पदमश्री सोकर जानकी

शंकरमंची जानकी, जिन्हें सौकार जानकी या शवुकरू जानकी नाम से जाना जाता है | 

एक भारतीय अभिनेत्री हैं, जिन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी और मलयालम भाषाओं में 450 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है | उन्होंने 300 से अधिक शो में मंच पर प्रदर्शन भी किया और अपने शुरूआती वर्षों में एक रेडियो कलाकार थीं |

उनकी पहली फिल्म शवुकरु में उन्हें और एन. टी. रामा राव की युगल जोड़ी को दर्शकों ने बहुत पसंद किया | उन्होंने ए नागेश्वर राव, जगगय्या, शिवाजी गणेशन, एमजीआर, प्रेम नज़ीर, वी.के. रामास्वामी, मेजर सुंदरराजन, नागेश, श्रीकांत, एवीएम राजन, मिथुन गणेशन, रविचंद्रन, डॉ राजकुमार, कमल हासन, रजनीकांत और मामूट्टी के साथ अभिनय किया हैं |

उन्होंने अपने 71 साल के करियर में कई तरह की भूमिकाएँ निभाईं |

भारत में अभिनय क्षेत्र में इतना लंबा करियर रखने वाले अन्य अभिनेता देव आनंद, प्राण, अशोक कुमार, अक्किनेनी नागेश्वर राव और कामिनी कौशल थे | हालांकि, 2016 तक, वे अधिकांश अभिनेताओं से आगे निकल गई | सौकार जानकी अब सबसे लंबे समय तक अभिनय क्षेत्र में करियर बनाने वाली भारतीय अभिनेताओं में से एक हैं |

उन्होंने नाटक मंडलियों में सक्रिय रूप से भाग लिया और एक व्यस्त फिल्म स्टार होने के बावजूद 1960 से 1995 तक लाइव ड्रामा शो करना जारी रखा | 

वह नंदी पुरस्कार से सम्मानित हैं | उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री (2022) से सम्मानित किया गया |

जन्म और प्रारंभिक जीवन

सौकार जानकी का जन्म 21 दिसम्बर 1931 में हुआ था | उनके पिताजी का नाम टी. वेंकोजी राव और माँ का नाम सची देवी हैं | अभिनेत्री कृष्णा कुमारी उनकी छोटी बहन हैं | 

वह एक तेलुगु भाषी माधवा ब्राह्मण परिवार में पली-बढ़ी हैं | वह शुद्ध शाकाहारी हैं | वह ईश्वर में विश्वास रखती हैं और भगवान श्री कृष्ण की भक्त हैं | 

जब वह गर्भवती हुई तो मैट्रिक की परीक्षा में बैठी और प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की |

उन्होंने अपनी बाद की शिक्षा असम के गौहाटी विश्वविद्यालय से पूरी की और एरिज़ोना विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त की |

उनकी दो बेटियां और एक बेटा है | उनकी पोती वैष्णवी अरविंद भी एक अभिनेत्री हैं, जिन्होंने 1987 से कई तमिल, तेलुगु और कुछ मलयालम फिल्मों में अभिनय किया है |

फिल्मी करियर

सौकार जानकी 14 साल की उम्र से “आकाशवाणी मद्रास” में एक प्रसिद्ध रेडियो कलाकार रही हैं | उन्होंने डॉ. पी.वी. राजमन्नार, डॉ. अरुद्र पद्मराजू आत्रेय जैसे प्रख्यात लेखकों द्वारा लिखे गए तेलुगु नाटकों में भी अभिनय किया है | उसी दौरान बी.एन. रेड्डी ने रेडियो पर उनकी आवाज सुनी और उन्हें उनकी फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव दिया | लेकिन उनकी उस समय शादी हो चुकी थी |

जानकी का प्रारंभिक वैवाहिक जीवन कठिनाइयों से भरा था, खासकर जब उनके पति ने नौकरी छोड़ दी और उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा | अपने पति को यह समझाने के बाद कि उन्हें परिवार का समर्थन करने के लिए काम करने की ज़रूरत है, उन्होंने बी.एन. रेड्डी द्वारा पहले दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया |

उन्होंने 18 साल की उम्र में 1949 में फिल्म शवुकरु से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की |

वह 1949 और 1975 के बीच विभिन्न भाषाओं में हिट फिल्मों के साथ एक लोकप्रिय अभिनेत्री बन गईं | 

उन्होंने मुख्य नायिका के रूप में तेलुगु फिल्मों जैसे शावुकरु, वालयापति, रोज़ुलु मरयी में शानदार अभिनय कर दर्शकों से प्रशंसा लूटी |

सौकार जानकी ने फिर तमिल फिल्मों जैसे नान कांडा सोरगम, काविया थलवी, भाग्य लक्ष्मी, पल्लुम पज़्हमुम, पार मगले पार, थायिक्कु थलीमगन, कुमुधम, पनम पादिथवन, पुथिया परवई, बामा विजयम, ओली विल्लकु, एथिर नीचल, मानववन, उयार्धा मनिधान, निमारुंधु नील, थुनैवन, निधि, कलियुग कन्नन और इरु कोडुगल में अपना जादू बिखेरा |

उन्होंने कन्नड़ फिल्मों जैसे देवकानिका, साकू मगलू, सदाराम, थाइगे ठक्का मागा में अभिनय किया | फिर उन्होंने मलयालम फिल्म स्कूल मास्टर (1964) से मलयालम फिल्मों में कदम रखा |

उन्होंने हिंदी फिल्म तीन बहुरानियां में भी बेहतरीन अभिनय किया हैं | उन्होंने दादा मिरासी और के बालाचंदर जैसे प्रसिद्ध निर्देशकों के साथ काम किया |

सौकार जानकी ने 1975 के बाद सहायक भूमिकाओं के तौर पर अभिनय किया | उन्होंने तमिल फिल्मों जैसे सिनेमा पैठियम, थी, थिलु मुल्लू, वेट्री विझा, पुथु पुथु अर्थंगल, कांचे में अपने अभिनय का प्रदर्शन किया |

बेज़वाड़ा बेबुली, तयारम्मा बंगाराय, संसारम ओका चदरंगम जैसी तेलुगु फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया |

उन्होंने हिंदी फिल्मों दोस्ती दुश्मनी और प्रेम गीत में सहायक भूमिकाएँ निभाईं |

उन्होंने राष्ट्रीय भारतीय फिल्म पुरस्कार समिति के लिए दो बार जूरी सदस्य और राज्य तेलुगु फिल्म पुरस्कार समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया |

पाककला में रूची

एक समय जब 90 के दशक के मध्य में केवर संजीव कपूर का खाना खजाना टेलीविजन पर एकमात्र पाकशाला शो था, तब सौकार जानकी ने जेमिनी टीवी पर 30 से अधिक खंडों में रुचि-अभिरुचि नामक एक पाकशाला शो की मेजबानी की |

कैलिफोर्निया में एक भारतीय रेस्तरां खोलने का उनका एक सपना था जो कभी पूरा नहीं हुआ | उनके बच्चों ने उनके इस सपने के लिए हतोत्साहित किया क्योंकि उन्हें लगता था कि एक अभिनेत्री कोई रेस्तरां कैसे चला सकती हैं |

हालांकि, एक अवसर उनके पास आया जब उन्हें हैरिंगटन रोड पर लोकप्रिय रेस्तरां कोकोनट ग्रोव के बंद होने के बारे में द हिंदू पर खबर पढ़ी | उन्होंने मौके का फायदा उठाया और 1992 से 1995 के बीच तीन साल के लिए किराये पर जगह ले ली | अगले छह महीनों के भीतर, ऐसा कोई ही शायद हो जिसने उनके कोकोनट ग्रोव में खाया न हो | वे 50 से 60 रसोइ कर्मचारियों के साथ हर दिन लगभग 25 व्यंजन तैयार करती थीं | उनके लिए अपने बच्चों को गलत साबित करने के लिए तीन साल काफी थे |

अपने बच्चों की शादी के बाद सौकार जानकी अपने पति से अलग हो गईं | एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था, कि उन्होंने अपने पति के साथ ज्यादा समय नहीं बिताया | जब वे शूटिंग से घर आती तो उनकी फिल्मों या उनके काम के बारे में बात करने वाला कोई नहीं होता | वह अपने घर में केवल एक माँ थी

पुरस्कार और सम्मान

  • फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड – साउथ (1984)
  • महानती सावित्री पुरस्कार (1985)
  • 1985 में विश्व विश्वविद्यालय, एरिज़ोना से अपने चुने हुए क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि।
  • इंडियन एक्सप्रेस डायोनरा गोल्डन अवार्ड (1989)
  • नादिगर थिलागम शिवाजी लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2004)
  • डॉ अक्किनेनी नागेश्वर राव लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2000)
  • श्री कृष्ण देवराय पुरस्कार, कर्नाटक
  •  कलैमामणि, तमिलनाडु राज्य का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार (1969-1970)
  • तमिलनाडु राज्य फिल्म मानद पुरस्कार – एमजीआर पुरस्कार (1990)
  • इरु कोडुगाली (1970) के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार
  • संसारम ओका चदरंगम के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का नंदी पुरस्कार (1987)
  • अमूल्यम के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का नंदी पुरस्कार (2007)
  • एसआईआईएमए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2013)
  • कर्नाटक सरकार द्वारा राज्योत्सव पुरस्कार (2015)
  •  स्त्रीरत्न अवार्ड्स (2019)
  • भारतीय सिनेमा के सदाबहार मनोरंजनकर्ता के रूप में वंडर वुमन अवार्ड्स (2019)
  • तमिलनाडु सरकार द्वारा पुरत्ची थलाइवी डॉ. जे. जयललिता विशेष कलैमामणि पुरस्कार (2020)
  • भारत सरकार द्वारा पद्म श्री (2022)

जीवन में कुछ भी पाना तब तक कठिन ही है जब तक समुच्चय प्रयास न किया जाएं | विश्वास, लगन और दृढ़ हौसले से ही सफलता अपने चरम तक पहुँचती है |

Jagdisha भारतीय सिनेमा की सदाबहार अभिनेत्री को हमारा प्रणाम | फिल्म जगत में आपका योगदान अमूल्य है | हम आपके स्वस्थ जीवन की कामना करते है |

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