nikhat zareen boxer

तुर्की के इस्तांबुल में होने वाले मुकाबले में महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के 52 किलो वर्ग में भारतीय मुक्केबाज (Boxer) निकहत ज़रीन ने गुरुवार (19 मई, 2022) को फ़्लाईवेट फ़ाइनल मुकाबले में थाईलैंड की जितपोंग जुतामास को हरा कर गोल्ड मेडल भारत के नाम किया |

भारत में महिला मुक्केबाजी का मतलब 6 बार की वर्ल्ड चैम्पियन एम.सी. मैरीकॉम हैं | लेकिन, निकहत ज़रीन ने अब इस लिस्ट में अपना नाम बना लिया है |

बॉक्सिंग लीजेंड मैरीकॉम ने इस चैम्पियनशिप में 6 बार गोल्ड मेडल जीतकर देश के तिरंगे की शान बढ़ाई है |

मैरी कॉम, सरिता देवी, जेनी आरएल और लेखा केसी के बाद निकहत ज़रीन पांचवीं भारतीय महिला मुक्केबाज़ बन गईं हैं जिन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है |

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5-0 से हराया थाइलैंड की जिटपोंग जुटामास

जिटपोंग जुतामास कजाकिस्‍तान की जाइना शेकेर्बेकोवा को हराकर फाइनल्‍स में पहुंचीं थीं | जाइना, जो इसके पहले तीन बार वर्ल्‍ड चैंपियन रह चुकी हैं | तो देखा जाए तो निकहत ज़रीन के लिए यह मैच इतना आसान तो नहीं था |

निकहत ज़रीन ने मुकाबले में अद्भुत प्रदर्शन दिखाया | उन्होंने अपने तकनीकी कौशल का इस्तेमाल किया और फुर्तीले पैर वाली प्रतिद्वंद्वी को पछाड़ने के लिए कोर्ट को अच्छी तरह से कवर किया |

मुकाबला कड़ा था, लेकिन डिफेंस में खेलने यानी बच-बचकर शुरुआत करने की बजाय निकहत ज़रीन शुरू से ही अटैक की मुद्रा में आ गईं |

शुरुआती तीन मिनट के भीतर ही उन्‍होंने जुटामास पर दनादन मुक्‍कों की बरसात कर दी | जाइना के साथ आक्रामक ढंग से खेलकर जीती जुटामासा के पास अब अपने डिफेंस के अलावा ओर कोई रास्ता ही समझ नहीं आया | 

निकहत ज़रीन उन्‍हें उस एक माइक्रो सेंकेंड का भी समय नहीं दे रही थीं कि वो सांस ले सकें, अपना दांव बदल सकें और बाजी पलट जाए |

वह पहले दौर में सभी जजों को प्रभावित करने में सफल रहीं |

उन्होंने थाई मुक्केबाज की तुलना में कहीं अधिक मुक्के मारे | दूसरा दौर कड़ा था और जितपोंग जुटामास ने उन्हें 3-2 से जीत लिया |

फाइनल राउंड में निकहत ज़रीन ने प्रतिद्वंद्वी को बुरी तरह धराशाही कर दिया और 5-0 से अपनी जीत का पताका फैराया |

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कौन है निकहत ज़रीन

निकहत ज़रीन का जन्‍म 14 जून, 1996 को तेलंगाना के निजामाबाद में एक मध्‍यवर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ | उनके पिता मुहम्मद जमील अहमद और माता परवीन सुल्ताना हैं |

उनके पिता साउदी अरब में एक सेल्‍स मैन थे और माँ गृहणी | वहाँ 15 साल बिताने के बाद उनके पिता ने बेटियों की पढ़ाई और खेल में उनके करियर को देखते हुए निजामाबाद लौटने का फैसला किया |

वह 4 बहनो में तीसरे नंबर की है | उनकी दो बड़ी बहने डॉक्टर है और छोटी बहन बैडमिंटन खेलती है |

निकहत ज़रीन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा निजामाबाद, तेलगांना के निर्मला हृदय गर्ल्‍स हाई स्‍कूल, हैदराबाद से की है | उन्होंने बी.ए. की पढ़ाई हैदराबाद से पूरी की |

उनके पिता को फुटबॉल और क्रिकेट खेलने में रूचि थी, वो चाहते थे कि उनकी 4 बेटियों में से कोई एक खिलाड़ी बने |

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कैसे शुरू हुआ मुक्केबाजी का सफर

उनके पिता की हमेशा से इच्छा रही कि उनकी बेटियाँ जीवन में कुछ बड़ा करे | निकहत ज़रीन नहीं जानती थी कि उन्हें अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए क्या करना है | 

एक दिन उन्‍होंने अपने चाचा शम्‍सुद्दीन को बॉक्सिंग रिंग में देखा |

हाथों से ग्‍लव्‍स पहने और विरोधी पर मुक्‍कों की बरसात कर रहे चाचा की वो तस्‍वीर कहीं उनके मस्तिष्क में घर कर गई | 

12 साल की निकहत ज़रीन इस खेल के प्रति बड़ी उत्साहित हुई | फिर तो बस ठान लिया कि बॉक्‍सर ही बनना है |

शुरू में सबको थोड़ा अजीब लगा, और रिश्‍तेदारों का तो आप अंदाजा लगा ही सकते है | मां ने भी पहले कुछ ना-नुकुर की, लेकिन फिर बेटी के हौसले को देखते हुए उनका पूरा सहयोग किया | पिता की एक हां ने तो मानो उत्साह को हजारों गुणा बढ़ा एक अदृश्य ताकत का संचार किया |

चाचा शम्सुद्दीन के दोनों बेटे एतेशामुद्दीन और इतिशामुद्दनी के मुक्केबाज होने के कारण, निकहत ज़रीन को मुक्केबाज बनने के लिए कहीं बाहर से प्रेरणा की जरूरत नहीं पड़ी | 

जब उन्होंने 2008 में मुक्केबाजी शुरू की तो निजामाबाद या हैदराबाद में महिला मुक्केबाज किसी प्रतिस्पर्धा में बहुत कम ही नजर आती थी | 

मुक्केबाजी ऐसा खेल है, जिसमें लड़कियों को ट्रेनिंग या बाउट के दौरान शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनने होते है | तो रिश्तेदारों का मुँह बना लेकिन उनके माता-पिता ने उनका पूरा साथ दिया |

निकहत ज़रीन की मुक्केबाजी का शुरुआती प्रशिक्षण (Training) उनके पिता ने ही दिया | एक साल तक पिता से प्रशिक्षण लेने के बाद वह ट्रेनिंग के लिए विशाखापट्टनम गईं | वहां स्‍पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में आई.वी. राव के नेतृत्‍व में उनकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग शुरू हुई |

आई.वी. राव द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्‍मानित देश के प्रसिद्ध बॉक्सिंग कोच थे और बहुत कठोर भी | उनकी उम्‍मीदों पर खरा उतरना बिल्कुल भी आसान नहीं था | लेकिन निकहत ज़रीन भी कहा हार मानने वालो में से थीं | वह दृढ़ इच्छाशक्ति से अपने अभ्यासो में प्रवीण होने के लिए हमेशा प्रयत्नशील है |

एक साल की ट्रेनिंग के बाद 2010 में इरोड नेशनल्‍स में निकहत ज़रीन को गोल्‍डन बेस्‍ट बॉक्‍सर का सम्मान मिला | 

उसके अगले ही साल 2011 में 14 साल की उम्र में उन्होंने तुर्की, यूथ वर्ल्‍ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्‍ड मेडल जीत अपने नाम किया | 

लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चमकने के लिए 5 साल का इंतजार करना पड़ा | वह 2016 में फ्लाइवेट कैटेगरी में मनीषा मौन को हराकर पहली बार सीनियर नेशनल चैम्पियन बनीं | 

लंदन ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मैरीकॉम भी इसी वेट कैटेगरी में ही थीं | ऐसे में निकहत ज़री के लिए सीनियर लेवल पर अपना स्थान बनाना आसान नहीं रहा | 

कंधे की चोट के कारण निखत 2017 में बॉक्सिंग रिंग में नहीं उतर पाईं थीं |

2018 में उन्होंने सीनियर नेशनल्स में ब्रॉन्ज जीता | 2019 की एशियन चैम्पियनशिप और थाईलैंड ओपन में मेडल जीतकर निकहत ज़रीन ने सीनियर लेवल पर खेलने के लिए अपना रास्ता साफ कर लिया था | 

लेकिन 51 किलो वेट कैटेगरी में मैरीकॉम की मौजूदगी की वजह से निकहत को मौके नहीं मिल पा रहे थे | 

उन्हें 2018 के कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स की टीम में भी जगह नहीं मिल पाई | लेकिन पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाए रखा |

साल 2019 में उन्होंने आयोतिज स्‍ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट के दौरान अपना शानदार प्रदर्शन करते हुए स्‍वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया |

इसके बाद निकहत जरीन ने बैंकॉक में आयोजित साल 2021 में एशियाई मुक्‍केबाजी चैंपियनशिप में कांस्‍य पदक जीता था जो की उनका पहला कास्‍य पदक था |

अब मंजिल उन्हें बुला रही थी लेकिन रास्‍ता आसान नहीं था |

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जब मैरीकॉम ने कहाँ, कौन है निकहत ज़रीन

भारतीय बॉक्सिंग फेडरेशन ने मैरीकॉम को टोक्यो ओलंपिक में बगैर ट्रायल के 51 किग्रा कैटेगरी के लिए चुना था | तब के चेयरमैन राजेश भंडारी ने कहा था कि निकहत ज़रीन को भविष्य के लिए बचा कर रख रहे हैं | 

ऐसे में निकहत ज़रीन को अच्छा नहीं लगा और उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए खेल मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखा था | और निष्पक्ष अपील की मांग की |

इस पूरे विवाद के बाद मैरीकॉम का ट्रायल हुआ | उनका मुकाबला निकहत ज़रीन से हुआ, जिसमें मैरीकॉम ने 9-1 से जीत हासिल की | 

जब निकहत ज़रीन ने टोक्यो ओलंपिक के लिए ट्रायल की मांग की थी, तब मैरीकॉम ने प्रेस के सामने पूछा था, ‘निकहत जरीन कौन है?’ 

अब वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने के बाद निकहत ज़रीन ने बता दिया कि वह वर्ल्ड चैम्पियन है | 

मेडल जीतने के बाद निकहत ज़रीन ने प्रेस से पूछा- क्या मेरा नाम ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है?

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2018 के बाद भारत को 2022 में मिला स्वर्ण

भारत की ओर से 12  सदस्यीय टीम ने हिस्सा लिया था | भारत ने चार सालो के बाद स्वर्ण पदक जीता है | निकहत ज़रीन से पहले 2018 में एम. सी. मैरीकॉम ने जीता था स्वर्ण | 

निकहत ज़रीन के लिए यह साल बहुत शानदार रहा | इससे पहले उन्होंने फरवरी में स्ट्रेंटजा मेमोरियल में स्वर्ण पदक जीता था | वह ऐसा करने वालीं पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनी थीं | 

क्या जानते है निकहत ज़रीन अर्थ

‘निकहत’ एक सूफी शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘सुगंध’, ‘खुशबू’ या ‘महक’ जबकि ‘जरीन’ का अर्थ होता है ‘ स्वर्ण यानी की सोना |’  

निकहत ज़रीन ने कारनामे भी अपने नाम के अनुरूप ही किए है | अब लोग भी उनकी सराहना करते हुए कह रहे है कि आज एक ‘स्वर्ण’ ने ‘सोना’ जीतकर जीत की खुशबू फैला दी है, जिन पर हर भारतीय को गर्व है |

निकहत ज़रीन एडिडास की ब्रांड समर्थक है | और साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण लक्षित ओलंपिक पोडियम योजना (Target Olympic Podium Scheme of Sports Authority of India) की सदस्य भी हैं |

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पेरिस ओलिंपिक में स्वर्ण जीतने का बनाया लक्ष्य

25 वर्षीय मुक्केबाज निकहत ज़रीन ने पेरिस ओलिंपिक के लिये तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन यह तय नहीं है कि वह किस भार वर्ग में खेलेंगी |

उन्हें या तो 54 किग्रा या फिर 50 किग्रा में हिस्सा लेना होगा | निकहत ज़रीन ने इस बारे एक इंटरव्यू में कहा, ‘भार वर्ग बदलना मुश्किल होता है फिर चाहे आपको कम वजन वर्ग में भाग लेना हो या अधिक वजन वर्ग में | कम भार वर्ग से अधिक भार वर्ग में हिस्सा लेना अधिक मुश्किल होता है |’

उन्होंने ने यह भी कहा, ‘मुझे लगता है कि अगर मैं 50 किग्रा वर्ग में खेलती हूं तो इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा | आम तौर पर मेरा वजन 51 किग्रा या 51.5 किग्रा रहता है | ऐसे में मेरा शरीर 50 किग्रा में अच्छा काम करेगा | इसलिए मैं अभी 50 किग्रा भार वर्ग में खेलना जारी रखूंगी |’

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भारत ने इस टूर्नामेंट के अब तक के 11 संस्करणों में 36 पदक जीते

जरीन के स्वर्ण पदक के अलावा मनीषा मौन ने 57 भारवर्ग और पहली बार विश्व चैंपियनशिप में खेल रही प्रवीण हुड्डा ने 63 भारवर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया | इन दोनों को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था |

2019 में रूस में आयोजित टूर्नामेंट के पिछले संस्करण में भारतीय मुक्केबाजों ने एक रजत और तीन कांस्य पदक जीते | 

भारत ने टूर्नामेंट के अब तक के 11 संस्करणों में नौ स्वर्ण, आठ रजत और 19 कांस्य सहित 36 पदक जीते हैं | इस मामले में रूस 60 पदक और चीन 50 पदक जीत कर आगे है |

मिल रही है ढ़ेरों बधाईयाँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने निकहत ज़रीन को बधाई देते हुए ट्वीट किया, ‘हमारे मुक्केबाजों ने हमें गौरवान्वित किया है | निकहत ज़रीन को स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई | उन्होंने आगे लिखा, मैं मनीषा मौन और परवीन हुड्डा को भी कांस्य पदक जीतने पर बधाई देता हूं |

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने निकहत ज़रीन को शुभकामनाएं देते हुए ट्वीट किया, ‘महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर निकहत ज़रीन को बधाई | भारत को आपकी उपलब्धि पर गर्व है | आपके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं |’

उनकी सफलता पर विराट कोहली ने ट्वीट किया और लिखा, ‘देश को गर्व महसूस कराने के लिए निकहत ज़रीन को मुबारकबाद जिन्होंने गोल्ड मेडल जीता | उनके अलावा मनीषा मौन और परवीन को भी शुभकामनाएं |’

निकहत ज़रीन के पिता मोहम्मद जमील ने एक इंटरव्यू में कहाँ, ‘विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतना ऐसी चीज है, जो मुस्लिम लड़कियों के साथ-साथ देशी की हर लड़की को जिंदगी में बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी | निकहत ने खुद ही अपना रास्ता तैयार किया है |’

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पुरस्कार

  • 2011 महिला जूनियर और युवा विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में निकहत ज़रीन स्वर्ण पदक जीता |
  • 2014 यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता |
  • 2014 नेशंस कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता |
  • 2015-16 सीनियर वुमन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता |
  • 2019 थाईलैंड ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में रजत पदक जीता |
  • 2019 स्ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता |
  • 2022 स्ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता |
  • 2022 महिला विश्व चैंपियनशिप 52 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता |

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Jagdisha आप भविष्य में भी विरोधी पक्ष के दांत खट्टे कर देश का मान बढ़ाती रहें | हम आपके स्वस्थ जीवन की कामना करते है |

लाखों साधारण परिवार की लड़कियों के लिए आप प्रेरणा हो | एक लड़की या महिला कभी कमजोर नही होती | बस एक बार ठानने की देर है | स्वयं पर भरोसा कर और दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी मंजील को प्राप्त किया जा सकता है | 

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