pooja bhagwat inknbliss

जहां चाह वहां राह! सच ही है जब कुछ करने की धुन सवार हो तो राह मिल ही जाती है। नौकरी छोड़कर अपना स्‍टार्टअप शुरू करने के लिए हमेशा जबरदस्त बिजनेस आइडिया और इन्‍वेस्‍टमेंट ही जरूरी नहीं होता।

ऐसा इसलिए क्योंकि हाथों की कला और हुनर भी कई बार कमाल कर जाती है। ऐसी ही एक हुनरबाज महिला उद्यमी की कहानी पढ़ेंगे आज आप।

पुणे के एक निम्‍न-मध्‍यवर्गीय परिवार में जन्‍मी पूजा भागवत एक ऐसे परिवार से संबंध रखतीं है जिहां दूर-दूर तक भी कभी किसी ने बिजनेस के बारे में सोचा तक नहीं। सभी नौकरीपेशा या यूं कहें कि बिजनेस मानसिकता वाला कोई भी नही। 

आरंभ में तो पूजा ने भी अपना स्टार्टअप शुरू करने का कोई विचार नहीं किया था। लेकिन उनके हाथों में जादू था। वह रंग-बिरंगी कलम से कागज पर इतनी सुंदर आकृतियां बना देतीं, शब्‍दों को इतनी सहजता और कलाकारी से लिखतीं कि आंखों को धोखा हो जाए। ऐसा लगे कि लिखा नहीं छपा हुआ है।

यही हुनर एक दिन बिजनेस आइडिया में बदल गया और शुरुआत हुई Ink N Bliss की, तो आइये जानते हैं पूजा भागवत का यह सफर…

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बनाया करती थीं साड़ी फॉल के कागज पर चित्र 

1988 में पुणे के एक निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार में पूजा भागवत का जन्‍म हुआ। पिता सरकारी दफ्तर में क्‍लर्क थे और मां ग्रहणी।

उनकी मां घर की कमजोर आर्थिक हालत के चलते साड़ी में फॉल लगाने, ब्‍लाउज और छोटे बच्‍चों के कपड़े सिलने का काम करती थीं। साड़ी फॉल के पैकेट में एक सादा पारदर्शी कागज आता है। मां पैकेट खोलकर फॉल निकालतीं और पूजा उस बचे कागज पर अपनी पेंसिल और मोम वाले रंगों से कलाकारी करती। 

तरह-तरह के चित्र और आकृतियां बनाती, उन सुंदर आकृतियों को देख सभी के चेहरे खिल जाते, प्रशंसा भी करते, लेकिन अंत में सवाल वही होता, जो हर बच्‍चे से पूछा जाता है, “होमवर्क कर लिया तुमने? बहुत हो गई पेंटिंग, अब जाकर पढ़ाई करो।”

पूजा पढ़ाई में अच्‍छी थीं इसलिए घरवालों ने चित्र बनाने से कभी रोका नहीं। थोड़ी और बड़ी हुई तो वॉटर कलर, स्‍केच कलर और ड्रॉइंग बुक भी मिल गई। वह अखबारों से कार्टून, हीरो-हिरोइन की तस्‍वीरें देखकर बिल्कुल समान नकल उतार देती। ं

हर समय चित्र बनाते रहने के लिए डांट तो नहीं पड़ती थी लेकिन बहुत उत्‍साह भी नहीं बढ़ाया जाता। 

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86% के बाद भी चुना आर्ट कॉलेज

2005 में पूजा के 10वीं में 86% नंबर आए। अब नंबर देखकर घरवालों को लगा कि बेटी डॉक्‍टर-इंजीनियर बनेगी। लेकिन बेटी तो पहले ही चुनाव कर चुकी थी। उन्हें चित्रकारी का शौक था, तो चुना भी आर्ट कॉलेज ही। 

इस फैसले से उनकी मां खुश नहीं थी और उन्होंने फिक्र भी जताई। उनके अनुसार पेंटिंग सीखकर कौन सा कॅरियर बनता है। उनके अंकल तो साइंस कॉलेज का फॉर्म भी ले आए थे। उनके पिता को कॅरियर के नए आधुनिक विकल्‍पों का उन्‍हें कोई ज्ञान न था। लेकिन उन्होंने उनकी मां से कहा, “वो जो करना चाहती है उसे करने दो।”

पूजा ने दसवीं के बाद पुणे के प्रतिष्ठित अभिनव कॉलेज ऑफ आर्ट्स में एडमिशन लिया। वो खुश थीं क्‍योंकि अपने मन का काम कर रही थीं । दूसरी ओर मां अब भी फिक्र करती थीं क्‍योंकि घर पर दिन-रात बेटी सिर्फ चित्र बनाती रहती थीं ।

घर में जो भी रिश्‍तेदार, मेहमान आते, वो सब पूजा को पेंटिंग करता देख एक ही सवाल पूछते, “इस काम से पैसा मिलेगा क्‍या?”

लेकिन घरवालों को संतोष था कि लड़की है। कॅरियर का कुछ नहीं हुआ तो भी शादी तो हो ही जाएगी। यानी आज भी हमारे समाज मे लड़की का कॅरियर ऑप्‍शनल ही है वह अनिवार्यता नहीं है। 

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कॉरपोरेट में कॅरियर

आर्ट कॉलेज से निकलने के बाद पूजा ने एक एडवर्टाइजिंग एजेंसी में नौकरी की। पैसे अच्‍छे मिल रहे थे, लेकिन काम में मज़ा नहीं आ रहा था। एडवर्टाइजिंग के नाम पर जो आर्ट बनाना होता था उसमें ब्रश, कलम और रंगों से ज्‍यादा मशीन की भ‍ूमिका थी। 

यानी अधिकांश भूमिका मनुष्‍य के अपने दोनों हाथों, आंखों और मस्तिष्‍क की नहीं बल्कि मशीन के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की ही है। पूजा एक एडवर्टाइजिंग एजेंसी से दूसरी में जाती रहीं लेकिन जिस रचनात्‍मक सुख की तलाश थी वो पूरी नहीं हुई।

कंपनियां बदलती रहीं  पैसे बढ़ते रहे इस बीच शहर भी बदल गया लेकिन मन पहले से ज्‍यादा उदास और बेचैन रहने लगा। 

इस बीच पूजा ने कॉलेज के अपने एक सहपाठी से विवाह भी कर लिया। दोनों पुणे से मुंबई आकर रहने लगे। यहां पूजा DDB मुद्रा नाम की बड़ी ऐड एजेंसी में आर्ट डायरेक्‍टर बन गईं। लेकिन अब ये सवाल पहले से ज्‍यादा परेशान करने लगा कि कॉरपोरेट की नौकरी खा जाएगी खुद को बचाना है।

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पहला कैलिग्राफिक कार्य

कॉरपोरेट की मशीनी जिंदगी से मन को थोड़ा सुकून देने के लिए पूजा अपनी डायरी में देर रात कैलिग्राफी किया करतीं थीं। कोई सुंदर कोट, कोई कविता, शायरी या किसी किताब का अंश। 

वो डायरी अपने आप में एक आर्ट पीस था। एक बार ऑफिस में किसी की नजर उस डायरी पर पड़ गई। 

जंगल की आग की तरह खबर पूरे ऑफिस में फैल गई। अब पूजा के डेस्‍क पर सहकर्मी वो डायरी देखने के लिए आते।

पूजा भागवत को पहला कैलिग्राफिक कार्य संयोगवश मिला था 2016 में उनके ऑफिस में एक सहकर्मी ने पूछा, “कल छुट्टी है। मुंबई में एक इवेंट हो रहा है। उन्‍हें कैलिग्राफर की जरूरत है। कैंडल्‍स पर कुछ नाम लिखने हैं। तुम करोगी?”

पूजा ने हां कर दी और अगले दिन इवेंट वाली जगह पर पहुंच गईं। पहुंची तो पता चला कि वो मशहूर स्‍पेनिश फैशन ब्रांड मैसिमो दुत्ति का इवेंट था। उनका नया स्‍टोर खुला था। 

वहां एक बड़ी सी गोल मेज पर ढेर सारे रंग-बिरंगे खुशबू वाले कैंडल्‍स रखे थे। पूजा को बस इतना करना था कि आने वाले हर मेहमान का नाम उस कैंडल पर लिखना था। पूजा अपनी लंबी उंगलियों वाली सलोनी हथेलियों से उन कैंडल्‍स पर जिस तन्‍मयता और खूबसूरती से लोगों के नाम लिख रही थीं उसने मेहमानों का मन मोह लिया। 

उनकी रुचि उपहार से ज्‍यादा इस बात में थी कि कितनी खूबसूरती से उनका नाम मोमबत्‍ती पर उकेरा गया है।

पूजा ने उस शाम 200 कैंडल्‍स पर नाम लिखे। शाम खत्‍म होते-होते उंगलियां सुन्‍न पड़ गई थीं लेकिन मन में अजीब सी खुशी और सुकून था। शाम बहुत अच्‍छी रही लेकिन उससे भी ज्‍यादा अच्‍छा तब लगा जब इवेंट खत्‍म होने के बाद उनके हाथ में पेमेंट का चेक आया। एक शाम में पूजा ने उतने पैसे कमाए थे जितनी उस वक्‍त उनकी महीने की सेलरी थी।

पूजा को अपना रास्‍ता मिल गया था। यही तो उन्हें करना था। अपने मन और सुख का काम।

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Ink N Bliss की शुरुआत

2017 में नौकरी छोड़कर पूजा भागवत ने इंक एंड ब्लिस की शुरुआत की। एक डर तो था ही कि इस तरह गुजारा होगा या नहीं। नौकरी में थोड़ी गारंटी तो होती है। हर महीने के अंत में बंधी-बंधाई सेलरी आती है।

लेकिन पूजा ने अगले चार महीने के खर्च लायक पैसे बचाकर रिस्‍क लेने की ठान ली थी।

शुरुआत में उन्होंने अपना इंस्‍टाग्राम पेज बनाया। उस पेज पर उन्‍होंने अपना काम पोस्‍ट करना शुरू किया। बस उनके हुनर के चर्चे होने लगे। 

अब पूजा के पास कैलिग्राफी के छोटे-छोटे असाइनमेंट आने लगे। किसी को अपनी गर्लफ्रेंड के लिए बर्थडे कार्ड लिखवाना होता किसी को अपने पिता के रिटायरमेंट पर कोई नोट। इंडीविजुअल क्‍लाइंट धीरे-धीरे बड़े कॉरपोरेट क्‍लाइंट्स में बदलते चले गए। 

उन्हें अच्छे खासे ऑर्डर आने लगे। एक साथ 500 कार्ड्स का ऑर्डर आ जाता। इतना काम आने लगा कि उन्हें दूसरे कैलिग्राफर्स को हायर करना पड़ा।

आज इंक एंड ब्लिस की अपनी वेबसाइट है। अब उनका काम भी ज्‍यादा व्‍यवस्थित ढंग से हो रहा है। 

पूजा किताबों के कवर, प्रोडक्‍ट्स के मास्‍टहेड, नाम वगैरह भी डिजाइन कर रही हैं। उन्‍होंने एक छोटा सा होम स्‍टूडियो बनाया है। जल्‍द ही काम इतना बढ़ने की संभावना है कि होम स्‍टूडियो से मैनेज करना मुश्किल होगा। 

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Ink N Bliss क्या है?

पूजा भागवत ने Ink N Bliss की शुरुआत 2017 में की थी, यह एक कैलिग्राफी और डिजाइन स्‍टूडियो है।  

कैलिग्राफी एक कला आकृति है, जिसमें रंगीन कलम से कागज पर शब्‍दों को खूबसूरत आकृतियों में ढाला जाता है। इसका इस्‍तेमाल कार्ड प्रिंटिंग से लेकर पोस्‍टर, वीडियो, फिल्‍मों और सभी तरह की एडवर्टाइजिंग में होता है। 

कागज ही नहीं, बल्कि प्‍लास्टिक, ग्‍लास, पॉटरी आदि पर भी कैलिग्राफी की जाती है। आज पूजा भागवत के पास कई परमानेंट क्‍लाइंट हैं और नए निरंतर बढ़ रहे हैं। 

जीरो इंवेस्‍टमेंट से शुरू हुआ स्‍टार्टअप 5 साल के अंतराल में लाभकारी बिजनेस में बदल गया है।

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मेहनत और लगन से किया गया काम अपनी मंजिल प्राप्त कर ही लेता है। बस आप अपने काम के प्रति कितने उत्साहित है यह महत्वपूर्ण है।

Jagdisha पूजा भागवत आप हर दिन नए मील के पत्थर स्थापित करें।

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