ruma devi

राजस्थानी पारंपरिक घाघरा और सिर पर घूंघट ढंके राजस्थानी ग्रामीण रूमा देवी किसी फैशनिस्ट की तरह नहीं दिखती हैं| लेकिन वह सबसे प्रतिष्ठित डिजाइनरों में से एक है, जो अपने सर्वोत्कृष्ट बाड़मेर पैचवर्क और कढ़ाई डिजाइनों के लिए जानी जाती है|

परिंदो को मिलेगी मंज़िल एक दिन,

ये फैले हुए उनके पर बोलते है,

और वही लोग रहते है खामोश अक्सर,

ज़माने में जिनके हुनर बोलते है!!

रूमा देवी एक लोकप्रिय पारंपरिक हस्तशिल्पकार और बाड़मेर राजस्थान की एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं| वह राजस्थान में एक गैर सरकारी संगठन ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर की अध्यक्ष हैं| उन्होंने 10 महिलाओं के समूह से भारतीय पारंपरिक हस्तकला कारीगरी की शुरूआत की थी|

आज 22 हजार महिलाओं को इस काम के साथ जोड़ उन्हें रोजगार प्रदान कर सशक्त बनाने के साथ-साथ राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया|

रूमा देवी को महिलाओं के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान “नारी शक्ति पुरस्कार 2018” से सम्मानित किया गया था|

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रूमा देवी का जन्म 1989 राजस्थान में बाड़मेर के सांगाणा कुंआ रावतसर में हुआ था| उनके पिता छोटे किसान थे| जब वह 5 वर्ष की थी, तब उनकी माँ की मृत्यु हो गई| वह एक संयुक्त परिवार में रहती थी| उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली और फिर उनका पालन-पोषण उनके चाचा और चाची ने किया| उनकी सात बहनें हैं, और वह उनमें सबसे बड़ी हैं| उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हालत में था| 8वीं कक्षा के दौरान उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा| फिर वह घर की जिम्मेदारी संभालने लगी| घर के निजी कार्यों और पडोसियों के लिए भी लगभग 10किमी. की दूरी से बैलगाड़ी मे पानी भर कर ले कर आती थी|

परिवार ने 17 वर्ष की उम्र में उनकी शादी करवा दी| 2006 में मंगला की बेदी गांव में वह अपने ससुराल चली गई| शादी के 2 वर्ष पूर्व उनका एक बेटा हुआ| लेकिन साँस की बीमारी और आर्थिक तंगी के कारण वह 48 घंटे के बाद ही उसकी मृत्यु हो गई| बेटे की मृत्यु से वह बहुत आहत हुआ| जीवन को निरश समझने लगी थी|

जीवन की नकारात्मकता को खत्म करने के लिए उन्होंने कुछ करने की ठानी जिससे वह स्वयं को व्यस्त रख सके और आर्थिक तंगी को कम कर सके| अब समस्या यह थी की करे तो करे क्या? क्योंकि वह ज्यादा पढ़ी लिखी नही थी, तो नौकरी मिलने के अवसर थे ही नही| स्थिती यह थी कि वह क्या तो किसी के घर पर उनका घरेलू काम करे या कोई दिहाड़ी मजदूरी का ही काम करे|

उन्होंने कुछ करने का मजबूत इरादा कर लिया था, फिर  उन्हें विचार आया कि बचपन में उनकी दादी कपड़े पर भेड़ की ऊन से सुंदर रूपांकनों की कढाई किया करती थी, जिसे उन्होंने भी उनसे सीखा था| बस यह विचार उनके मन में आना था, और वह लग गई दादी की सिखाई कशीदाकारी  के काम मे|

उन्होंने सबसे पहले बेग बनाने से शुरूआत की, लेकिन उनके पास सिलाई की मशीन नहीं थी तो काम करने में मुश्किल आ रही थी| उन्होंने सबसे पहला जो बेग बनाया उसे ₹70 में बेचा, जो उनके जीवन की पहली कमाई थी| उन रूपयो से वह ओर बेग बनाने के लिए समान ले कर आई, पर समस्या वही थी की बेग सीलने के लिए उनके पास सिलाई मशीन नहीं थी|

फिर रूमा देवी ने आस पड़ोस की महिलाओ से बात की और अपना 10 महिलाओं का एक समूह बनाया| दीप-देवल नाम से अपने सहायता समूह का गठन किया| सभी ने मिलकर 100 – 100 रुपये इकठ्ठा किये और एक मशीन खरीदी|

मशीन तो आ गई थी, अब वह 10 महिलाएं थी तो उसी के अनुसार काम मिलना भी आवश्यक था| अपने उत्पाद की बिक्री हेतु सही विपणन की भी आवश्यकता थी, जिसके लिए वह आस-पास के गाँव मे भी जा-जा कर अपने बनाए बेग और तकिए के खोल को बेचने लगी|

उनके इस तरह अपने काम के लिए बहार निकलने पर कुछ पडोसियों ने आपत्तिजनक बाते करना शुरू कर दिया, साथ ही परिवार वालो को भी भडकाया|

लेकिन रूमा देवी दृढ़ थी, उन्होंने परिवार के ताने सुने पर वह नही रूकी और अपना काम करती रही| वह समझ चुकी थी, कि जब मुश्किल समय में कोई सहायता के लिए सामने नही आता तो किसी के काम में अड़चन उत्पन्न करने के भी वे अधिकारी नही है| वह तो अपने परिवार की आय मे वृद्धि के लिए घर से ही कढ़ाई-सिलाई का काम कर रही थी|  और अगर कोई अड़चन डालने में शर्म नही करे उस पर अगर वह अपना सही काम भी छोड़ दे तो दोषी वह स्वयं होगी|

फिर उनको बाड़मेर के एक गैर सरकारी संगठन ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान के बारे में पता चला जो महिलाओ के सशक्तिकरण के लिए और उन्हें रोज़गार के अवसर देने का प्रयास करती है|

रुमा देवी और उनके समूह की कुछ महिलाए मिलकर इस संस्थान के पास गए| अपने काम में नवाचार के लिए रूमा देवी समूह की महिलाओं के साथ 2008 में ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान से जुड़ कर कार्य करने लगी| इस संस्था के संस्थापक विक्रम सिंह ने इनकी सरहाना की और इनको काम भी दिया| उन्होंने सबसे पहले उन्हें 3 दिनों का काम दिया, उसे पा कर वह इतनी खुश हुई कि सभी महिलाओं ने मिलकर 1 दिन में वह काम पूरा कर दिया|

रूमा देवी को विचार आया की उनको ओर भी महिलाओ को अपने साथ जोड़ना चाहिए जो काम तो करना चाहती है लेकिन उनके पास काम नहीं है| वह अपने समूह के साथ अलग अलग गाँवों में गयी महिलाओं और उनके परिवार से बात की| कई बार निराशा मिलती थी, परन्तु वह डगमगाई नही क्योंकि महिलाएं काम करने की इच्छुक होती थी| फिर क्या था उन्होंने उनके परिवार वालो को समझाया की वह उन्हें घर पर ही काम देगी, उन्हें कही बहार नही जाना पड़ेगा|

उन्होंने कई महिलाओं को अपने साथ जोड़ा| उनको घर बैठे काम दिलाया| और 2010 में ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान की अध्यक्ष बनी| आज के समय में उनके साथ 22000 से भी अधिक महिलायें जुडी हुई है और अपने हुनर से अपना परिवार चला रही है|

रुमा देवी के समूह के साथ बहुत सी महिलाये जुड़ चुकी थी और ज्यादा मात्रा में उत्पाद बनने लगे| फिर उन्होंने अपने उत्पादों की बिक्री को बढ़ाने के लिए प्रदर्शन (एक्सहिबिशन) करने का विचार किया| उन्होंने पहली बार दिल्ली में एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया और वहाँ उनके उत्पादों को लोगो के द्वारा बहुत पसंद किया गया और उनकी अच्छी बिक्री भी हुई|

इनके समूह द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का लंदन, जर्मनी, सिंगापुर और कोलंबो के फैशन वीक्स में भी प्रदर्शन हो चुका है|

उन्होंने 2016 में राजस्थान हैरिटेज वीक में हुए फैशन शो में हिस्सा लिया और इस फैशन शो में बड़े बड़े डिज़ाइनर ने इनके उत्पादों की प्रशंसा की|

दिल्ली के प्रगति मैदान में टीएफआई द्वारा फैशन शो में भाग लिया| इसमें उन्होंने देश के सलेक्टेड डिजाइनर्स के साथ अपनी डिजायन का कलेक्शन रैंप पर उतारा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना एकत्रित की और डिजायनर ऑफ द ईयर-2019 का सम्मान प्राप्त किया|

इस शो में फैशन गुरु एवं डायरेक्टर प्रसाद बिड़प्पा, सुपर वुमन मॉडल नयनिका चटर्जी, वरिष्ठ डिजायनर अब्राहम एंड ठाकुर, पायल जैन, टी.एम. कृष्णामूर्ति एवं भारत की टैक्सटाइल इंडस्ट्री के 240 समूहों के प्रतिनिधि व 40 देशों के व्यापर प्रतिनिधियों सहित फैशन जगत की विभिन्न लोग उपस्थित रहे|

2019 में रुमा जी को ‘ टी एफ आई डिज़ाइनर ‘ का सम्मान मिला|

हस्तकला को बढ़ावा देने के लिए श्रीलंका सरकार के द्वारा रूम देवी को शिल्पा अभिमन्यु पुरस्कार से सम्मानित किया गया|

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 2019 में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने महिला सशक्तीकरण में विशेष योगदान करने के लिए रूमादेवी को हस्तशिल्प के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया|

2019 में देश के बहुचर्चित टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) में भी रूमादेवी को केबीसी की ओर से स्पेशल शो ‘कर्मवीर’ के लिए विशेष अथिति के तौर पर आमंत्रित किया गया| इस दौरान उनका साथ देने के लिए बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा वहां मौजूद रही| बिग-बी अमिताभ बच्चन के सामने हॉटसीट पर बैठी रूमादेवी ने सोनाक्षी सिन्हा के सहयोग से 12 सवालों का सटीक जवाब देकर 12.50 लाख रुपए जीते थे|

अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के द्वारा उनको वार्षिक उत्सव में एक स्पीकर के तौर पर भी आमंत्रित किया गया|

Jagdisha का आत्मविश्वास और सकारात्मक विचारों वाली महिला को अभिवन्दन|

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