gitanjali rahamani

जब तक कुछ कर दिखाने का इरादा मजबूत न हो, तब किसी भी काम या उदेश्य का सफल होना असंभव होता है | हमारे जीवन लक्ष्य की पूर्ति हेतु हमारी सोच ही नीव बन सकती है |

सकारात्मकता और धैर्य हथियार होते है सोच को वास्तविकता में परिवर्तित करने के लिए | जब भी आप किसी बिजनेस की शुरूआत करते है, तो संभवतः आपको उसकी सफलता और असफलता के अनुपात की कसौटियों से गुजरना होगा | जिसके लिये संयम के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है |

जहाँ एक ओर देश में लोग खेती-बाडी की ओर नही जाना चाहते बल्कि किसी कंपनी में नौकरी कर शहरी जीवन की ओर बढ़ रहे है | वहीं, बेंगलुरू की 40 वर्षीय गीतांजलि राजामणि, खेती में अलग तरीका अपनाकर अपने साथ-साथ अन्य किसानों की आमदनी को भी बढ़ावा दे रही हैं | उन्होंने 2017 में दो दोस्तों शमिक चक्रवर्ती और सुदाकरन बालसुब्रमण्यम के साथ मिलकर फार्मिजन नाम से स्टार्टअप कंपनी की शुरूआत की थी | वर्तमान में उनकी कंपनी बेंगलुरू, हैदराबाद और सूरत में काम कर रही है |

2017 में शुरू की गई इस पहल के साथ आज 16,000 लोग जुड़ चुके है | और कंपनी 20 करोड़ के टर्नओवर तक पहुँच गई है | 

गीतांजलि कौन है?

गीतांजलि केरल के किसान परिवार से आती है लेकिन उनका जन्म हैदराबाद में हुआ था | जब वह दो साल की थी, तब सड़क दुर्घटना में उनके पिता की मृत्यु हो गई थी | उसके बाद उनकी माँ ने उनकी और उनके बड़े भाई की परवरिश की है | आर्थिक तंगी से तो अवश्य गुजरना पड़ा लेकिन उनकी मां ने कभी उनकी किसी जरूरत को ना पूरा करने का कोई बहाना नहीं ढूंढा | 

वैसे तो उनका परिवार दक्षिण भारतीय तरीके से परिपूर्ण है | लेकिन जब भी छुट्टी आती थी तो वह अपने पैतृक घर केरल जाती थी | केरल में ही उन्हें प्रकृति के करीब आने का मौका मिलता था | केरल के अपने खेतो में उनका परिवार चावल और अन्य फसले उगाते थे |

उनके घर के पीछे भी 2000 वर्ग फुट का खाली स्थान था | जहाँ पर उनकी माँ उन्हें और उनके भाई को आधा-आधा हिस्सा बांट कर देती थी | जो एक प्रतियोगिता जैसा था कि कौन सब्जियों को अच्छी तरह उठाएगा | गीतांजली और उनके भाई भी मौसम के अनुसार अलग-अलग बीजो के साथ मिट्टी में प्रयोग करते रहते थे |

उन्होंने साल 2001 में उस्मानिया कॉलेज फॉर वुमिन हैदराबाद से बी.एस.सी. मे शिक्षा प्राप्त की है | इसके बाद साल 2004 में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पांडिचेरी से इंटरनेशनल बिजनेस में एम.बी.ए. की डिग्री ली | 

गीतांजली ने लगभग 10 साल क्लीनिकल रिसर्च कंपनियों में काम किया | 2014 में उन्होंने टीसीएस की अपनी जॉब छोड़ दी | उन्होंने टीसीएस कंपनी में बतौर ग्लोबल बिजनेस रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में काम किया |

गीतांजलि ने कुछ अपना काम करने का निर्णय लिया | नौकरी से बिजनेस के सफर में उनके पति और परिवार ने उनका पूर्ण सहयोग किया | उन्हें बचपन से ही प्लांटिंग-गार्डनिंग का शौक था, इसलिए 2014 में ग्रीन माई लाइफ नाम की कंपनी शुरू की | यह रूफ टॉप गार्डनिंग, टैरेस गार्डनिंग डिजाइनिंग पर काम करती है | जिसका सालाना टर्नओवर 6 करोड़ रुपए का है |

फार्मिजन की शुरूआत 

गीतांजलि का कहना हैं हम जो सब्जियां खाते हैं उनमें कीटनाशक भी होते हैं | जो हमारे शरीर के लिए घातक होते हैं | इन सभी बातो की दिमाग में हलचल के कारण ही फार्मिजन आइडिया की शुरूआत हुई | 

उनके घर के पास में एक किसान रहते थे | उनसे कुछ जमीन किराए पर लेकर खुद सब्जियां उगाने का फैसला किया | वह फसलों पर कीटनाशक का उपयोग नहीं करते है | उनके दो दोस्त शमिक चक्रवर्ती और सुधाकरन बालसुब्रमणियन ने उनकी मदद की | बाद में इस कार्य से कुछ ओर लोगों ने भी सहयोग किया | उन्होंने पाया कि 600 वर्गफुट मे एक परिवार की जरूरत लायक सब्जियां उगाई जा सकती हैं | 

शमिक और सुधाकरन आईटी से हैं | उन्होंने एक विशेष एप बनाया है | जून 2017 में पहला एप लॉन्च किया गया | जिसके बाद फार्मिजन बेंगलुरू, हैदाराबाद और सूरत में 47 एकड़ में काम कर रहे है | उन्हें सितंबर 2017 में 34.50 लाख तक की फंडिंग भी मिली है | एंजेल इन्वेस्टर में व्हाट्सएप की कोर टीम के मेंबर रहे नीरज अरोरा भी शामिल हैं |

किसानों-ग्राहकों को मनाना बड़ी चुनौती  

गीतांजलि आरंभ में एक अनुभवी किसान नारायण रेड्डी से मिली जिनका खेत उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से खराब हो रहा था | वे उनके साथ काम करने को तैयार हो गए | साथ ही ग्राहकों को समझाया गया कि बाजार में जो गोभी मिलती उन्हें ब्लीच कर सफेद किया जाता है | जो नुकसानदायक है | आप जैविक सब्जियां खाएं जिनमें कीट लगे हों | यदि जैविक गोभी कीड़ों के लिए सुरक्षित है तो यह आपके लिए भी सुरक्षित ही है | आप इसे खा सकते हैं | इस तरह प्रयासों के बाद ग्राहक जुड़ने लगे |

किसानों के साथ बराबरी की पार्टनरशिप

गीतांजलि किसानों के साथ बराबरी की पार्टनरशिप कर उनसे जैविक खेती करवाती हैं | वह किसानो के खेत को 600-600 वर्गफुट के आकार में बांटकर ग्राहकों को 2500 रुपए प्रति माह की दर पर किराए पर देती है | ग्राहक मोबाइल एप से चुने प्लॉट में पसंद की सब्जियां लगवाते हैं | सब्जियां तैयार होने पर फार्मिजन वाहन सेवा ग्राहकों के घर तक वह सब्जियां पहुंचा देता है | इसके अलावा ग्राहक और उनका परिवार किसी भी समय अपने मिनी फार्म को देखने और उस पर काम करने जा सकते हैं |

फार्मिजन किसानो को स्वतंत्र रूप से काम करने की आज़ादी देता है | और साथ ही उन्हें बीज, पौधे, जैविक उर्वरक, छिड़काव के लिए नीम का तेल, अरंडी का तेल आदि जैसे कृषि उत्पादन सामग्री प्रदान कराता है | इसके अलावा फ़ार्मिज़न ऐप के प्रबंधन, ग्राहकों की संख्या बढ़ाने और उनके घरों तक उपज की होम डिलीवरी करने का भी ध्यान रखता हैं |

अब फ़ार्मिज़न अपने किसान नेटवर्क के माध्यम से जैविक और प्राकृतिक उपज (फल, सब्ज़ियाँ और स्टेपल) भी तैयार करते हैं | और ऐप में बने एक कैटलॉग आधारित ऑर्डरिंग सिस्टम के माध्यम से उन्हें बेचते और होम डिलीवरी करते हैं |  

साथ ही ग्राहकों के साथ पूरी पारदर्शिता का ध्यान रखा गया है, यानी वे जानते हैं कि उनके द्वारा ऑर्डर किए उत्पाद किस किसान से आ रहे हैं और उनके खेत का जीपीएस लोकेशन क्या हैं | ग्राहक चाहे तो फार्म का दौरा भी कर सकते है |

जिससे ग्राहकों और किसान दोनो को फायदे हो रहे हैं | ग्राहकों को 100% आर्गेनिक सब्जियां घर बैठे मिल रही हैं | और किसानों की कमाई तीन गुना बढ़ गई है | 2019 में फार्मिजन ने जैविक फलों की डिलीवरी की भी शुरूआत की है | जिससे ग्राहकों की संख्या 16,000 के आंकड़े को पार कर गई है | 

2019 मे इनका सालाना टर्नओवर 8.40 करोड़ रुपए का था | जो अब 20 करोड़ रुपये हो चुका है |

अब गीतांजलि का 100,000 परिवारों तक विस्तार के साथ 300 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर का उद्देश्य है |  

2018, अक्टूबर में गोल्डमैन साक्स और फॉर्च्यून ने गीतांजलि को ग्लोबल वुमन लीडर से सम्मानित किया |

गीतांजलि की सोच ने यह साबित कर दिया कि अगर लगन और दृढ़ शक्ति हो तो कोई काम बड़ा या फिर असंभव नहीं होता | आपकी मेहनत ही आपके भविष्य का फैसला करती है | वर्तमान में सही ढंग से काम किया जाए तो निश्चित ही उज्जवल भविष्य का रास्ता बनाया जा सकता है |

Jagdisha आपके उद्देश्य की पूर्ति और अपने क्षेत्र में सफलता की ऊँचाई की कामना करते है |

 

 

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