baljeet kaur

देश की बेटियां हर दिन अपनी सफलताएं दर्ज करा, रच रही हैं इतिहास। और दुनिया भर में भारत का नाम रौशन कर रही हैं। बलजीत कौर ने बहुत कम समय में जो रिकॉर्ड बनाया है, वह किसी उपलब्धि से कम नहीं है।

आपने बछेंद्री पाल का नाम तो जरूर सुना होगा। बछेंद्री पाल मांउट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला हैं। अब भारतीय महिला पर्वतारोही में बलजीत कौर का नाम भी जुड़ गया है। बलजीत कौर ने भी लहराया मांउट एवरेस्ट पर तिरंगा। 

बलजीत कौर की बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने एक महीने से कम समय में मांउट एवरेस्ट के साथ 4 ऊंची पर्वत चोटियों पर परचम लहराया। ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय पर्वतारोही बन गईं हैं।

बलजीत कौर पहली भारतीय हैं, जिन्होंने 30 दिन में 8000 मीटर से ज्यादा उंचाई वाली 5 चोटियों पर चढ़ाई की। साथ ही वह पुमोरी और धौलागिरी चोटी पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही भी हैं।

बुलंद हौसले व दृढ़ निश्चय के साथ किया जाने वाला कार्य निश्चित ही सफलता की ओर बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते है। परिस्थितियां अगर विरूद्ध भी हो, तो भी प्रयास नहीं छोड़ना चाहिए। कभी भी असफलता को हृदय से लगा नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

असफलताओं से सबक लिया जा सकता है, लेकिन उन्हें अपने ठहरने का कारण नहीं बना लेना होता। अपने कार्य के प्रति पूर्ण समर्पण भाव ही आपके और काम के मध्य एक गहन संबंध स्थापित करता है।

बलजीत कौर की कहानी भी असफलताओं के बाद विजय की कहानी है। उनके पर्वत प्रेम ने उन्हें कभी ठहरने ही नहीं दिया। 

साल 2016 में माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए गई बलजीत कौर के पास उस समय एक्स्ट्रा ऑक्सीजन मास्क ना होने के कारण, उन्हें केवल 300 मीटर पीछे से ही वापस लौटना पड़ा था। लेकिन 6 सालों की कड़ी मेहनत के बाद अब जाकर उन्होंने यह सफलता प्राप्त की है।

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कौन है, बलजीत कौर?

बलजीत कौर हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कुनिहार के पास कंडाघाट तहसील के एक छोटे से गांव ममलीन की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम अमरीक सिंह है, जो हिमाचल प्रदेश ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन में बस ड्राइवर हैं। उनकी मां का नाम शांति देवी है, वे एक ग्रहणी हैं। 

बलजीत कौर तीन भाई-बहनों में से एक हैं। वह बचपन से ही अपनी मां की खेती के कामों में मदद किया करती थीं। पढ़ाई के साथ-साथ वह खेती भी किया करती थीं।

बलजीत कौर को बचपन से ही लगता था कि जब भी वह पहाड़ों की ओर देखती है, तो वे मानों उन्हें बुलाते थे। अब छोटी उम्र से पहाड़ चढ़ने का शौक तो उन्हें था, लेकिन यह नहीं पता था कि इसके लिए ट्रेनिंग भी करनी होती है। काॅलेज के दौरान उन्हें ट्रेनिंग के विषय में पता चला। वहीं वह एनसीसी से जुड़ी और ट्रेनिंग की शुरुआत की।  

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बलजीत कौर की शिक्षा

उन्होंने सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की। सोनल काॅलेज के दौरान बलजीत कौर नेशनल कैडट कॉर्प्स यानी एनसीसी में शामिल हो गईं। 

बलजीत कौर ने पहली बार एनसीसी कैंप के दौरान ही पर्वत पर चढ़ाई की। 20 साल की उम्र में उन्हें माउंट देव टिब्बा के एनसीसी अभियान के लिए चुना गया।  

साल 2015 में एनसीसी पर्वतारोहियों की एक 10 सदस्यीय टीम के साथ वह माउंट त्रिशूल 7120 मीटर ऊंचे पर्वत पर फतह करने के लिए निकले अभियान का हिस्सा बनी।

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पुमोरी और धौलागिरी चोटी पर फतह करने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही 

बलजीत पहली भारतीय महिला है, जिन्होंने नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 7161 ऊंची पुमोरी चोटी पर फतह करने की उपलब्धि प्राप्त की है। 2021 में पुमोरी चोटी पर परचम लहराने के बाद से उनके हौसलों की उड़ान कहां थमने वाली थी। और एवरेस्ट की ओर तो उनकी नजरें कब से टिकी हुई थी।

8,167 मीटर ऊंचे माउंट धौलागिरी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने वाली भी बलजीत कौर पहली भारतीय महिला पर्वतारोही बन गईं।

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एवरेस्ट चढ़ाई का पहले भी कर चुकी हैं प्रयास 

वह सोलन कॉलेज में एनसीसी में थी। 2015 में एक अभियान के दौरान खराब मौसम के कारण उनकी टीम 6350 मीटर ऊंचाई तक ही पहुंच पाई।

हालांकि एक साल बाद फिर से 2016 में वह एवरेस्ट के एक अभियान का हिस्सा बनी। लेकिन उस दौरान ऑक्सीजन मास्क की खराबी के चलते बलजीत कौर को मंजिल के निकट से ही लौटना पड़ा था। 

उस वक्त बलजीत 8848.86 मीटर उंची माउंट एवरेस्ट से सिर्फ 300 मीटर की दूरी से चुक गई थी। हालांकि उनका हौसला नहीं टूटा और साल 2022 में बलजीत कौर ने उस समय इतिहास रच दिया।

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जब रचा इतिहास

28 अप्रैल 2022 को बलजीत कौर ने 8091 मीटर उंचे माउंट अन्नपूर्णा को फतह किया। फिर 12 मई 2022 को उन्होंने 8566 मीटर उंचे माउंट कंचनजंगा पर चढ़ाई की। 

बलजीत कौर के साथ उनके गाईड मिगमा शेरपा भी थे। आपको बता दें, बलजीत कौर ने 8 हजार मीटर ऊंची 2 चोटियों को 2 हफ्ते में फतह करने का रिकॉड भी अपने नाम कर लिया है।

बलजीत कौर 17 मई को रात 10 बजे अपने दल के साथ माउंट एवरेस्ट के लिए निकली थी। पांच दिनों के संघर्ष के बाद उन्होंने अपनी मंजिल प्राप्त की। 

बलजीत कौर ने माउंट एवरेस्ट पर 21 मई की सुबह 4:30 बजे तिरंगा फहराकर देश का नाम ऊंचा किया।

फिर बलजीत कौर ने अपनी गाइड मिंगमा शेरपा के साथ दुनिया की चौथी सबसे ऊंची चोटी माउंट ल्होत्से (8516 मीटर) को सफलतापूर्वक फतह किया। एक मिडिया रिपोर्ट के अनुसार पासंग शेरपा ने कहा कि इस वसंत ऋतु में बलजीत कौर की यह चौथी सफल चढ़ाई थी।

साथ ही पीक प्रोमोशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पासंग शेरपा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश की रहने वाली 27 वर्षीय पर्वतारोही बलजीत कौर ने 23 मई को माउंट ल्होत्से को फतह किया। उन्होंने कहा कि वह एक सीजन में आठ हजार मीटर ऊंची चार चोटियों पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।

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फिर बलजीत कौर माउंट मकालू को फतह करने के लिए निकली। मकालू दुनिया का पांचवा सबसे ऊंचा पर्वत है जिसकी ऊंचाई 8,485 मीटर है। यह नेपाल और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र, चीन के बीच की सीमा पर, माउंट एवरेस्ट से 19 किमी दक्षिण-पूर्व में महालंगुर हिमालय में स्थित है। आठ हजारों में से एक मकालू एक अलग-थलग चोटी है जिसकी आकृति चार भुजाओं वाला पिरामिड है। माउंट मकालू को सबसे खतरनाक चोटियों में से माना जाता है और शिखर की स्थिति और ठंडे तापमान के कारण इस शिखर पर चढ़ाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। 

28 मई को बलजीत कौर ने माउंट मकालू चोटी को भी प्रणाम किया। एक ही सीजन में 5 चोटियों पर फतह करने वाली बलजीत कौर पहली भारतीय बन गईं हैं।

बलजीत कौर के बुलंद हौसले की बदौलत ही इतनी बड़ी सफलता उन्हें मिली है।

एवरेस्ट पर चढ़ाई के इस सफर में सोलन की कई समाज सेवी संस्थाओं ने भी उनकी सहायता की है।

बलजीत कौर भविष्य में बछेंद्री पाल से मिलने की इच्छा रखती हैं। उन्हें डांस और एक्टिंग का भी शौक है। वह योगा करने के साथ-साथ सिखाती भी हैं। उन्हें भारतीय सेना से बहुत लगाव है और वे उससे किसी भी प्रकार जुड़ना चाहती हैं।

Jagdisha बलजीत कौर आपके बुलंद हौसलों को सलाम।

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