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गर्भाशय फाइब्रॉएड यानी रसौली महिलाओं में बढ़ती एक आम समस्या हो गई है | यह गर्भाशय में कोशिकाओं और मांसपेशियों से बनने वाली एक या अनेक गांठे होती है | जो आकार में छोटी-बडी होती है |

भारत में दस में से तीन या चार महिलाओं में रसौली की समस्या पाई जाती हैं | अधिकतर महिलाओं को इसके बारे में कुछ पता ही नही होता | जब वे किसी ओर बिमारी के लिए अल्ट्रासाउंड कराती है, तब अचानक पता चलता है कि वे रसौली से पीड़ित है | इसे लियम्योमा या म्योमा भी कहा जाता है |

यह गांठे छोटे-बडे आकार की होती रहती है और कभी-कभी स्वयं ही नष्ट हो जाती है | जिन महिलाओं को रसौली होती है डॉक्टर उन्हें समय-समय यानी 3 या 4 महिने में जॉच कराने की सलह देते हैं, जिससे उनके आकार के बढ़ने और घटने का पता चल सके | 

 

यह गांठे आकार में सेब के बीज जैसी या अंगूर के आकार जैसी और कभी कभी अंगूर से भी बडे आकार की हो सकती है |

कभी-कभी, रसौली बार-बार होने वाले मिसकैरेज का कारण होती हैं |

रसौली का इलाज एक महिला में नजर आ रहे लक्षणों पर निर्भर करता है |

क्या है गर्भाशय फाइब्रॉएड या रसौली?

रसौली गैर-कैंसरकारी गांठ है जो गर्भाशय में या उसके आसपास विकसित होती है | 

यह एस्ट्रोजन हार्मोन से संबंधित होती है | एस्ट्रोजन एक महिला प्रजनन हार्मोन है जो महिला प्रजनन अंगों यानी अंडाशय द्वारा उत्पन्न होता है |

यह गांठे आमतौर पर महिला के प्रजनन काल, 16 से 50 वर्ष की आयु के बीच विकसित होती हैं | इस दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर अपने उच्चतम स्तर पर होता है |

खासतौर पर 30 से 40 वर्ष की आयु के बीच इसके होने की आशंका सबसे अधिक होती है |

अधिक वजन या मोटापे में रसौली होने की सम्भावना बढ़ जाती है |

रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज के समय जब एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है तब रसौली सिकुड़ जाती हैं, और पूरी तरह खत्म हो जाती है |

 

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गर्भाशय फाइब्रॉएड या रसौली के लक्षण :

अक्सर रसौली के कोई भी लक्षण नही दिखते | लेकिन इसके निम्न लक्षण हो सकते है :

  • पीरियड के दौरान अधिक रक्तस्राव
  • लंबे समय तक पीरियड होना
  • अनियमित पीरियड
  • पीरियड के दौरान अहसनीय दर्द होना
  • खून की कमी या एनीमिया के परिणामस्वरूप जल्द ही थकावट
  • संभोग के दौरान दर्द होना
  • बार-बार पेशाब करने की जरूरत महसूस होना
  • कब्ज या सूजन
  • गर्भ धारण करने में असमर्थता (बांझपन)
  • बार-बार गर्भपात होना
  • सिजेरियन डिलीवरी का खतरा 6 गुना बढ़ जाता है
  • बढ़ा हुआ पेट
  • पेट के निचले हिस्से में भारीपन और दर्द रहना
  • पीठ में दर्द

गर्भाशय फाइब्रॉएड या रसौली होने के कारण :

रसौली होने का सटीक कारण ज्ञात नहीं है | लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार निम्न कारक इसके उत्तरदायी हो सकते है :

  • हार्मोन : एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन, जो गर्भधारण के लिए प्रत्येक पीरियड चक्र के दौरान गर्भाशय के अस्तर के विकास को प्रोत्साहित करते हैं, जिस कारण रसौली का विकास भी होता है |
  • आनुवंशिक : अगर परिवार में किसी महिला को यह समस्या रही है, तो आशंका है कि आगे की पीढ़ी में से किसी अन्य को इसका सामना करना पड़ सकता है |
  • अन्य वृद्धि कारक : जो पदार्थ शरीर में ऊतकों को बनाए रखने में मदद करते हैं जैसे इंसुलिन आदि रसौली के विकास को प्रभावित करते हैं | डॉक्टरों का मानना है कि रसौली गर्भाशय में मायोमेट्रियम की स्टेम सेल से विकसित होती हैं |
  • यदि आपके पीरियड की शुरूआत कम उम्र में हुई है |
  • शरीर में विटामिन-डी की कमी होने के काण
  • मोटापा
  • अधिक कैफीन युक्त पेय पदार्थ या शराब का सेवन करती है |
  • लाल मीट या फिर जंक फूड ज्यादा खाती हैं |

गर्भाशय फाइब्रॉएड या रसौली के प्रकार :

गर्भाशय में फाइब्रॉएड या रसौली की स्थिति के अनुसार इनका वर्गीकरण किया जाता है |

  • सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड : यह गर्भाशय में मांसपेशियों की परत के बीच विकसित होती हैं, और गर्भाशय की ओर फैली होती है | इसके कारण पीरियड दर्दभरे और अत्यधिक रक्तस्राव के साथ होते है | इसके अलावा गर्भधारण करने में भी परेशानी हो सकती है |
  • इंट्राम्युरल फाइब्रॉएड : यह गर्भाशय की दीवार पर पनपने वाली होती है और यह गर्भाशय गुहा में या गर्भाशय गुहा के बाहर की ओर फैली होती है | इसके कारण गर्भाशय फूल जाता है और बड़ा नजर आने लगता है | ये रीढ़ की हड्डी, मलाशय और श्रोणि पर दबाव डालते हैं लेकिन जब तक ये आकार में बड़ी नहीं हो जाती तब तक कोई लक्षण नहीं दिखता | गर्भधारण करना भी मुश्किल हो सकता है।
  • सबसेरोसल फाइब्रॉएड : यह गर्भाशय के बाहर मांसपेशियों या गर्भाशय की बाहरी दीवार पर विकसित होती है | यह आंत, रीढ़ की हड्डी और मूत्राशय पर दबाव डालती है | इसके कारण श्रोणी में तेज दर्द होता है | और पीरियड अत्यधिक रक्तस्राव के साथ होते है |
  • सर्वाइकल फाइब्रॉएड : यह मुख्य तौर पर गर्भाशय की गर्दन पर पनपती है | इसके कारण पीरियड के दौरन अत्यधिक रक्तस्राव होता है |
  • पेडन्क्युलेट फाइब्रॉएड : यह गर्भाशय के साथ जुड़े ऊतको में विकसित होती है | यह रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालती है जिस कारण पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है |  इससे मासिक धर्म अनियमित हो जाते हैं |

गर्भाशय फाइब्रॉएड या रसौली का इलाज:

गर्भाशय फाइब्रॉएड का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपमें इस बीमारी के लक्षण किस प्रकार के नजर आ रहे हैं | 

इलाज से पहले डॉक्टर निम्न बातों पर गौर करते हैं :

  • आपकी उम्र
  • आपके लक्षण कितने गंभीर हैं
  • फाइब्रॉएड किस जगह पर हैं
  • फाइब्रॉएड का प्रकार और आकार क्या है
  • क्या आप गर्भवती हैं या फिर होने की योजना बना रही हैं

इलाज :

  • दवा आधारित 
  • सर्जरी

जांच

  • एमआरआई
  • अल्ट्रासाउंड
  • हिस्टोरोस्कोपी
  • लेपरोस्कोपी

गर्भाशय फाइब्रॉएड या रसौली से बचाव के घरेलू उपाय:

  • अधिक पानी पिएं जिससे आपके पेट की मांसपेशियों लचकदार रहे |
  • पौष्टिक व सुपाच्य भोजन का सेवन करे
  • अधिन कैफीन युक्त पेय पदार्थ का सेवन न करे
  • शराब न पिएं
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज व योगा करे
  • विटामिन डी के लिए सूरज की रोशनी ले
  • अधिक तनाव न ले

हमारा उद्देश्य आपको जानकारी देना है, जिससे आप स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर रहे | किसी भी प्रकार की समस्या या परेशानी के लिए डॉक्टर या स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करे | वही आपकी उचित सहायता करने में सक्षम हैं |

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