व्यक्तिगत जीवन

विनीता गुप्ता ने उद्यमी और निवेशक ब्रिज शर्मा के साथ विवाह किया। उनका एक बेटा है, जिसका नाम कृष शर्मा है। वह अपने परिवार के साथ फ्लोरिडा, अमेरिका में रहती हैं। 

वह अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और पति को देती हैं।

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सम्मान 

विनीता गुप्ता और उनके भाई नीलेश गुप्ता को संयुक्त रूप से अर्नस्ट एंड यंग एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर 2015 में नामित किया गया।

उन्होंने एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर फोर्ब्स इंडिया लीडरशीप अवॉर्ड 2016 जीता।

वह उद्घाटन EY, US 2012 फैमिली बिजनेस अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस की विजेता हैं।

और मैरीलैंड को स्वस्थ्य सेवाओं और प्रोद्योगिकी के लिए EY एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर 2012 अवॉर्ड से उन्हें सम्मानित किया गया।

विनीता गुप्ता को 2014 में फोर्ब्स एशिया द्वारा एशिया प्रशांत की शीर्ष 50 पॉवर बिजनेस वुमेन में नामित किया गया।

उन्हें हॉलऑफ फेम, सबसे शक्तिशाली महिला उद्यमी 2016, बिजनेस टुडे में स्थान मिला।

उन्हें 11वें CNBC इंडिया बिजनेस लीडर अवॉर्ड के आउटस्टैंडिंग बिजनेस वुमन लीडर ऑफ द ईयर के लिए नामित किया गया।

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