sanobar pardiwala

फिल्मों में स्टंट का एक अलग ही मजा है। एक्शन सीन अगर हिरोइन का हो तो और आंखें गड़ा लेते हैं। लेकिन अधिकांश मुश्किल एक्शन सीन में कमाल फिल्म की हीरोइन का नहीं बल्कि स्टंट वुमन का होता है। जो बेस्ट एक्शन सीन क्रियेट करने के लिए हर जोखिम का सामना करतीं हैं।

कभी आपने सोचा है, 2006 में आईं धूम 2 में ऐश्र्वर्या राय बच्चन या 2017 में आईं जग्गा जासूस में कैटरीना कैफ ने धमाकेदार एक्शन सीन को कैसे निभाया होगा? इन स्टंट के पीछे थी, एक स्टंट वुमन।  

तो इस तरह के एक्शन दृश्यों के पीछे होते है, स्टंट मैन या स्टंट वुमन।  

हम बात कर रहे हैं बाॅलीवुड की स्टंट महिला सनोबर पारदीवाला की।

20 वर्षों से भी अधिक समय से बाॅलीवुड में काम करते हुए, सनोबर पारदीवाला ने हर तरह के मुश्किल से मुश्किल स्टंट किए हैं। ऊंची चट्टानों से कूदने से लेकर समुंद्र की गहराई में गोता लगाने तक, मौत को चिढ़ाने वाले और खतरनाक स्टंट उन्होंने बखूबी तरह निभाए हैं ।

वह छोटी सी उम्र से ही एक्शन की दिवानी हैं। 12 साल की उम्र में ही उन्होंने कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर ली थी।

2003 में उर्मिला मातोंडकर की फिल्म ‘भूत’ में उन्हें काम करने का मौका मिला था। हालांकि, इससे पहले वह ऐश्वर्या राय के लिए बॉडी डबल कर चुकी थीं। उनका पहला प्रोजेक्ट नक्षत्र डायमंड के लिए किया गया एक विज्ञापन था।

वे अबतक 200 से ज्यादा फिल्मों में स्टंट कर चुकी हैं।

आइये जानते हैं, बाॅलीवुड की स्टंट महिला सनोबर पारदीवाला के बारे में…

यह भी पढ़ें- कॉमन वेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी

कौन हैं, सनोबर पारदीवाला?

सनोबर पारदीवाला मुंबई में जन्मी और पली बढ़ी हैं । 2 साल की उम्र से उनकी स्कूली शिक्षा शुरू हुई।

उन्हें पाठ्येतर गतिविधियों का विकल्प चुनना था। उनके पास कराटे और डांसिंग में से किसी एक को चुनने का विकल्प था। कराटे क्लास में कम छात्र होने के कारण उन्होंने कराटे की ओर रुख किया। 

वहां उन्होंने कई तकनीकें सीखीं और यह शारीरिक रूप से भी उनके लिए बेहतर साबित हुआ। हर टेस्ट के साथ वह कराटे में ब्लैक बेल्ट तक पहुंच गईं। 12 साल की उम्र में वह कराटे में ब्लैक बेल्ट बनी। साथ ही, उनके दादाजी उन्हें गर्मियों की छुट्टी के दौरान तैराकी कक्षाओं में ले जाते थे। समय के साथ, वह साल में 8 महीने तैरना शुरू रखतीं। 

उन दिनों, उनका शेड्यूल इन गतिविधियों से पूरी तरह से भरा हुआ था, लगातार तैराकी, जिमनास्टिक और कराटे के बीच फैर-पलट हो रहा था। 

यह भी पढ़ें- एक दुर्घटना में अपने दोनों पैर और बायां हाथ खोने के बाद कैसे बनी पैरा शूटर

पहला ऑडिशन

सनोबर पारदीवाला लगभग 12 साल की थी, जब एक दिन उन्हें ऐश्वर्या राय के बाॅडी डबल के लिए एक ऑडिशन के लिए बुलाया गया था। 

वह अपने पहले ऑडिशन के लिए गईं। इंडस्ट्री के लोग उस दौरान किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में थे जो जिमनास्टिक और कुछ फ्लिप कर सके। यह सभी के लिए खुला था। तो उन्होंने भी एक शॉट देने के बारे में सोचा।

अपने अभ्यास के कारण सनोबर पारदीवाला आसानी से वह स्टंट कर सकीं । वह भाग्यशाली रहीं और उनका चयन हो गया। 

कराटे ब्लैक बेल्ट, एक जिमनास्ट, और बहुत कम उम्र से एक पेशेवर तैराक होने के नाते, उन्होंने 12 साल की उम्र में अपने पहले ऑडिशन में चयनित होने पर एक विज्ञापन नक्षत्र डायमंड में ऐश्वर्या राय बच्चन के लिए स्टंट डबल के रूप में प्रदर्शन करके अपने करियर की शुरुआत की। 

उस विज्ञापन को उन्होंने तोड़-मरोड़ कर पेश किया जो वास्तव में उनके जीवन परिवर्तन के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव बन गया।  

उन्हें तुरंत पूरी प्रक्रिया से प्यार हो गया। तभी उन्होंने कुछ ऐसा करने के बारे में सोचा जिसमें वह अच्छी हैं और उन्होंने अपने पेशे के रूप में स्टंट करना चुना। तब से, उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

बाद में, उन्होंने 2003 में आई फिल्म भूत में उर्मिला मातोंडकर के लिए बॉडी डबल के रूप में बॉलीवुड में शुरुआत की।

भूत फिल्म के लिए एक इमारत की 16 वीं मंजिल से उन्हें कूदना था। उस समय वह 16 साल की ही थीं। 

फिर उन्होंने “द हीरो: द लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई” में प्रीति जिंटा के डबल के तौर पर एक बड़े बम विस्फोट वाले सीन में काम किया। जिसमें लोग पाकिस्तान की ओर एक नदी में बहते हुए आ रहे हैं। पूरा सीन बहुत सारे पानी और आग के बीच टूटे हुए कांच के साथ फिल्माया गया था। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने बहुत कुछ सीखा।

अब उन्हें इस इंडस्ट्री में 20 से भी अधिक साल हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने आग में कूदने से लेकर पानी में डूबने तक के सारे करतब किए हैं। साथ ही उन्होंने शूटिंग के दौरान इस्तेमाल की गई राइफल और बंदूकों को चलाने का भी गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है।

सनोबर पारदीवाला ने शमशेरा फिल्म के लिए भी एक ट्रिकी सीक्वेंस शूट किया, जहां उन्हें पानी के भीतर का नजारा दिखाने के लिए कम से कम 15 फीट से गोता लगाना पड़ा। उस दृश्य को फिल्माना, उसे फ्रेम करना और साड़ी पहनकर पानी के भीतर सही लाइटनिंग देना साथ ही ओर 20 फीट नीचे जाना, और वहां तैरना उनके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहा। उनके पास कोई ऑक्सीजन या सांस लेने का उपकरण भी नहीं था। 

इस तरह से बिना ऑक्सीजन के सांस लेने के व्यायाम और इसे करने के लिए बहुत धैर्य की जरूरत होती है। क्योंकि कई बार आपकी सांस टूटने लगती है।

यह भी पढ़ें- पावरलिफ्टिंग और बाॅडीबिल्डिंग प्रतियोगिताओं में हिजाब पहनकर लेती है भाग

स्टंट वुमन के साथ अन्य करियर

16 साल की उम्र तक, उन्होंने पर्याप्त पैसा कमाया और अपनी पहली बाइक खरीदी।

सनोबर ने जब अपना स्कूल खत्म किया, तब तक वह 40 फिल्मों में स्टंट डबल के रूप में काम कर चुकी थीं।

सनोबर पारदीवाला हमेशा से आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहना चाहती थीं, और यह सिर्फ स्टंट करने से संभव नहीं था। उन्हें पता था कि फिटनेस का स्तर कितना भी अच्छा क्यों न हो, वह जीवन भर स्टंटवुमन नहीं रह सकतीं । 

फिर अन्य विकल्प के रूप में एक प्रशिक्षक के रूप में व्यायाम और शरीर क्रिया विज्ञान (फिजियोलॉजी) में अपनी पढ़ाई शुरू की है। उन्होंने अमेरिकन कॉलेज इन स्पोर्ट्स मेडिसिन से एक पोषण पाठ्यक्रम भी पूरा किया।

18 साल की उम्र से उन्होंने लोगों को प्रशिक्षक के रूप में मार्गदर्शन करना शुरू कर दिया। 

23 साल की उम्र में, सनोबर पारदीवाला ने क्लिनिकल हिप्नोथेरेपी में डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी की। और तब से वह तीन पेशों में एक साथ काम कर रही हैं।

अब एक मिश्रित मार्शल कलाकार सनोबर पारदीवाला ने जुजुत्सु, क्राव मागा, कुंग फू, मय थाई, बॉक्सिंग और किकबॉक्सिंग जैसे विभिन्न रूपों में महारत हासिल कर ली है। 

वह शार्पशूटिंग, ब्रॉडस्वॉर्ड, स्टाफ, व्हिप चेन और समुराई के लिए राइफल और पिस्तौल जैसे कई हथियारों का उपयोग करने में भी कुशल है। 

पानी के भीतर स्टंट के लिए अपने जुनून और प्यार के लिए उन्होंने उन्नत गहरे समुद्र में गोताखोरी का प्रशिक्षण भी लिया। वह पैराग्लाइडिंग और स्काई डाइविंग में भी प्रशिक्षित हैं।

उन्होंने बॉलीवुड की कई हीरोइनों को स्टंट करने के लिए प्रशिक्षित भी किया है। इस लिस्ट में हुमा कुरैशी और नंदिता दास जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।

यह भी पढ़ें- पर्वतारोही बलजीत कौर ने 30 दिनों में 8,000 मीटर से ऊंची 5 चोटियों पर फतह कर रचा

जब करना पड़ा दुबारा स्टंट

2009 में, सनोबर पारदीवाला मणिरत्नम की बहुभाषी फिल्म रावण के लिए शूटिंग कर रही थीं। फिल्म में उन्हें केरल में अथिरापल्ली झरने के पास 300 फीट की चट्टान से कूदने का स्टंट करना था। फिल्माए जा रहे सीन में दिखाया गया कि फिल्म की हीरोइन एक चट्टान से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह चट्टानों, पेड़ों और शाखाओं से गिरने के बाद बच जाती है और आखिर में नदी में गिर जाती है।

एक स्टंट कलाकार के तौर पर सनोबर ने अपनी पूरी क्षमता के साथ वो स्टंट सीन किया, लेकिन मणिरत्नम ने उनसे कहा कि उन्हें एक और रीटेक करना पड़ेगा। वजह थी, उनके गिरने का तरीका बहुत ज्यादा अच्छा था।

मणिरत्ननम ने उन्हें समझाया कि गिरने वाली महिला एक आदिवासी महिला का किरदार है, वह कोई पेशेवर एथलीट नहीं है। वो अपना जीवन खत्म करने के इरादे से कूद रही हैं और वो किस्मत से बच जाती है। उसका बचने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि उनके गिरने का तरीका थोड़ा पेशेवर था। इसलिए उन्हें वो सीन दोबारा करना पड़ा।

इस स्टंट के लिए उन्हें टॉरस वर्ल्ड स्टंट अवार्ड के लिए नॉमिनेट भी किया गया था।

उसी फिल्म की शूटिंग के दौरान एक शॉट के लिए उन्हें 150 फीट की ऊंचाई से कूदना था। तभी अचानक केबल टूट गई और वह 75 फीट की ऊंचाई पर झरने के पास ही लटकी रही। ऊपर और नीचे जाने का रास्ता नहीं था। उस समय भी वह चिल्लाई या चीखी नहीं और खुद को शांत रखा। उस केबल को ठीक करने में लगभग आधा घंटा लगा। उन्हें पता था कि इंतजार करने के अलावा वह कुछ नहीं कर सकती। अगर वहां से चीखती या चिल्लाती भी तो उसका कोई लाभ नहीं एक तो उर्जा नष्ट होती दूसरा आवाज झरने की आवाज के साथ से डूब जाती।

यह भी पढ़ें- पारूल चौधरी ने 3000 मीटर स्पर्धा में 6 साल का रिकार्ड तोड़ बनाया नया नेशनल रिकार्ड

बॉलीवुड में बदलते हालात

सनोबर पारदीवाला के अनुसार जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की तब इस क्षेत्र में ज़्यादा महिलाएं नहीं थीं। पर्दे पर तो फिर भी महिलाएं दिखती थीं, लेकिन पर्दे के पीछे महिलाओं की संख्या काफ़ी कम थी। लेकिन अब वक़्त के साथ हालात बदल रहे हैं। 

ज़्यादा महिलाएं न होने के बावजूद उनका सफर काफ़ी अच्छा रहा है।  

शुरुआती दिनों में कई बार लोग उनसे स्टंट कराने में संशय में रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे अपने हुनर से उन्होंने अपनी जगह बनाई। 

जब सनोबर पारदीवाला ने फिल्म उद्योग में अपनी यात्रा शुरू की, तब स्टंटवुमन की कोई अवधारणा नहीं थी। उस समय, केवल स्टंटमैन थे और कोई महिला नहीं थी। लोग उन्हें ‘स्टंटमैन’ कहकर संबोधित करते थे। जहां कई बार उन्हें लोगों को उन्हें स्टंटमैन कहने से रोकना पड़ा। 

अब फिल्म इंडस्ट्री में चीजें बदल गई हैं और स्टंट करने वालों को ज्यादातर स्टंट डबल के रूप में संबोधित किया जाता है। अब कैमरे के पीछे अधिक से अधिक महिलाओं के शामिल होने के साथ बाॅलीवुड के इस नए परिवर्तन को देखकर वह खुश हैं। 

पिछले 20 सालों में नई-नई तकनीकों के कारण बॉलीवुड में काफ़ी बदलाव आए हैं। नई तकनीकों के कारण जोखिम काफ़ी हद तक कम हो गए हैं। स्टंट करने से पहले पूरी टीम कलाकार की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

स्टंट डबल्स ‘मूवी स्टंट आर्टिस्ट एसोसिएशन’ का हिस्सा हैं जो उन्हें हेल्थ बीमा प्रदान करता है।

सनोबर के अनुसार अभिनेता अक्षय कुमार ने इस पहल का बहुत समर्थन किया है जिससे कि यह सुनिश्चित हो कि स्टंट करने वालों का भुगतान नियमित हो और उनके लिए काम करने की स्थिति अनुकूल हो। 

सनोबर पारदीवाला ने अब तक 200 से अधिक फिल्मों में बॉडी डबल के रूप में प्रदर्शन किया है।

यह भी पढ़ें- 94 साल की भगवानी देवी ने जीता 100 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल

पुरस्कार

सनोबर पारदीवाला को 2010 में उनके बेहतर प्रदर्शन और हुनर के लिए सिर्फ 24 साल की उम्र में दरबशाव लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। उनको यह पुरस्कार उनके स्कूल प्रिंसीपल के साथ दिया गया था, जिससे उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। 

उसके बाद सनोबर पारदीवाला ने ओर भी कई पुरस्कार अपने नाम किए हैं। उनके साहसिक स्टंट को कई बार वर्ल्ड स्टंट अवार्ड्स ने भी सराहा और नामांकित किया। 

21 साल की उम्र से ही वो तौरस वर्ल्ड स्टंट अवॉर्ड के लिए कई बार नामांकित हुई हैं।

यह भी पढ़ें- जानिये वर्ल्ड चैम्पियन मुक्केबाज मैरी कॉम के जीवन का उल्लेखनीय सफर

फिल्मों में स्टंट डबल बनने की इच्छा रखने वालों के लिए वह कहती हैं, “खुद को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है। यदि आप एक स्टंट करने के बारे में सुनिश्चित नहीं हैं, या यदि आपको लगता है कि यह आपकी क्षमता से परे है, तो आपको ना कहना सीखना चाहिए। ना कहना ठीक है क्योंकि आपके जीवन से ऊपर कुछ भी नहीं है।”

Jagdisha सनोबर पारदीवाला आपको आपके साहसी स्टंट के लिए हमारा सलाम। आप वास्तविक जीवन की हिरोइन है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.