इस बात को ले कर बहुत सी भ्रांतियाँ है कि पीरियड के दौरान योगासन नहीं करना चाहिए | ऐसा नहीं है कि आप योग नहीं कर सकती, आप आरामदायक और सहज आसन कर सकती हैं | 

योग करने से आपको अच्छा महसूस होगा और पीरियड के दौरान होने वाले दर्द से भी आराम मिलेगा | हालांकि आप जटिल आसन तीव्र रक्त स्त्राव यानि पीरियड के पहले दो दिन अगर असहज महसूस कर रही हैं, तो उन दिनों योग रहने दें |

आप प्राणायाम भी कर सकती हैं, जिससे चिड़चिड़ाहट और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है | पीरियड के दौरान कपालभाति प्राणायाम न करें |

आपका शरीर क्या कह रहा है, वो जरूर सुनें अगर कोई आसन करने में कष्ट हो रहा है तो उसे जबरदस्ती न करें |

आइये जानते हैं कुछ आसान योगासन जिन्हें आप पीरियड के दौरान कर होने वाली ऐंठन और दर्द में आराम महसूस कर सकें…

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बालासन या चाइल्ड पोज

  • योग मैट या जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं |
  • सांस अंदर लेते हुए दोनों हाथों को सीधा सिर के ऊपर उठा लें | हथेलियाँ नहीं जोड़नी है |
  • सांस बाहर छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें | ध्यान रहे कूल्हे के जोड़ों से झुकना है, कमर के जोड़ों से नहीं |
  • तब तक आगे झुकना है जब तक आपकी हथेलियाँ जमीन को न छू जाएं |
  • अब सिर भी जमीन को छुएं |
  • अब आप एक बच्चे की मुद्रा में आ गये हैं, अब पूरे शरीर की विश्राम अवस्था में रहने दें और एक गहरी सांस लें और छोड़ दें | सांस को सामान्य रखें |
  • इस मुद्रा में आप 30 सेकेंड से 3 मिनट तक कर सकतें हैं |
  • पिछली स्थिति में वापस आने के लिए हथेलियों को कंधों के पास लायें और धीरे-धीरे अपने ऊपरी शरीर को उठाएं |

अगर आपको दस्त या घुटनों की समस्या है और आप गर्भवती है तो यह आसन न करें |

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जानुशीर्षासन

  • पैरों को सामने फैलाते हुए योग मैट या जमीन पर बैठें | 
  • दाहिने पाँव को घुटने से मोड़कर पाँव के तलवे को बाएँ पाँव की जंघा से लगा दें |
  • दोनों हाथों को ऊपर उठाएँ और नीचे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों से बाएँ पाँव के ऊपरी हिस्से को पकड़कर अन्दर की तरफ यानी सिर की ओर खींचें |
  • सिर को धीरे-धीरे झुकाते हुए बाएँ घुटने पर लगाएँ, 5 से 10 बार सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें यानि आप 30 सेकेंड से 1 मिनट तक इस मुद्रा में रह सकते हैं |
  • आसन से बाहर निकलने के लिए साँस अंदर लेते हुए धड़ को ऊपर उठायें | ध्यान रहे कि आप अपनी पीठ को सीधा ही रखें और अपने कूल्हे के जोड़ों से ही ऊपर की ओर उठें |
  • जब पूरी तरह सीधे बैठ जायें | दाहिनी टाँग को सीधा कर लें 
  • पुनः उसी विधि से बायाँ पाँव मोड़कर दाहिनी जाँघ पर लगाएँ तथा दाहिने पाँव के घुटने से सिर का स्पर्श कराएँ तथा दोनों हाथों से पाँव को अन्दर की ओर खींचें |
  • जानुशीर्षासन की पूरी प्रक्रिया को दोनों पैरों के साथ दोहराएं |
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बद्ध कोणासन

  • योग मैट या जमीन पर अपने पैरों को सीधा सामने फैलाकर बैठ जाएं |
  • अब धीरे-धीरे अपने दोनों पैरों के घुटनों को मोड़ें और दोनों पैरों के तलवों को साथ में लाएं |
  • अपने घुटनों को बाहर की ओर नीचे रखें |
  • धीरे-धीरे आराम से अपनी एड़ी को पेल्विस के करीब लाएं |
  • अब अपने दोनों पैरों के अंगूठों को हाथों से पकड़ें |
  • आप इस मुद्रा में 1 से 5 मिनट तक बने रह सकते हैं |
  • सांस लें और अपने घुटनों को ऊपर उठाएं, और पैरों को अपनी मूल स्थिति में वापस ले आएं |

हमेशा याद रखें कि कभी भी घुटनों पर जमीन को छूने के लिए दबाव न डालें | लेकिन आप जांघ की हड्डियों पर घुटनों को नीचे करने के लिए हल्का दबाव दे सकते हैं | इससे घुटने अपने आप जमीन की तरफ चले जाएंगे |

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उपविष्ठ कोणासन

  • समतल जमीन या योगा मैट पर पैरों को सामने सीधा करके बैठ जाएं |
  • कमर सीधी रखें | दोनों हाथों को कूल्हों के पीछे जमीन पर टिका दें |
  • धीरे धीरे दोनों पैरों को विपरीत दिशा में फैलाना शुरू करें | पंजों को सीधा उंगलियों को अंदर की ओर झुकाकर रखें |
  • जितना संभव हो दोनों पैरों को फैलाते रहें |
  • अब सांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर की तरफ खिंचाव दें | दस से पंद्रह सेकेंड रुकें | शुरुआती दिनों में तकिए का प्रयोग कर सकते हैं |
  • सांस बाहर छोड़ते हुए धीरे धीरे शरीर को आगे की ओर झुकायें | दोनों हाथों को सामने लाकर फैलाते हुए ज़मीन पर रख दें | जितना संभव हो उतना ही नीचे झुकें, जबरदस्ती न करें |
  • इस आसन के दौरान पैर के अंदर वाली मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होगा |
  • अगर खिंचाव महसूस नहीं हो रहा है तो पैरों को और ज्यादा खोलें और थोड़ा सा आगे की ओर झुकें |
  • झुकी हुई अवस्था में पंद्रह से बीस सेकेंड रुकने के बाद धीरे धीरे शरीर को ऊपर ले आएं |
  • हाथों को सामान्य तथा पैरों को भी धीरे धीरे पास में लाएं |

उपविष्ठ कोणासन का नियमित दो से तीन चक्र का अभ्यास करना लाभकारी होता है |

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पश्चिमोत्तानासन

  • जमीन या योगा मैट पर दोनों पैरों को एकदम सीधे फैलाकर बैठ जाएं | दोनों पैरों के बीच में दूरी न हो और जितना संभव हो पैरों को सीधे रखें | इसके साथ ही गर्दन, सिर और रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें |
  • अब धीरे से आगे की ओर झुकते हुए और अपने घुटनों को बिना मोड़े हाथों की उंगलियों से पैरों की उंगलियों को छूने की कोशिश करें |
  • इसके बाद गहरी सांस लें और धीरे से सांस को छोड़ें | अपने सिर को दोनों घुटनों से छूने की कोशिश करें |
  • सांस पूरी तरह छोड़ कर, इसी मुद्रा में दस से तीस सेकेंड तक रहें |
  • अब सामान्यरूप से सांस लें और इस आसन को 3 से 4 बार दोहराएं |

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विपरीत करनी आसन

  • सबसे पहले एक योगा मैट को बिछा कर उस पर पीठ के बल लेट जाएं |
  • अपने दोनों हाथ और पैरों को जमीन पर सीधा रखें |
  • अब धीरे-धीरे दोनों पैरों को ऊपर उठायें | जब पैर 45 डिग्री तक आ जायें तो हाथों से कमर को सहारा देते हुए कूल्हों को भी ऊपर उठायें |
  • अपने दोनों पैरों को 90 डिग्री कोण तक ऊपर उठायें | आप शुरूआत में दीवार के सहारे भी अभ्यास कर सकते हैं |
  • ध्यान रहे की कोहनियाँ ज़मीन पर टिकी रहें और हाथों से कमर को सहारा दिए रखें |
  • पीठ ज़मीन से लगभग 45 डिग्री होनी चाहिए |
  • आप आराम पाने के लिए अपने कूल्हों के नीचे किसी तकिये या कंबल को मोड़ कर रख सकती हैं |
  • पीरियड के दौरान आप सुनिश्चित करें कि आपकी पीठ और सिर फर्श पर आराम कर रहे है और पैर 90 डिग्री कोण तक ऊपर है |
  • इस स्थिति में आप 30 सेकेंड से पांच मिनट के लिए रुकें |

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