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खुद को दुबला-पतला दिखाने के चक्कर में बहुत सी महिलाएं अपना ब्रेकफास्ट यानी नाश्ता या यूं कहें कि सुबह का खाना ही छोड़ देती है। ब्रेकफास्ट स्किप करने की आपकी यह आदत कहीं उलटी तो नहीं पड़ रही।

तो आपको बता दें कि ब्रेकफास्ट स्किप करने से मोटापा कम नहीं होता बल्कि बढ़ता है। और ऐसा करके आप बहुत सी बीमारियों को भी स्वयं ही न्योता देते हैं। 

एक्सपर्ट और डॉक्टर्स की मानें तो ब्रेकफास्ट सबसे महत्वपूर्ण भोजन होता है। ब्रेकफास्ट करने से आप दिन भर ऊर्जावान महसूस करते हैं। पोषणयुक्त नाश्ता करने से आपके शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य रहता है और तनाव घटता है।

ब्रेकफास्ट 7-8 घंटों की नींद के बाद का भोजन जो लगभग 10-11 घंटों के एक लम्बे विराम के बाद खाया जाता है और आप इसे ही छोड़ देते है तो गलती कर रहे हैं।

‘ब्रेकफास्ट लाइक द किंग’, ‘लंच लाइक द प्रिंस’, ‘डिनर लाइक द पौपर’ यानी नाश्ता राजाओं की तरह, दोपहर का भोजन राजकुमार की तरह, और रात का खाना दरिद्र या भिक्षुक की तरह खाना चाहिए। यह कहावत तो आपने जरूर सुनी होगी। लेकिन मानी कितनी?

कभी कैलोरीज़ की चिंता तो दूसरी ओर ये भाग दौड़ भरी जिंदगी। सुबह के समय तो वैसे भी ऐसा लगता है जैसे घड़ी फास्ट मोड पर है। और टाइम ऐसे भागता है मानों हाथ से रेत। जल्दबाजी के चक्कर में अक्सर बहुत से लोग नाश्ता ही छोड़ देते हैं।

तो एक ओर देखा जाए, हम ब्रेकफास्ट तो रोज करते हैं परन्तु हैल्दी नहीं करते। जिस कारण आवश्यक न्यूट्रीशन नहीं मिल पाता और हर समय थकावट महसूस होती है।

तों कहीं आप भी तो नहीं करते ब्रेकफास्ट को लेकर गलतियां…

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ब्रेकफास्ट न करने से बढ़ता है मोटापा

देर रात खाने की आदत के कारण अक्सर डिनर में हाई कैलोरी भोजन कर लेते है। फिर सुबह का खाना इसलिए नहीं खाते कि कैलोरी बैलेंस हो जाएंगी, जो सबसे बड़ी गलती होती है।

अक्सर महिलाएं कैलोरीज़ के बारे में सोचने के चक्कर में ब्रेकफास्ट तो स्किप कर देती है, लेकिन इससे मैटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है जो हमारे शरीर को फुलाने का काम करता है । 

ब्रेकफास्ट न केवल उपापचय (मैटाबॉलिज्म) को नियंत्रित रखता है बल्कि ग्लूकोज लेवल को भी कंट्रोल कर हमें उर्जावान बनाता है और तनाव से दूर रहने में भी मदद करता है।

तो ब्रेकफास्ट स्किप करने कि गलती सिर्फ मैटाबॉलिज्म पर ही भारी नहीं पड़ती अपितु हृदय संबंधी रोग, ब्लड़ कोलेस्ट्रॉल, टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है।

अब जो लोग नाश्ता छोड़ देते हैं, वे लंच हैवी करते हैं। जो सेहत की दृष्टि से तो सही है ही नहीं बल्कि आलस को भी वेलकम करते है। जिस कारण किसी भी काम को पूरी उर्जा और स्फूर्ति से नहीं कर पाते।

इसलिए आप कभी भी ब्रेकफास्ट स्किप करने की गलती न करें। ब्रेकफास्ट में प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन का सेवन करें।

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क्या आप खड़े-खड़े करते हैं, ब्रेकफास्ट?

लाइफस्टाइल इतनी ज्यादा भागम भाग वाली हो गई है कि पता ही नहीं चलता कि घड़ी की सुई तेज दौड़ रही है या हम। गलत लाइफस्टाइल के चलते देर रात में सोना और फिर सुबह तो मानो जद्दो-जहद के बाद उठना। जिस कारण समय का अभाव तो होता ही है और हर काम को फिर मशीन की तीव्र गति से करने का प्रयास आरंभ हो जाता है।

समय की रफ्तार को पकड़ने के चक्कर में हम अक्सर कुछ बेवकूफी कर बैठते है। मतलब कहीं स्कूल, काॅलेज, और ऑफिस के लिए देरी न हो जाए और समय का आभास होने के कारण अक्सर जल्दी-जल्दी या खड़े-खड़े ही खाना खाते हैं। और कई बार तो समय बचाने के चक्कर में चलते-चलते ब्रेकफास्ट करना उचित समझते हैं। 

अब इस तरह खाने की आदतों के कारण न तो खाने को ही स्वाद लेकर खाया और न ही चबा चबाकर। जिस कारण पाचनतंत्र पर तो गलत प्रभाव पड़ता ही है साथ ही शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण भी ठीक ढ़ंग से नहीं हो पाता है।

आपने sit and eat properly यानी बैठ कर अच्छे-से चबा चबाकर खाने वाले सिद्धांत को अपने जीवन में लाना होना।

एक रिसर्च में भी पाया गया है कि जो लोग आराम से बैठकर अपने खाने को आनंद लेकर और चबा चबाकर खाते है उनका पाचनतंत्र भी अच्छे से काम करता है।

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ब्रेकफास्ट के साथ चाय या कॉफी लेना है पसंद

बहुत से लोगों की चाय या कॉफी के बिना सुबह ही नहीं होती है। अब आपने सुना भी होगा कि बिना सुबह की चाय की चुस्की के बिना आंखें कहां सही से खुलती हैं । कुछ लोगों को तो चाय की ऐसी आदत होती है कि वे चाय न पिएं तो उनके सिर में दर्द रहता है।

कुल मिलाकर चाय या कॉफी को ब्रेकफास्ट का एक अभिन्न अंग माना जाता है। जिस कारण नाश्ते में आप जिन पोषक तत्त्वों को सम्मिलित कर रहे हैं वे तो शरीर में अच्छी तरह अवशोषित ही नहीं हो पाते।

अगर आपको चाय या कॉफी लेने की आदत है तो उसे ब्रेकफास्ट से 1 घंटा पहले या 1 घंटा बाद में लें।

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क्या आप भी ब्रेकफास्ट में कार्ब्स बिल्कुल नहीं खाते

अधिकतर वजन नियंत्रित रखने की लालसा के कारण महिलाएं कार्ब्सयुक्त भोजन को पूरी तरह टाटा बाए बाए कर देती है। 

क्या आपको पता है कार्ब्स हमारे शरीर और दिमाग को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है। लेकिन जब आप कॉम्प्लेक्स कार्ब्स, जिसमें विटामिन, मिनरल और फाइबर होता है उस ब्रेकफास्ट को लेना बंद कर देते है तो आपको थकावट और चक्कर जैसी शिकायत रह सकती है।

ब्रेकफास्ट कभी भी जीभ के स्वाद के अनुसार नहीं करना चाहिए। अक्सर ब्रेकफास्ट में लोग वह खाना पसंद करते है जो उन्हें पसंद होता है, चाहे उस खाने से पोषक तत्व बिल्कुल न मिल रहे हों फिर भी हमें तो वही पसंद है।

तो हाई कार्ब्स वाला खाना भी शरीर के लिए अच्छा नहीं होता, वह शरीर में शुगर लेवल को बढ़ाकर फेट्स में बदलने का काम करता है। जो डाइबिटीज के साथ-साथ अन्य बिमारियों का भी कारण है।

तो ब्रेकफास्ट में रिच प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स वाले खाने को शामिल करें।

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ब्रेकफास्ट न करने के नुक़सान

  • ब्रेकफास्ट न करने वालों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित शोध के अनुसार ब्रेकफास्ट न करने से शरीर में इन्सुलिन के प्रति गंभीर प्रतिरोध उत्पन्न हो जाता है। 
  • कई शोध में यह बात साबित हुई है कि जो लोग अच्छे से सुबह का नाश्ता करते हैं उन्हें वजन संबंधी समस्या नहीं होती है। अगर आप ब्रेकफास्ट स्किप करते हैं, तो दोपहर के खाने में अपनी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करेंगे। यह आपके मोटापे की वजह बन सकता है। 
  • अगर आप ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं तो आपके शरीर को ऊतकों से ग्लूकोज लेना पड़ता है। जिस कारण आप थके-थके और उर्जाहीन महसूस करते है।
  • ब्रेकफास्ट स्किप करने कि आपकी आदत आपके शरीर और दिमाग दोनों पर प्रभाव डालती है। जिस कारण आपकी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम होती है। 
  • अगर आप ब्रेकफास्ट छोड़ देते हैं या जल्दबाजी में आधा अधूरा खाते हैं तो डाइबिटीज 2 का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होता है और आपको डिप्रेशन, टेंशन और बैचेनी भी हो सकती है।
  • पोषणयुक्त ब्रेकफास्ट करने वालों से हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कोसों दूर रहता है। सुबह नाश्ता नहीं करने से हाईपरटेंशन और ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।

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हमारा उद्देश्य आपको जानकारी देना है। यदि आपको किसी भी तरह अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करनी है तो आप अपने नजदीकी डॉक्टर या न्यूट्रीशन एक्सपर्ट से उचित सलाह ले सकते हैं । यह जानकारी सिर्फ जागरूक करने के उद्देश्य से लिखी गई है |

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