mirabai chanu

वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने शुक्रवार, 25 फरवरी 2022 को सिंगापुर में आयोजित भारोत्तोलन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल अपने नाम किया, कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी कर लिया है क्वॉलिफाइ |

पहली बार 55 किग्रा भार वर्ग में भाग ले रही चानू ने कुल 191 किग्रा (86 किग्रा और 105 किग्रा) भार उठाया |

दिसंबर में विश्व चैंपियनशिप से हटने वाली चानू की 2021 टोक्यो ओलिंपिक में रजत पदक जीतने के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद यह पहली प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिता थी | इस 27 वर्षीय खिलाड़ी ने राष्ट्रमंडल रैंकिंग के आधार पर 49 किग्रा में राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वॉलिफाइ किया था | लेकिन भारत की अधिक स्वर्ण पदक जीतने की संभावनाएं बढ़ाने के लिए चानू ने 55 किलोग्राम में भाग लेने का फैसला किया |

 

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मीराबाई चानू का बचपन में पहाड़ से जलावन की लकड़ियां बीननी होती थी | जिससे वह बचपन से ही भारी वजन उठाने में प्रवीण रही हैं |

 

मीराबाई चानू ने 24 जुलाई 2021 को ओलंपिक में वेटलिफ़्टिंग में सिल्वर मेडल जीत, मेडल लाने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गईं | उन्होंने 49 किग्रा भार वर्ग में कुल 202 किग्रा (जर्क में 115 किग्रा और स्नैच में 87 किग्रा) वजन उठाकर सिल्वर पदक अपने नाम किया | इस वर्ग में चीन की होऊ ज़हुई ने गोल्ड और इंडोनेशिया की विंडी असाह ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता |

इनसे पहले 2000 के सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीता था | 

कर्णम मल्लेश्वरी के बाद मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग मे पदक जीतने वाली दूसरी व भारत की ओर से रजत पदक प्राप्त करने वाली पहली भारतीय वैटलिफ्टर बन गई है |

मीराबाई चानू मणिपुर पुलिस विभाग में अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक (खेल) के रूप में कार्यरत है |

मीराबाई चानू का 2016 रियो ओलंपिक में ख़राब प्रदर्शन से लेकर अब तक का सफर संघर्ष पूर्ण और बहुत रोचक रहा | आइये जानते है, उनके जीवन का यह सफर…

जन्म और प्रारंभिक जीवन

मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के नोंगपोक काकचिंग में एक मैतेई हिंदू परिवार में हुआ था | इनकी माँ साइकोहं ऊँगबी तोम्बी लीमा एक दुकानदार हैं | इनके पिता साइकोहं कृति मैतेई, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) में नौकरी करते हैं |

मीराबाई जानू की 2 बहने साइखोम रंगीता और साइखोम शाया और भाई साइखोम सनातोंबा हैं |

12 साल की उम्र से ही वह आसानी से अपने घर में जलाऊ लकड़ी का भारी बोझ उठा सकती थी जिसे उठाने के लिए उनके भाई को भी संघर्ष करना पड़ा |

मीराबाई बचपन में पहले तीरंदाज यानी आर्चर बनना चाहती थीं | लेकिन आठवी कक्षा में आने के बाद उनका लक्ष्य बदल गया क्योंकि उस उस पाठ्यक्रम की एक किताब में प्रसिद्ध वेटलिफ्टर कुंजरानी देवी के बारे में एक पाठ था | बस तब से ही उन्होंने वजन उठाने का दृढ़ निश्चय कर लिया था |

मीरा की ज़िद के आगे माँ-बाप को भी हार माननी पड़ी | 2006 में अभ्यास की शुरुआत में उनके पास लोहे का बार नहीं था तो वह बाँस से ही अभ्यास किया करती थीं |

उनके छोटे से गाँव में कोई प्रशिक्षण केंद्र (ट्रेनिंग सेंटर) नहीं था, जिस कारण उन्हें 20 किमी दूर प्रशिक्षण के लिए जाना पड़ता था | आहार (डाइट) में रोज़ाना दूध और चिकन चाहिए था, लेकिन एक साधारण परिवार की लड़की के लिए वह संभव नही था | लेकिन उन्होंने किसी वजह को अपने सपनो के आड़े नहीं आने दिया |

1990 के बीजिंग एशियाई खेलों में भाग लेने वाली अनीता चानू उनकी कोच है |

मीराबाई चानू ने अनीता चानू के प्रशिक्षण केंद्र में चार साल तक प्रशिक्षण लिया और नोंगपोक काकचिंग में स्थित अपने घर से और इंफाल के बीच रोजाना 20 किमी का सफर तय करती थीं | किसी-किसी दिन उन्हें आटो​ रिक्शा की सवारी मिल जाती थी लेकिन अधिकतर उन दिनों उन्हें साइकिल का सहारा लेना पड़ता या ट्रक में सवारी करनी पड़ती थी | मणिपुर की राजधानी पहुंचने के लिए उन्हें बिखरे-पुआल के खेतों और मछली फार्म को पार करना होता था |

 

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वेटलिफ़्टिंग करियर

मीराबाई चानू ने राष्ट्रीय स्तर पर वेटलिफ्टिंग करियर की शुरुआत वर्ल्ड और जूनियर एशियन चैंपियनशिप से की थी |

मीराबाई चानू ने ग्लासगो में हुए 2014 राष्ट्रमण्डल खेलों में भारोत्तोलन स्पर्धा के 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 170 किग्रा, जिसमें 75 किग्रा स्नैच में और 95 किग्रा क्लीन एण्ड जर्क में वजन उठाकर रजत पदक जीता था |  

उन्होंने साल 2016 में गुवाहाटी में संपन्न हुए बारहवे साउथ एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था |

उन्होंने ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में आयोजित 2016 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई किया, लेकिन क्लीन एण्ड जर्क में तीनों प्रयास असफल होने के बाद वह पदक जीतने में असफल रहीं |

डिड नॉट फ़िनिश’- ओलपिंक जैसे खेल में अगर आप दूसरे खिलाड़ियों से पिछड़ जाएँ तो वह एक अलग बात है, लेकिन अगर आप अपना खेल पूरा ही नहीं कर पाएँ तो ये किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास को तोड़ सकता है |

2016 में मीराबाई चानू के जीवन का वह एक ऐसा ही पल था | ओलंपिक में अपने वर्ग में मीरा सिर्फ़ दूसरी खिलाड़ी थीं जिनके नाम के आगे ओलंपिक में लिखा गया था ‘डिड नॉट फ़िनिश’ |

2016 के बाद वह डिप्रेशन में चली गईं थी | इस असफलता के बाद वह इतनी हताश हो गईं कि एक बार को उन्होंने कभी न खेलने का मन बना लिया था | लेकिन उनका मनोबल ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार वापसी की |

2017 में उन्होंने महिला 48 किग्रा वर्ग में कुल 194 किग्रा (85 किग्रा स्नैच तथा 109 किग्रा क्लीन एण्ड जर्क) वजन उठाकर 2017 विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप, अनाहाइम, कैलीफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्वर्ण पदक जीता |

मीराबाई चानू ने 48 किलो का वज़न बनाए रखने के लिए उस दिन खाना भी नहीं खाया था | इस दिन की तैयारी के चलते वह अपनी बहन की शादी में भी नहीं गई थीं |

वर्ल्ड भारोत्तोलन चैंपियनशिप में भारत को गोल्ड मेडल जीतने में 22 साल लग गए | कर्णम मल्लेश्वरी ने 1994-1995 में इस प्रतियोगिता में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था |

मीराबाई चानू 2018 राष्ट्रमण्डल खेल में कुल 196 किग्रा (86 kg स्नैच और 110 किग्रा क्लीन एण्ड जर्क) वजन उठाकर भारत को राष्ट्रमण्डल खेलों का पहला स्वर्ण पदक दिलाया था | इसके साथ ही उन्होंने 48 किग्रा वर्ग का राष्ट्रमण्डल खेलों का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया |

2018 में मीराबाई चानू को पीठ दर्द से जूझना पड़ा था | जिस कारण उन्होंने एशियाई खेलों से अपना नाम वापिस ले लिया था | लेकिन उन्होंने 2019 के थाईलैंड वर्ल्ड चैंपियनशिप से वापसी की और वहां पर वह चौथे स्थान पर रही थी |

मीराबाई  चानू 2021 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली एकमात्र भारतीय वेटलिफ्टर थी | उन्होंने एशियन चैम्पियनशिप में 49 किलो भार वर्ग में कुल 205 किग्रा ( स्नैच में 86 किग्रा और 119 किग्रा क्लीन एण्ड जर्क ) वजन उठाकर कांस्य पदक जीतकर टोक्यो ओलम्पिक में अपनी जगह बनाई थी | 

उन्होंने 2021, टोक्यो ओलम्पिक में 49 किग्रा भारोत्तोलन में भारत के लिए पहला रजत पदक जीता |

भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू 25 फरवरी 2022 को सिंगापुर भारोत्तोलन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों के लिए 55 किग्रा भार वर्ग में क्वालीफाई कर लिया |

वेटलिफ्टिंग के अलावा मीराबाई  चानू को डांस का भी शौक़ है |

सम्मान

2018 राष्ट्रमण्डल खेलों में विश्व कीर्तिमान के साथ स्वर्ण जीतने पर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने ₹15 लाख की नकद धनराशि देने की घोषणा की |

साइखोम मीराबाई चानू को 2018 में, भारत सरकार द्वारा पदम श्री से सम्मानित किया गया | इसके साथ ही उन्हें 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार भी सम्मानित किया गया |

टोक्यो ओलंपिक 2021 में रजत पदक जीतने पर मणिपुर सरकार ने 1 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि एवं सरकारी नौकरी देने की घोषणा की |

संघर्ष और दृढ़ विश्वास के साथ अपने पथ को निर्धारित करने वाला मनुष्य अपने सफल जीवन की नीव रखता है | असफलता या मुश्किलें भले ही जीवन उद्देश्य का रोडा बने लेकिन निरंतरता बनाये रख बढ़ते रहना आपका प्रथम कर्म है | इसलिए सबसे पहले अपने जीवन का उद्देश्य निर्धारित करे | कोई अन्य आपके जीवन का उद्देश्य कैसे निर्धारित कर सकता है, और अगर कर भी दिया तो क्या आपका आत्मविश्वास जागृत होगा | उद्देश्य आपका होगा तभी आप कर्मबद्ध बन सकते है |

Jagdisha का मीराबाई चानू के संघर्ष को सलाम | हम आपके जीवन की नई प्रसिद्धिओं की कामना करते है | आप आगे भी नए कीर्तिमान स्थापित कर देश का नाम गौरवान्वित करती रहे |

 

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