nari shakti puruskaar

8 मार्च अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं और संगठनों को नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है |

प्राचीन काल से ही हमारे समाज में झाँसी की रानी, सरोजनी नायडू और कल्पना चावला जैसी बहुत सी महिलाओं ने समय समय पर नारी शक्ति का परिचय दिया है | देश की महान महिलाएं प्रतीक है सबलता का और विरोध है हमारे समाज की रूढिवादी सोच का | 

महिलाएं अबला कभी नही थी, वो हमेशा से सबल थी | हाँ अपनी शक्ति से अपरिचित जरूर थी | रूढिवादी सोच के सामने अपने घुटने टेक देना ही महिला की सबसे बडी असफलता रही है | किसी भी बदलाव के लिए आपकी सोच, आत्मविश्वास और दृढ़ता सबसे बडे़ हथियार होते है |


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आधुनिक युग में भी महिलाओं ने अपने अधिकारों कको पहचाना है और अपने जीवन से जुड़े निर्णय स्वयं लेने लगी है | आज भी महिला कोमल और मधुर व्यक्तित्व तो जरूर रखती है, लेकिन उसने अपने अंदर की नारी शक्ति को जागृत किया है और अन्याय का विरोध करना शुरू कर दिया है |

नारी शक्ति पुरस्कार भारत द्वारा दिये जाने वाले राष्ट्रीय सम्मान की एक श्रृंखला है और यह असाधारण उपलब्धि के लिए व्यक्तिगत महिलाओं और संगठनों को प्रदान किया जाता है | 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है | महिला एवं बाल विकास मंत्रालय यह दिवस राष्ट्र के प्रति महिलाओं की उपलब्धियों को पहचानने और समाज में उनके प्रति आभार प्रकट करने के रूप में मनाता है |

यह सम्मान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संस्थागत छः श्रेणियों और व्यक्तिगत महिलाओं के लिए दो श्रेणियों में दिया जाता है | 

नारी शक्ति पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक वर्ष नई दिल्ली में 8 मार्च को प्रदान किया जाता है | इस पुरस्कार में संस्थागत श्रेणी को दो लाख रुपये और व्यक्तिगत श्रेणी को एक लाख रुपये और एक प्रमाण पत्र दिया जाता है | 

यह सम्मान वर्ष 1999 में स्त्री शक्ति पुरस्कार के नाम से स्थापित किया गया था | 2015 में इसका नाम बदलकर नारी शक्ति पुरस्कार पुनर्गठित किया गया |


महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय हर साल देश की कुछ सशक्त महिलाओं को नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित करता है | महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए यह पुरस्कार दिया जाता है |

व्यक्तिगत श्रेणी में आवेदक की उम्र 25 साल निर्धारित की गई है | संस्थान के लिए महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य करने का 5 साल का अनुभव होना अनिवार्य है |

पुरस्कार सभी व्यक्तियों और संस्थानों के लिए खुले हैं | यानि सामाजिक और आर्थिक रूप से महिला क्षेत्र में बदलाव कार्यों से जुडे महिला, पुरूष और संस्थान कोई भी इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते है | 

पुरस्कारों की अधिकतम संख्या (व्यक्तिगत और संस्थागत सहित) 15 हो सकती है | हालांकि, अधिकतम संख्या में किसी प्रकार की छूट की अनुमति महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अध्यक्षता वाली चयन समिति के विवेक पर दी जा सकती है |

पुरस्कारों के लिए स्व-नामांकन और सिफारिशों पर भी विचार किया जाता है | चयन समिति पर्याप्त औचित्य के साथ अपनी इच्छा के अनुरूप पुरस्कार के लिए किसी व्यक्ति/संस्था की सिफारिश भी कर सकती है |

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी पुरस्कारों के लिए आवेदन/अनुशंसित संस्थानों और व्यक्तियों की उपलब्धियों पर विचार करते हुए पुरस्कारों के लिए प्राप्त नामांकनों की जांच कर उसे शॉर्टलिस्ट करती है | 

पुरस्कार विजेताओं का अंतिम चयन स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अध्यक्षता वाली चयन समिति करती है |

नारी शक्ति पुरस्कार का नाम भारतीय इतिहास की प्रख्यात महिलाओं की स्मृति में रखा गया है |

पुरस्कार श्रेणियाँ है:

देवी अहिल्याबाई होल्कर सम्मान – 18वीं शताब्दी की मालवा शासिका के नाम पर | महिलाओं की भलाई और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन को दिया जाता है |

कण्णगी सम्मान – प्रसिद्ध तमिल स्त्री, कण्णगी के नाम पर | सर्वश्रेष्ठ राज्य के लिए जिसने बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) में काफी सुधार किया है |

माता जीजाबाई सम्मान – वीर शिवाजी की माता. जिन्होंने 17वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य की स्थापना की थी | महिलाओं को सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करने के लिए सर्वोत्तम शहरी स्थानीय निकाय के लिए दिया जाता है |

रानी गाएदिनलिउ ज़ेलियांग सम्मान – 20वीं शताब्दी की नागा आध्यात्मिक एवं राजनीतिक नेत्री, रानी गाएदिनलिउ ज़ेलियांग के नाम पर | महिलाओं के कल्याण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले एक नागरिक समाज संगठन (सीएसओ) को दिया जाता है |

रानी लक्ष्मीबाई सम्मान – झांसी की प्रसिद्ध रानी एवं स्वतंत्रता सेनानी रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर | महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिए सर्वश्रेष्ठ संस्थान को दिया जाता है |

रानी रुद्रम्मा देवी सम्मान (पुरुष एवं स्त्रियों, दोनों के लिये) – 13वीं शताब्दी की दक्षिन पठार की शासिका रुद्रम्मा देवी के नाम पर | विशेष रूप से बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना से संबंधित महिला कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए दो जिला पंचायतों और दो ग्राम पंचायतों को दिया जाता है |

व्यक्तिगत श्रेणी

  • साहस और बहादुरी के लिए पुरस्कार

  • महिलाओं के प्रयास, सामुदायिक कार्य, या फर्क करने, या महिला सशक्तिकरण में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए पुरस्कार

नारी अस्य समाजस्य कुशलवास्तुकारा अस्ति।

 भावार्थ – महिलाएं समाज की आदर्श शिल्पकार होती हैं |

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