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शोले फिल्म भला किसने नहीं देखी? 4 दशक से ज्यादा हो गए है इस फिल्म को, लेकिन आज भी सुपरहिट है। शोले 15 अगस्त 1975 को रिलीज़ हुई थी ।

क्या इस फ़िल्म का एक मशहूर दृश्य आपको याद है, जिसमें बसंती यानी हेमा मालिनी के पीछे गब्बर सिंह के डाकू पड़ जाते हैं और बसंती अपनी घोड़ी धन्नो यानी घोड़ी से कहती है कि ‘भाग धन्नो भाग। आज तेरी बसंती की इज़्ज़त का सवाल है’। और तब बसंती अपने तांगे को बहुत तेज़ दौड़ाती हैं और पत्थर से टकराकर तांगा टूट जाता है।

लेकिन आप इस बात से तो पक्का अंजान है कि इस जोखिम भरे दृश्य को बड़े परदे पर हेमा मालिनी ने नहीं बल्कि उनकी बॉडी डबल रेशमा पठान ने निभाया था। 

इस सीन को निभाते वक़्त रेशमा पठान सच में तांगे के नीचे आ गई थीं और मरते-मरते बची थीं।

फिल्म इंडस्ट्री में बॉडी डबल या यूं कहें कि स्टंटमैन व स्टंटवुमन की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। फ़िल्मों में वे बॉडी डबल ही होते हैं जो हीरो और हीरोइन के लिए मुश्किल सीन को अंजाम देते हैं। 

एक 14 साल की मुस्लिम लड़की जिसने अपने परिवार की आधारभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्टंट करना चुना। हमारा देश बहुत सी रूढ़ी धारणाओं से घिरा हुआ है। कहीं धर्म के नाम पर तो कहीं लिंग भेद के नाते।

बहुत सी महिलाओं ने अपने निश्चय और होंसले के दम पर कई रूढ़िवादी धारणाओं का विरोध किया। और दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी। 

अब यह तो आप पर ही निर्भर करता है कि आप कुएं के मेंढक बने रहें और अपनी सीमाओं में बंध जाएं। या क्षुद्र सीमाओं को तोड़ने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहें।

महिलाओं को हमेशा ही कमजोर आंका जाता है। लेकिन क्या आप खुद भी यह मान चुकी हैं?

रूढ़िवादी सोच के बीच पाइधोनी की भीड़-भाड़ वाली गलियों से निकलकर वह 14 साल की लड़की एक स्टंटवुमन बन गई । उस छोटी उम्र में उस काम में जोखिम की परवाह किए बिना वह 6 सदस्यों के परिवार में कमाने वाली बन गई । और उस पुरुष प्रधान क्षेत्र में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष किया।

जिनका नाम है, रेशमा पठान । 65 वर्षीय रेशमा पठान 50 सालों से स्टंट कर रहीं हैं। वे अब तक 400 से अधिक फिल्मों में स्टंट महिला के रूप में काम कर चुकी हैं। वह बाॅलीवुड की पहली स्टंटवुमन हैं।

रेशमा पठान ने अपने स्टंट करियर में कमज़ोर पहियों के साथ तांगा चलाना, घुड़सवारी, ऊँची इमारतों से नीचे गिरना, तलवारबाज़ी, फ़ाइट सीन, रस्सी पर चढ़ना और चलती गाड़ी से कूदना, सांड और शेर से लड़ाई जैसे खतरनाक और जानलेवा स्टंट किए हैं।

बसंती के उस ताबड़तोड़ सीन को हमेशा के लिए अमर कर देने वाली बॉलीवुड की पहली स्टंटवुमेन के बारे जानते हैं | आइये जानते है रेशमा पठान के संघर्षों की कहानी…

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14 साल की उम्र से कर रहीं हैं स्टंट

रेशमा पठान ने उर्दू माध्यम के एक स्कूल से शिक्षा ली है। उनका बचपन आर्थिक तंगी में बीता। उनके पिता बीमार रहते थे। और उनकी मां चावल, कपड़े और अन्य सामानों की तस्करी किया करतीं थी ।

जब मां को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया, तब चार भाई बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते सारी जिम्मेदारी उन पर आ गई। 

9 साल की रेशमा पठान ने तब कैदियों को बीड़ी के पैकेट बेचना शुरू किया। लेकिन इतना करना काफी तो बिल्कुल नहीं था। 

अतिरिक्त पैसे कमाने के लिए उन्होंने कैब्स के ऊपर से कलाबाजी करना भी शुरू कर दिया। और एक वक्त के खाने के लिए रेशमा सड़कों पर छोटे-मोटे स्टंट दिखाकर कुछ पैसे कमा लिया करती थी।

ऐसे ही एक दिन उन्हें स्टंट करते हुए बॉलीवुड स्टंट निर्देशक अजीम जी ने देखा और उन्हें अपनी एक फिल्म ‘एक खिलाड़ी 52 पत्ते’ में अभिनेत्री लक्ष्मी छाया के लिए स्टंट करने का मौका दिया। इस फिल्म में अभिनेता के रूप में विनोद खन्ना भी थे। उस वक्त एक स्टंट के उन्हें ₹175 मिलते थे।

पिता को जब उन्होंने अपनी पहली ₹100 की कमाई दी तब उनके पिता ने उन्हें बहुत मारा था। जब उन्होंने अपने हाथों के छाले उन्हें दिखाए और उन्हें समझाया कि उन्होंने ज़ख़्म लेकर व खून बहाकर पैसे कमाए हैं, न की कुछ गलत काम करके। तब उनके पिता ने उन्हें और उनके काम को अपनाया। 

दरअसल, उनके पिता फ़िल्मी दुनिया में काम करने के विरुद्ध थे। 

लेकिन धीरे-धीरे पिता और समाज से लड़कर रेशमा पठान ने यह काम बखूबी किया और अपने परिवार की आर्थिक मदद की। परिवार के लिए ऐसे खतरनाक काम को करते समय चोट भी लगी तो उसकी परवाह उन्होंने कभी नहीं की। 

फ़िल्म ‘ज्योति’ में उन्होंने हेमा जी की बॉडी डबल बनकर सांड से लड़ाई का सीन किया। फ़िल्म में एक सीन है जहां एक छोटी बच्ची खड़ी है और उस बच्ची को मारने सांड आ जाता है। उन्होंने फ़िल्मों में आग के बीच खड़े रहने जैसे कई ख़तरनाक स्टंट किये हैं।

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जब मिली पहचान

बॉलीवुड की दुनिया में परदे पर चमकने वाले सितारों की चमक बढ़ाने में उन लोगों का बहुत बड़ा योगदान होता है जो परदे के पीछे होते है। परदे पर एक्शन सीन देखकर सिनेमाघरों में बजने वाली तालियां और सीटियां सिर्फ और सिर्फ अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के लिए होती है। लेकिन इसका असली हकदार कोई ओर भी होता है, जिन्हें कोई पहचान नहीं मिलती।

रेशमा पठान को असल पहचान तब मिली जब उन्होंने साल 1975 में आयी फिल्म ‘शोले’ में अभिनेत्री हेमा मालिनी के लिए स्टंट किया। 

अगर आपको याद है तो फिल्म ‘शोले’ के एक सीन में हेमा जी ने गब्बर के डाकुओं से बचने के लिए भागते हुए टांगे पर चढ़कर खूब रफ़्तार में टांगा चलाया था। इसके बाद उनका टांगा टूट जाता है और वो गिर जाती है। 

इस सीन को रेशमा पठान ने किया था जिसमें उनकी जान जाते जाते रह गयी थी। ज्यादा चोट और खून बहने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था।

बात ये थी कि जिसने तांगा बनाया था उसे पहियों को मज़बूती से नहीं जोड़ना था लेकिन उसने गलती से एक पहिये को लोहे की कील से मज़बूत बना दिया

जिसके चलते पत्थर से टकराने के बावजूद एक पहिया नहीं टूटा। 

ऐसे में घोड़े के दौड़ाने और घोड़े की रस्सी खोलने के बाद तांगा टूटा नहीं बल्कि पत्थर से टकराकर उलट गया और पूरा तांगा रेशमा पठान के ऊपर आ गया। इस घटना के होने पर वहां उपस्थित लोगों को लगा कि वह अपनी जान से हाथ धो चुकी हैं।

लेकिन जब लोग उन्हें बचाने के लिए दौड़े तो सबने मिलकर तांगा सीधा किया और देखा कि उनकी साँसें चल रही हैं। और उन्हें जल्दी से अस्पताल ले जाया गया।

लेकिन कुछ ही दिनों में उन्होंने सेट पर वापसी की। जब निर्देशक लगभग उस दृश्य को हटाने की कगार पर थे, तब रेशमा पठान ने सभी को आश्वस्त किया कि वह फिर से जोखिम भरे दृश्यों को फिल्माने के लिए तैयार है। 

फिर क्या था, रेशमा पठान ने कमाल कर दिया और शोले के पूरे दल ने उन्हें “वन-टेक-ओके-शॉट” देने के लिए स्टैंडिंग ओवेशन दिया। 

फिल्म ‘शोले’ सुपरहिट हुई। हेमा जी के उस सीन पर खूब तालियां और सीटियां बजी, लेकिन रेशमा पठान का चेहरा अब भी लोगों के बीच अनजान था। हालांकि, जब वो निर्माताओं और निर्देशकों के बीच काफी मशहूर हुई और उन्हें बॉलीवुड में और ज्यादा काम मिलने लगा। फिर उन्हें ‘शोले गर्ल’ के नाम से जाना जाने लगा। 

एक बार फिल्म ‘कर्ज’ में दुर्गा खोटे के लिए बाॅडी डबल की भूमिका निभाते हुए, रेशमा गंभीर रूप से घायल हो गई थी। क्योंकि ट्रक चालक ने उन्हें निर्देशक के कहने पर टक्कर मार दी थी। वह काफी चोटिल हुई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। हालाँकि उन्होंने फिर कभी उस निर्देशक के साथ काम नहीं किया। लेकिन एक घटना ने उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोका।

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ए ग्रेड एक्ट्रेस के लिए बनीं बॉडी डबल

रेशमा पठान बॉलीवुड में ए ग्रेड लिस्ट की एक्ट्रेस यानि हेमा मालिनी, श्रीदेवी, रेखा, मीना कुमारी, बिंदिया गोस्वामी, मीनाक्षी शेषाद्रि और भी ना जाने कितनी एक्ट्रेसस के लिए बॉडी डबल बन चुकी हैं।

इन सभी हीरोइनों के खतरनाक एक्शन स्टंट का श्रेय जाता है रेशमा पठान को। कई खतरनाक सीन्स को अपनी जान खतरे में डालकर उन्होंने आइकॉनिक बना दिया।

रेशमा पठान से पहले कोई ऐसी महिला नहीं थी, जो बॉलीवुड की अभिनेत्रियों के लिए बॉडी डबल का काम किया करती हो। उस जमाने में मर्दों को ही लड़की का रूप देकर बॉडी डबल का काम लिया जाता था। 

उस दौरान स्टंट करने वालों के लिए किसी भी तरह की सुरक्षा नहीं दी जाती थी। 

उस समय न कोई मज़बूत केबल वाली रस्सी होती थी और ना ही कोई और बड़ी सुविधा, ना ही कोई साफ़ सुथरी जगह। ऊपर से छलांग लगाते वक़्त नीचे चार-पांच आदमी नेट लेकर खड़े रहते थे और उसी नेट पर कूदना होता था और अगर किसी से थोड़ी चूक हुई तो हड्डी पसली तो गई। 

आज के समय में तो काफी सुविधाएं हैं और स्टंट करने वालों की सुरक्षा के लिए नई तकनीकी उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। 

एक इंटरव्यू के दौरान रेशमा पठान ने बताया था कि ‘महिलाओं को हमेशा पुरुषों की बदनीयत का सामना करना पड़ा है। उस दौर में भी लड़कियां कास्टिंग काउच का शिकार होती थी। वैसे तो मैं मजबूत थी और किसी को भी मुक्का जड़ सकती थी। लेकिन फिर मैं सोचती थी कि घर भी चलाना है। मेरे सामने भी कुछ निर्देशकों और अभिनेताओं ने डिमांड रखी थी। लेकिन मैं चालाकी से बच निकलती थी। मैं साफ़ कह देती, मैं आपकी इज्जत करती हूं, उसे बनाए रखिये, क्यों धज्जियां उड़वाना चाहते है। तो अच्छे-अच्छे सुपरस्टार भी अलर्ट हो जाते थे।’ 

उनसे पहले, मैरी एन इवांस उर्फ ​​​​फियरलेस नादिया, ने 1930-1960 के दशक के बीच कई हिट फिल्मों में अभिनय किया और स्टंट भी किए। लेकिन रेशमा पठान अभिनेत्रियों के लिए स्टंट करने वाली पहली महिला हैं।

द जूनियर आर्टिस्ट एसोसिएशन की सदस्य बनने के बाद, उन्होंने महसूस किया कि एक जूनियर कलाकार होना पर्याप्त नहीं है और वह एक स्टंट के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर बड़ी कमाई भी कर सकती है। 

उन्होंने “गंगा की सौगंध” की शूटिंग के दौरान अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और फिल्म उद्योग में महिलाओं के लिए सम्मान और मान्यता की मांग की। विरोध के परिणामस्वरूप वह स्टंट आर्टिस्ट एसोसिएशन की पहली महिला बनीं।

उन्होंने ‘गोलमाल रिटर्न्स’ में छोटा सा क़िरदार निभाया है। और साथ ही उन्होंने स्टार प्लस के शो ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में भी दादी के किरदार के लिए स्टंट किया था। 65 साल की उम्र में भी उसी जोश के साथ वह काम करतीं हैं।

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राखी गुलजार के व्यवहार से हुई थी निराश

रेखा, मिनाक्षी शेषाद्री, हेमा मालिनी और जया बच्चन जैसी अभिनेत्रियां तो आज भी उनका बहुत सम्मान करती है। 

लेकिन जब अभिनेत्री राखी गुलजार के लिए फिल्म ‘कसमें वादे’ की शूटिंग के दौरान रेशमा पठान स्टंट कर रही थी तो उस समय करीब 40 फुट नीचे गिरने के बाद उनके पैर में चोट लग गई और काफी सूजन आ गई थी। ऐसे में शूटिंग बंद करके उन्हें लोगों ने बाहर निकाला। 

इस बात का पता जब अमिताभ जी को चला तो वो भी अपना सीन छोड़कर रेशमा पठान को देखने के लिए आये। इतना ही नहीं पास ही के लोकेशन पर फिल्म ‘मीरा’ की शूटिंग कर रही हेमा जी भी उनसे मिलने आईं थी। 

लेकिन जब अभिनेत्री राखी, जिनके लिए वह ये स्टंट कर रही थी, जब उन्हें एक स्पॉट बॉय ने बताया तो उन्होंने रेशमा के सामने ही कह दिया कि ‘मैं क्या करू’ और गाड़ी में बैठकर चली गयी। 

इस घटना से रेशमा पठान बहुत निराश हुईं और उन्हें दु:ख भी हुआ।

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व्यक्तिगत जीवन

रेशमा पठान ने 80 के दशक के मध्य में स्टंट निर्देशक शकूर पठान से शादी की। साल 1984 में, एक कानून ने फिल्मों में स्टंट पर प्रतिबंध लगा दिया। यह प्रतिबंध एक साल से अधिक समय तक चला और जिसके कारण रेशमा पठान और उनका परिवार मुश्किल में आ गया। 

एक दिन उनके घर खाने के लिए भी पैसे नहीं थे। लेकिन उनकी एक आदत थी कि वह घर के कोने-कोने में सिक्के और रुपये रख देती थी। इस कारण उन्होंने कुछ पैसे मिलने की उम्मीद में कप, बक्से, कंटेनर की तलाशी ली। इस तलाशी में उन्हें ₹1600 मिले, जिससे उन्होंने खाने का इंतजाम किया। 

उन्होंने फिर सोच लिया कि उनकी बहन के बेटे जिनका पालन पोषण उन्होंने किया है और उनके बेटे पहले अपनी शिक्षा पूरी करें। ताकि शिक्षा के बल पर वे अपने जीवन में कामयाब हो सकें।

उनका एक भांजा इंजीनियर है, दूसरा कार कंपनी में मैनेजर है, जबकि उनका बेटा डॉक्टर है। वह नहीं चाहती थी कि वे स्टंट-मास्टर बनें क्योंकि इस क्षेत्र में भविष्य अनिश्चित है। 

2000 के दशक की शुरुआत में, उम्र बढ़ने के साथ, रेशमा पठान ने बॉडी डबल के रूप में काम करना कम कर दिया और फिल्मों में कुछ भूमिकाएँ निभाई।

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बनी बायोपिक

रेशमा पठान आज भी 65 साल की उम्र में उसी जोश के साथ काम करती है। बस उन्हें एक बात का बड़ा दुःख होता है कि उनके द्वारा किए सारे स्टंट का क्रेडिट सिर्फ और सिर्फ अभिनेत्रियों को दिया जाता था। इस बात से वो दुखी जरूर होती थी, लेकिन इस सच्चाई को भी मानती थी कि जो दिखता है वही बिकता है। 

रेशमा पठान ने अपने जीवन के 50 साल इंडस्ट्री को दिए और इस दौरान ना जाने कितनी फिल्मों में कितनी एक्ट्रेस की बॉडी डबल बनीं। उनके सिनेमा में इस योगदान को भुलाया नहीं गया। 

उनके पूरे सफर पर बायोपिक बनी, जिसका नाम है द शोले गर्ल। आदित्य सरपोतदार द्वारा निर्देशित और साईं देवधर द्वारा निर्मित इस फिल्म में उनका किरदार एक्ट्रेस बिदिता बेग ने निभाया।

उन्हें जाने-माने गीतकार जावेद अख़्तर और निर्देशक रमेश सिप्पी के हाथों सीसीएफ़ए की ओर से लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

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Jagdisha रेशमा पठान आपके साहस और निडरता को हमारा सलाम।

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