prakash kaur

कुछ माता-पिता अवांछनीय संतान मुख्यतः बेटियों का परित्याग कर देते हैं, क्योंकि बेटियों को ज्यादातर बोझ समझा जाता हैं| बेटियाँ पराया धन मानी जाती हैं| उनको तो शादी करके दूसरों के घर ही जाना होता हैं, पिता के घर कौन सी बेटी रही हैं| पालो-पोषो, पढाओं- लिखाओं और उनके जन्म से ही इस चिंता में लग जायो कि उनकी शादी का दहेज भी जोडना हैं|

जब बेटियाँ हर एक क्षेत्र में अपने कौशल से लोहा मनवा रही हैं, तब भी कुछ संकीर्ण बुद्धि के लोग उन्हें सिर्फ पाराया धन मात्र ही समझते हैं| विबंडना तो यह हैं, कि पढ़े-लिखे और ऊँचे पद पर विद्यमान कुछ लोगों की सोच भी बेटियों के प्रति संकीर्ण हैं|

चाँद का अपना कर किरदार, दाग अपने पास रख कर प्रकाश कौर अपनी रोशनी बाँट रही हैं| 60 बेटियों की एक माँ प्रकाश कौर जो खुली बाहो से स्वागत करती हैं, हर परित्यक्त बेटी का और सारी ममता लुटाती हैं उन पर| जालंधर में दशको से यूनीक होम (Unique Home) नाम के घर में अपनो की ठुकराई बेटियों का पालन पोषण कर रही हैं प्रकाश कौर|


परित्यक्त बेटियों के जीवन को रोशन करती प्रकाश कौर के प्रयासों को सराहते हुए उन्हें पद्म श्री 2021 से अलंकृत किया गया हैं|

प्रकाश कौर की कोई जैविक संतान नही हैं| उन्होंने शादी नही की, अपितु अपनी सारी ममता सभी परित्यक्त बेटियों पर लुटा रही हैं| कही उन बच्चियों के साथ कुछ क्रूर व्यवहार न हो इस डर से वह अपनी बेटियों को किसी ओर को पालने के लिए नही देती| प्रकाश कौर का बचपन भी नारी निकेतन आश्रम में ही बिता हैं, वह स्वयं भी एक परित्यक्त बेटी यानी अनाथ हैं|

अंधेरे की गोद मे छोडा जिन्हें उनके जन्म देने वालो ने उन्हें दे रही हैं,  एक समान प्यार, हर सुख-सुविधा, और शिक्षा एक करूणामय माँ


उन्हें अनाथ होने की पीड़ा का एहसास और एक बच्चे के लिए परिवार और परिवारिक घर-आंगन कितना महत्व रखता हैं, इस बात का एहसास पूर्णतः हैं|


उन्होंने 1992 में परित्यक्त बच्चियों के लिए एक अनोखे घर-आंगन की अपनी सोच को वास्तविकता में लाने के अपने सफर की शुरूआत की| और उन्होंने अपना पूरा जीवन परित्यक्त नवजात बच्चियों को बचाने और उन्हें एक सुरक्षित घर और भविष्य प्रदान करने के अत्यंत महान मिशन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है|

प्रकाश कौर एएन गुजराल मेमोरियल स्कूल में गणित की अध्यापिका भी रह चुकी हैं|

उन्होंने माडल हाउस इलाके से यूनिक होम की शुरूआत की| यह कार्य वास्तव में इंसानियत की सेवा को समर्पित हैं, और समय के साथ इसका सिलसिला बढ़ता गया|

1994 में भाई घनैया चैरिटेबल ट्रस्ट उनके यूनीक होम के साथ जुडा| इस ट्रस्ट के अनेक ट्रस्टी देश-विदेश से उन्हें आर्थिक सहायता भेजते हैं| इस ट्रस्ट की मदद के कारण सभी बच्चियों को अच्छे स्कूल-कालेजों में पढ़ाने का प्रबंध किया जाता हैं|
यूनीक होम एक बड़े परिवार की तरह है जहाँ बड़ी लड़कियाँ छोटी उम्र की लडकियों की देखभाल करती हैं| मसूरी, सेंट मेरीज़ जैसे आसपास के कुछ सबसे अच्छे स्कूलों में घर की बच्चियों का दखिला करवाया जाता हैं| जिससे वह अच्छी शिक्षा ग्रहण कर जीवन में बडे लक्ष्य को अपना कुछ बेहतर कर सके|

यूनीक होम मे पली बडी बेटियाँ न्यूरोसर्जन और अध्यापिका आदि बनने के अपने सपनो की ओर आगे बढ़ रही हैं| किसी ने 10वी की शिक्षा पूरी कर ली है तो कोई स्नातक शिक्षा ग्रहण कर चुकी हैं| कुछ बेटियों की अच्छा घर परिवार खोजकर प्रकाश कौर ने शादी करवा दी हैं|

भले ही वह कुछ बेटियों की शादी कर चुकी हैं, लेकिन वहीं तक अपनी जिम्मेदारियों को खत्म नहीं मानती| यूनीक होम उन बेटियों का मायका है, और यह परिवार उनके हर दुख-सुख में साथ खड़ा रहता है|

यूनीक होम में लगे पालने में आए दिन कोई न कोई किसी बच्ची को छोड़ जाता है या यू कहाँ जाए कि किसी अनाथ बच्ची को प्रकाश कौर तक पहुंचा दिया जाता है| और वह ममता का प्रकाश फैलाते हुए उन बच्चियों का अपने परिवार में खुली बाहों से स्वागत करती हैं|

यूनीक होम मे हर धर्म हिन्दू, मुसलिम, सिख, ईसाई आस्था की बेटियो को एक समान स्नेह से पाला जाता हैं|

यहां की एक अनोखी बात यह है कि सभी बच्चियों का जन्मदिन 24 अप्रैल को बडी धूमधाम से मनाया जाता हैं|
जालंधर के मॉडल हाउस इलाके के एक मकान में चल रहे इस यूनीक होम को अब तीन एकड़ में बने भव्य भवन में परिवर्तित कर दिया गया हैं| यहां पर विशाल पार्क, क्लास रूम, भोजन कक्ष, प्ले ग्राउंड से लेकर तमाम हर सुविधाएं की गई है, जो किसी संपन्न परिवार की बच्चियों को दी जाती है|

हर साल, गर्मियों की छुट्टी के दौरान यूनिक होम की बेटियों को दार्जिलिंग मे घुमाने के लिये ले जाया जाता हैं|

प्रकाश कौर के प्रयासों को देश ही नहीं विदेश में भी सराहा गया है| यही कारण है जो स्वयं रिलायंस ग्रुप से नीता अंबानी ने जालंधर आकर प्रकाश कौर को रियल हीरो के अवार्ड से सम्मानित कर यूनिक होम के कार्यों को सराहा था|

इसके अलावा कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन ने भी 2017 में यूनिक होम का दौरा करके वहां पर किए जा रहे कार्यों को सराहा था|

बेटियों के प्रति संकीर्ण व्यवहार और उनके भ्रूण को ही नष्ट कर दिया जाता है या जन्म के बाद रेलवे स्टेशन, कचरे के टब्बे या पार्क आदि मे छोड दिया जाता| इस तरह के वाक्यो को रोकने के लिए सरकारी प्रयास काफी नहीं है बल्कि समाज की मानसिकता में भी परिवर्तन लाना आवश्यक हैं|

रौशनी है किसी के होने से
वर्ना बुनियाद तो अंधेरा था
– सग़ीर मलाल


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