awani lekhara

किसी भी मनुष्य के लिए स्वयं को असहाय मान लेना ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी होती है | अगर आत्मविश्वास और हौसला अडिग है, तो कोई भी परिस्थिति आपको विवश नही कर सकती | 

इरादो में दृढ़ता हो तो शरीरिक अपंगता भी रास्ते का पत्थर नही बनती | सही मायने में अपंग कौन है? जो विकृत मानसिकता का है या जो शारीरिक रूप से कमजोर या अंगहीन है | 

फरवरी 2012 का दिन था, जब वह अपने आवास जयपुर से धौलपुर परिवार के साथ यात्रा कर रही थी, तब कार दुर्घटना हो गई | पापा-बेटी को चोटें आईं, पिता तो कुछ दिनों के बाद स्वस्थ हो गए लेकिन वह तीन महिने तक अस्पताल में रही और 11 साल की उस बेटी की रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण वह खडे होने और चलने में असमर्थ हो गई | उन दिनों वह बहुत निराश महसूस करती थीं |

 

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नौ साल बाद, टोक्यो में 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में जीत दर्ज करते हुए 20 वर्षीय पैरालंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाली अवनि लेखरा पहली भारतीय महिला बनीं | 

कार दुर्घटना में घायल होने के कारण व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा लेकिन पैरालंपिक खेलों में निशानेबाजी में स्वर्ण सहित दो पदक जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि बुलंद हौसले और कभी हार न मानने के जज्बे से कोई भी सफलता हासिल की जा सकती है |

स्पर्धा में अवनि लेखरा ने कुल 249.6 का स्कोर बना, पैरालिंपिक खेलों का एक नया रिकॉर्ड रच दिया | उन्होंने यूक्रेन की इरिाना शेटनिक के रिकॉर्ड की बराबरी की |

चीन की सी झांग ने 248.9 अंक बना सिल्वर मेडल जबकि यूक्रेन की इरीना स्खेतनिक ने 227.5 अंक बना ने कांस्य पदक अपने नाम किया | 

अवनी लेखरा इस इवेंट के क्वालिफिकेशन राउंड में 7वें स्थान पर रही थीं | फाइनल में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और अपने अचूक निशानों के दम पर झांग को मात देकर गोल्ड अपने नाम कर लिया |

अवनी लेखरा को 25 जनवरी 2022 को, देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री के लिए चुना गया |

 

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जन्म और प्रारंभिक जीवन

अवनि लेखरा का जन्म 8 नवंबर 2001 को जयपुर, राजस्थान में हुआ था | उनके पिता का नाम प्रवीण लेखारा और उनकी माँ का नाम श्वेता लेखारा है |

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा अपने गाँव के एक प्राइवेट स्कूल में पूरी की | वह बचपन से ही मेहनती और प्रतिभाशाली रही हैं | वह राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से अपनी कॉलेज की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं | वह वकील बनना चाहती थी, इसलिए उन्होंने एलएलबी का चुनाव किया |

शूटिंग को कैसे चूना

अवनि लेखरा, 2012 की कार दुर्घटना के बाद हताश व निराश थी | उन्होंने स्वयं को असहाय समझ अपने आप को कमरे बंद कर लिया था | माता-पिता के निरंतर प्रयासों के बाद उनमें आत्मविश्वास का एक नया सृजन हुआ |

उनके पिताजी ने उन्हें अभिनव बिन्द्रा की बायोग्राफी लाकर दी | उससे उनकी निशानेबाजी में रुचि जगी और वह घर के पास में ही स्थित शूटिंग रेंज पर जाकर अभ्यास करने लगी |

उनके पिता ने उन्हें खेलों के प्रति प्रेरित किया | शुरुआत में उन्होंने शूटिंग और तीर धनुष दोनों को अजमाया | लेकिन उन्हें शूटिंग ज्यादा मजेदार लगा और उन्होंने शूटिंग को चूना |

उन्होंने अपने कोच के निर्देशन के अनुसार अभ्यास करने में अपना शत-प्रतिशत देना शुरू किया तो फिर क्या था, उन्हें सफलताएं मिलती चली गईं |

उन्होंने पूर्व ओलंपिक चैंपियन अभिनव बिंद्रा से प्रेरित होकर 2015 में शूटिंग शुरू की | और तब से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिताब अपने नाम किये हैं |

 

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खेल जीवन

अवनी लेखरा ने साल 2015 में राष्ट्रीय पैरालंपिक शूटिग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता |

साल 2017 के नेशनल में उन्होंने ने गोल्ड पर निशाना साधा |

अवनी लेखरा ने साल 2019 में दुबई में आयोजित पैरा शूटिंग विश्व कप के 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक जीता | साथ ही पैरालंपिक के लिए भी क्वालिफाय कर लिया |

अवनी लेखरा पांच बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी है |

अवनी लेखरा महिलाओं के 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग रेंज में sh1 की श्रेणी में संपूर्ण विश्व भर में पांचवा रैंक प्राप्त कर चुकी है | 

अवनी लेखरा ने वर्ष 2018 में एशियाई पैरालंपिक शूटिंग गेम्स में R2 की श्रेणी में 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग और R6 मिक्सड मे इन्होंने 50 मीटर राइफल प्रोन में भी हिस्सा लिया इसमें उन्होंने तीसरी रैंक हासिल की |

टोक्यो पैरा ओलम्पिक 2021 में गोल्ड मेडल जीता | इस स्पर्धा में अवनि लेखरा ने कुल 249.6 का स्कोर बनाया जो की पैरालिंपिक खेलों का नया रिकॉर्ड है |

अवनि लेखरा ने टोक्यो पैरालंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एचएस1 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के बाद 3 सितम्बर 2021 को 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन SH1 स्पर्धा का कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रच दिया | 

वह दो पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गयीं | 

वह भारत की उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गयी है जिन्होंने एक से अधिक पैरालंपिक पदक जीते हैं |

अवनि लेखरा अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां श्वेता लेखरा, पिता प्रवीण लेखरा और कोच चंदन सिंह को देती हैं |

पुरस्कार और सम्मान

  • 2019 में उन्हें भारत में गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन द्वारा मोस्ट प्रॉमिसिंग पैरालंपिक एथलीट नामित किया गया था |
  • 2021 में भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान, खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित हुई |
  • 2022 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित हुई |

अगर एक बार मन में ठान लो, तो सफलता कभी आपसे मुँह नही मोडेगी | बस एक बार स्वयं पर विश्वास कर सभी जटिलताओं के समक्ष खड़े हो कर देखो, राह अपने आप बनती चली जायेंगी |

Jagdisha का बुलंद हौसले से लबालब अवनि लेखरा को सलाम | हम आपकी नई प्रसिद्धिओं और स्वस्थ जीवन की कामना करते है | आप अपनी प्रतिभा को हर दिन निखारती जाएं और देश का नाम रोशन करें |

 

 

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