ultra runner sufiya khan

कुछ लोग जीवन भर सोचते रह जाते हैं, और करने वाले करके दिखा देते हैं | शोर मचाने से भी भला कभी मंजिलें मिलती हैं! उसके लिए निश्चित रूप से रास्ता तय करना होता है | सम्भवतः आरंभ में निंदा या विरोध का सामना करना पड़ सकता है, बस भीड़ से अलग हो अपने रास्ते स्वयं बनाने की आवश्यकता है |

आज हम आपको एक ऐसी महिला धावक से मिला रहे हैं, जो दो बार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं | जैसा शायद ही किसी ने सोचा हो ऐसा तो कुछ सबसे भिन्न वह करके दिखा चुकी हैं | 

इस महिला का जुनून दुनियाभर के लोगों के लिए प्रेरणा है | आप सभी को यह जानकर बड़ा अचंभा अवश्य होगा कि सूफिया खान एक दिन में 100 कि.मी. तक दौड़ लेती हैं | उनका सपना है कि वह दौड़कर पूरी दुनिया का चक्कर लगाएं |

तभी तो कहते हैं न कि डींगें मारने से कुछ नही मिलता, उसके लिए तो बेहतर करना होता है और उसे कुछ करके दिखाना होता है |

सूफिया खान ने ‘स्वर्ण चतुर्भुज’ की पैदल यात्रा करके बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

सुफिया खान ने 16 दिसंबर 2020 को राजधानी दिल्ली से दौड़ना शुरू किया | दिल्ली, मुंबई, कोलकत्ता और चेन्नई को जोड़ने वाले सबसे बड़े राजमार्ग की 6000 कि.मी. की दूरी को तय कर अब तक का सबसे कम समय लेते हुए 110 दिनों में 6 अप्रैल 2021 में अपनी यात्रा पूर्ण की |

लेकिन स्वर्णिम चतुर्भुज की यात्रा उनका पहला वर्ल्ड रिकॉर्ड नहीं है इससे पहले भी एक रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं |

आपको बता दे स्वर्णिम चतुर्भुज 5846 कि.मी. का राजमार्ग है | इसे दुनिया के सबसे लंबे राजमार्गों में एक माना गया है | यह मूल रूप से राजमार्गों का एक नेटवर्क है जो देश के चार प्रमुख महानगरों को चार दिशाओं, दिल्ली (उत्तर), चेन्नई (दक्षिण), कोलकाता (पूर्व) और मुंबई (पश्चिम) में जोड़ता है | इस प्रकार यह एक चतुर्भुज जैसा मार्ग बनाता है और इसीलिए इसका नाम स्वर्णिम चतुर्भुज है |

सूफिया खान ने स्वर्णिम चतुर्भुज’ की सबसे कम समय में पैदल यात्रा करते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है |

निश्चित ही यह यात्रा आसान तो बिल्कुल नहीं थी, लेकिन अपने मजबूत हौसले और दृढ़ विश्वास के साथ 35 वर्षीय सुफिया खान अपने उद्देश्य को निश्चित कर अपने मार्ग की ओर बढ़ती चली गईं |

यात्रा के दौरान उन्हें कई बार चोटे भी आईं परन्तु वह किंचित मात्र भी नही डगमगाईं | और निरंतर पूर्ण रूप से शत प्रतिशत के साथ वह अपना प्रयास करती रही | उनका संपूर्ण ध्यान यात्रा को सबसे कम समय में पूर्ण करना था और यही उनका उद्देश्य भी था इस यात्रा के लिए |

इस यात्रा में उनके पति ने उनका पूरा सहयोग किया

सूफिया खान के पति विकास उनके ट्रेनर भी हैं | उनकी हर दौड़ में वह उनके साथ ही रहते हैं |

सूफिया खान के पति ने उनका सहयोग करते हुए उनकी इस दूरतम दौड़ के दौरान समर्थन कार चलाई | साथ ही उनके आहार और भौतिक चिकित्सक आवश्यकताओं का ध्यान रखा | और वह दौड़ की पूरी योजना का आंकलन भी करते रहे |  

इसके अलावा, सूफिया खान को अपने मार्ग के दौरान स्थानीय धावकों और साइकिल चालकों का साथ भी मिला | उनके समर्थन में लगभग हर शहर में धावक और बाइकर उनके साथ जुड़ते रहे |  

शहरों और छोटे शहरों में बहुत से समर्थकों ने उनके रात के ठहरने की जगह और खाने की व्यवस्था की | अपने प्रयास में निरंतरता बनाते हुए वे कई बार होटलों में तो कई मौकों पर राजमार्ग आश्रयों में भी सोए | 

सूफिया खान को 26 मार्च 2022 को “भारतीय स्वर्णिम चतुर्भुज रोड पर दौड़ने वाली सबसे तेज महिला” नामित किया गया |

सूफिया दूरतम दौड़ या कहिए अल्ट्रा-डिस्टेंस रनिंग को अपना सच्चा प्यार मानती हैं | 42.195 किलोमीटर की सामान्य मैराथन दूरी से अधिक किसी भी पैदल दौड़ को अल्ट्रा रनिंग कहा जाता है | यह उनकी देश में तीसरी लंबी दूरी की दौड़ यात्रा थी |

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Sufiya is a runner who set the world record by completing 6000 km run.
Sufiya Runner

कैसे की इस स्वर्णिम चतुर्भुज दौड़ यात्रा की तैयारी

स्वर्णिम चतुर्भुज जैसे राजमार्ग पर पैदल वो भी नंगे पाव दौड़ना कोई साधारण और आसान कार्य तो बिल्कुल नही हैं |

यह बात तो आप मानेंगे कि मानव शरीर को जिस तरह ढाला जाता है, वह उसी तरह बन जाता है | अब चाहे आप अपने शरीर को आलस से भर स्वयं को दवाइयों के अधीन कर लो या जितनी चाहे मेहनत करालो | मानव शरीर द्रव्य पदार्थ की भांती पात्र के अनुरूप उसकी आकृति धारण कर लेता है |

सूफिया खान ने भी अपने मन और शरीर को अपनी यात्रा के अनुरूप समायोजित करने के लिए दौड़ से 15 दिन पहले खुद पर काम करना आरंभ कर दिया | 

अपने प्रशिक्षण के एक भाग के रूप में, उन्होंने ऊंचे पहाड़ों, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और कभी न खत्म होने वाली घुमावदार सड़कों पर होने वाली असुविधा के लिए शक्ति अभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया | 

उन्होंने अपने फेफड़ों को मजबूत बनाने और बेहतर सांस लेने में सक्षम होने के लिए योग और प्राणायाम का सहारा लिया | इतना ही नहीं, सूफिया खान ने अपनी मानसिक स्थिति, और आत्मविश्वास को दृढ़ बनाए रखने के लिए भी कड़ी मेहनत की |

सही ही बात है कि अगर दृढ़ संकल्प हो तो हौसलों की दीवार स्वयं ही बनती जाती है |

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फेसबुक पर किया धन्यवाद

अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर, सूफिया खान ने लिखा: “इस अद्भुत विश्व रिकॉर्ड अभियान का हिस्सा बनने वाले आप सभी के साथ इसे साझा करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।” 

उन्होंने आगे कहा, “मैं आप सभी लोगों की बहुत आभारी हूँ, जो कुछ मील से लेकर कुछ सौ मील तक दौड़े, जिन्होंने अपने शहर में मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया, जिन्होंने मेरे लिए घर के खाने की व्यवस्था की, जिन्होंने मेरे घटते उत्साह को देखते हुए मुझे दौड़ने के लिए प्रोत्साहित किया | जिन्होंने मेरी हर सफलता को अपनी ही समझा, जो मेरी चिंता करते हैं जब मैं अकेले या अंधेरे में दौड़ती, जिन्होंने अभियान की जरूरत के लिए आर्थिक रूप से योगदान दिया, जिन्होंने मेरे आवास की व्यवस्था की और जो मुझे बिना शर्त प्यार करते थे और मेरे लिए हर रोज प्रार्थना करते थे |

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अपनी 10 साल की एयरपोर्ट की नौकरी को छोड़ अपने जुनून के लिए आगे बढ़ी

5 से 9 बजे तक की नौकरी और परिवार की सुख सुविधा का ध्यान रखते हुए ही सामान्य लोग अपने जीवन की आखरी सांस लेते है | लेकिन कुछ बड़ा करके दिखाने का जज्बा रखने वाले मुश्किल पथ पर चल कर अपनी सफलता की नीव स्वयं रखते है | 

सूफिया खान ने 10 साल तक एयरपोर्ट में नौकरी की है | फिर एक दिन उन्हें लगा की जीवन को ऐसे ही व्यर्थ तो नही गवाना इसके लिए कुछ तो अलग किया जाए | इसी चाह में उन्होंने 2017 में नौकरी छोड़ दी और अपने जुनून को एक दिशा दी |

Sufiya is a runner who set the world record by completing 6000 km run.
Image Courtesy- Sufiya

कैसे हुई दौड़ने के सफर की शुरूआत…

सूफिया खान ने 2017 में दिल्ली में अपना पहला हाफ मैराथन दौड़ा था और तभी उन्हें इस खेल के प्रति अपने जुनून का पता चला | 

2018 में, उन्होंने अपनी पहली बड़ी जीत हासिल की, जब वह दिल्ली-आगरा-जयपुर-दिल्ली के स्वर्ण त्रिभुज की 700 किमी की दूरी को केवल 16 दिनों, 1 घंटे और 27 मिनट में तय करके एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया |

सूफिया खान ने मनाली से लेह के बीच करीब 480 कि.मी. की दूरी को 7 दिनों में तय कर दिया था | 

सूफिया खान ने एक बार जो अपने जुनून को चुना तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा |

लेकिन यह उनका पहला गिनीज रिकॉर्ड नहीं है | 2019 में, वह कश्मीर से कन्याकुमारी तक दौड़ने वाली सबसे तेज महिला होने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुकी हैं, जिसमें उन्हें कुल 87 दिन, 2 घंटे और 17 मिनट का समय लगा था |

सूफिया खान मानती हैं कि मुश्किल हालात सिर्फ दिमाग का भ्रम है | वह उन लोगों के लिए एक मिसाल हैं, जो कुछ अलग करना चाहते हैं और जीवन को एक घेरे के चारो ओर घुमाना नहीं चाहते |

हम आशा करते हैं कि जगदिशा की यह कहानी आपकी शारीरिक व मानसिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होगी | 

कैसी लगी आपको सुफिया खान की यह दूरतम दौड़ यात्रा?हमें कमेंट बॉक्स में बताना न भूले |

Jagdisha का इस मजबूत हौसले से भरी महिला को सहस्त्रों शुभकामनाएं |

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