yogita raghuvanshi

 

याद रखिए हर्षित दिनों के लिए,
बुरे दिनों से संघर्ष करना पड़ता है|
 
आज भी भारतीय समाज में महिलाओं को घर-गृहस्थी संभालने के लिए ही जनमी है, ऐसा समझा जाता हैं| जिसके विपरीत महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बना रही| ऐसा कोई क्षेत्र नही हैं, जिसके अंतर्गत महिलाएं कार्यरत न हो| अब चाहे डॉक्टर, पुलिस अधिकारी, वकिल, जज, या वायुयान चालक, बस चालक, ऑटोरिक्सा चालक या फिर इस कहानी की नायिका की बात करे तो ट्रक चालक हर जगह महिलाएं अपना वर्चस्व स्थापित कर रही है|
 
यह कहानी हैं भारत की पहली महिला ट्रक चालक (Truck Driver) योगिता रघुवंशी की| वह अपवाद हैं उन सभी बातो का जो महिलाओं को बंदिश मे बांधती है, और उन्हें कमजोर दर्शाती है| योगिता रघुवंशी ने पुरूष दबादबा कार्य को चुना और भरपूर साहस के साथ देश के कोने कोने तक हाईवे पर दौड़ा रही हैं ट्रक|
 
 
यह तो सभी जानते है कि हाईवे पर ट्रक ड्राइवरों को बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है| एक ट्रक ड्राइवर को अक्सर घंटों तक ड्राइव करना होता है| इस काम में बहुत कम महिला ड्राइवर हैं| अगर बात महिला ड्राइवरों की करे तो सबसे पहले उनकी सुरक्षा संबंधी विषय सबसे बडी चुनौती है| लेकिन योगिता रघुवंशी ने लोगों के सभी बहाने को अर्थहीन साबित कर दिया है|
मध्यप्रदेश राज्य के भोपाल शहर की रहने वाली योगिता रघुवंशी दो बच्चों की मां हैं, और एक एकल अभिभावक हैं| वह पिछले 17 वर्षों से अकेले ही ट्रक चलाकर अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही हैं| वह अपने सफर के दौरान ढाबों पर रूक कर खाती हैं और कभी सड़क किनारे खुद खाना पकाती हैं| ट्रक में ही सो जाती हैं|
 
वह हमेशा सचेत रह कर ट्रक चलाती है, जिससे सड़क पर होने वाले हादसो से सुरक्षित रहे| जब उन्हें ऐसा सामान ले जाना होता है जिसके जल्द खराब होने की संभावना होती है, तब वह रात भर बिना रूके ड्राइव करती है| और नींद आने पर फ्यूल पंप के पास ट्रक लगाकर, झपकी ले लेती है|
 
योगिता रघुवंशी महाराष्ट्र के नंदुरबार में पली-बडी है| उन्होंने कॉमर्स और लॉ की डिग्री प्राप्त की है| उनकी शादी राजबहादुर रघुवंशी से हुई थी, जो पेशे से वकील थे और साथ ही Transport का व्यापार भी करते थे| उनके पास 3 ट्रक थे|
उनके दो बच्चे हैं बेटी याशिका और बेटा यशविन| वह एक खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही थी| लेकिन हर वक्त एक सा नही रहता, समय का फैर बदला और उनके जीवन की सबसे दुखद घटना घटित हुई|
 
वर्ष 2003 में उनके पति राजबहादुर रघुवंशी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई| उनके पति के अंतिम संस्कार में आते समय उनके भाई की भी एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई|
 
उनके पति की मृत्यु के पश्चात उन्होंने वकालत का अभ्यास करने की वजाय सड़क पर ट्रक दौड़ाना पसंद किया| उन्होंने यह फैसला हालात और बच्चों की अच्छी परवरिश को ध्यान में रखते हुए लिया| क्योंकि वकालत में आगे बढ़तीं तो कई वर्षों तक उन्हें बहुत कम पैसा मिलता या बिलकुल नहीं मिलता| प्रारंभिक वर्षों के लिए केवल जूनियर स्तर पर और एक पिटिशन ही मिलता|
 
उनके पास ब्यूटिशियन का प्रमाण पत्र भी है, उन्होंने एक बुटीक मे काम भी किया| लेकिन उन्हें अच्छी आय नही दिखाई दी| लेकिन ट्रक चलाने का मतलब तुरंत मजदूरी और अधिक स्थिरता थी| इस रोजगार ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया|
 
सडक़ दुर्घटना में पति की आकस्मिक मृत्यु के समय उनकी बेटी 8 वर्ष और बेटा 4 वर्ष का था| ऐसे मे उन्हें उनकी अच्छी शिक्षा और भविष्य की चिंता थी| योगिता रघुवंशी को अकेले ही यह जिम्मेदारी निभानी थी|
 
उन्होंने अपने तीन ट्रकों के लिए ड्राइवर और हेल्पर भी रखे| लेकिन 6 महीने के अन्दर ही उनका ड्राइवर एक दुर्घटना में ट्रक को हैदराबाद में लावारिस छोडक़र भाग गया| तब योगिता रघुवंशी एक मैकेनिक और हेल्पर के साथ वहां गयी, 4 दिनों में ट्रक को सही कराया और भोपाल वापस आ गयी|
 
फिर उन्होंने खुद ही ट्रक चलाने का निर्णय लिया| शुरूआत मे वह एक हेल्पर को साथ लेकर ड्राइव करती थी, लेकिन जल्द ही वह अकेले ही यात्रा करने लगी| उनकी पहली यात्रा भोपाल से अहमदाबाद तक थी|
 
एक महिला ट्रक ड्राइवर बनना कोई आसान काम नही है| लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी| रात भर ट्रक चलाना, सामान लादना, महिला होने के नाते नहाने की सुविधा न होना और सुरक्षा ने भी उनका हौसला डिगने नहीं दिया|
 
एक बार जब वह हाईवे के किनारे बैठकर खाना बना रही थी, तब 3 संकीर्ण बुद्धि पुरूषों ने उन पर हमला किया| लेकिन बिना डरे बहादुर महिला ने उन्हें सबक सिखाया| इस घटना मे वह चोटिल हो गयी थी, तब से वह एक पगड़ी पहनकर कॉलर ऊपर कर एक पुरुष की तरह रात मे ट्रक चलती है|
 
अपने 17 वर्ष के ट्रक ड्रविइंग पेशे के दौरान योगिता रघुवंशी देश के सभी राज्यों मे अपना ट्रक दौड़ा चुकी हैं| साथ ही वह हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी और तेलुगू भाषाएँ भी सरलता से बोल लेती हैं|
 
51 वर्षीय योगिता रघुवंशी 10 पहियों का 73 टन वजनी मल्टी एक्सल ट्रक चलाती हैं| वे देश की अकेली सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी महिला ट्रक ड्राइवर हैं|
 
Jagdisha का आत्मविश्वास और सकारात्मक विचारों वाली महिला को अभिवन्दन|

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