Goa's first woman former governor dr mridula sinha

“शूलों की राहों पर चलते, कदमों में बवंडर रखती हूं।

लहरें कितनी प्रतिकूल रहें, मुट्ठी में समंदर रखती हूं।“


वह बिल्कुल अपने नाम मृदुला’ के अनुरूप मृदुल, कोमल, सरल, सहज व्यक्तित्व और प्रेम की प्रतिमूर्ती थी|
शिक्ष‍िका-लेखिका से लेकर गोवा के गवर्नर पद तक पहुंचने वाली डा. मृदुला सिन्हा को समर्पण, जज्बे और साहित्यिक कला के लिए 2021 में मरणोपरांत भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से अलंकृत किया गया हैं|

डा. मृदुला सिन्हा एक प्रतिष्ठित लेखिका और राजनीतिज्ञ थीं, जिन्होंने अगस्त 2014 से अक्टूबर 2019 तक गोवा के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला| वह गोवा की पहली महिला राज्यपाल (Governor) थी|

उन्होंने मनोविज्ञान में एम.ए. (M.A.) और बी.एड (B.ed) किया था। इसके बाद उन्होंने कुछ समय मुजफ्फरपुर के एक कॉलेज में पढ़ाया और मोतिहारी के एक स्कूल की प्रधान अध्यापिका (Principal) भी रहीं। वह भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष थीं।

साहित्य की दुनिया में भी उनका नाम बुलंद हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में 46 से ज्यादा किताबें लिखीं हैं। दिवंगत राजमाता विजयाराजे सिंधिया पर लिखी उनकी किताब ‘एक थी रानी ऐसी भी’ पर फिल्म भी बनी थी।
मृदुला सिन्हा का जन्म श्रीमती अनुपा देवी व बाबू छबीले सिंह के यहाँ 27 नवंबर 1942 को हिन्दू पंचांग के अनुसार राम-विवाह के शुभ दिन बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कांटी छपरा धरमपुर यदु गाँव में हुआ था|

उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा छपरा के स्थानीय स्कूल में ली और बाद में लखीसराय जिले के बालिका आवासीय विद्यालय, बालिका विद्यापीठ में शिक्षा प्राप्त की।

1962 में उन्होंने मनोविज्ञान में बी.ए. ऑनर्स एमडीडीएम कॉलेज से स्नातक शिक्षा का अध्ययन किया था|

मृदुला जी जब बी.ए. की पढ़ाई कर रही थी तभी उनका विवाह औराई के मटिहानी निवासी डा. राम कृपाल सिन्हा के साथ हो गया था, जो मुजफ्फरपुर में बिहार विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में अंग्रेजी के प्राध्यापक थे|

उन्होंने शादी के बाद भी अपनी शिक्षा जारी रखी| उन्होंने बी.ए. की परीक्षा पास की| फिर वर्ष 1964 में बिहार विश्वविद्यालय (University) से एम.ए. और मनोविज्ञान विषय में परास्नातक की शिक्षा पूरी की| 1971 में बिहार विश्वविद्यालय से बी.एड. की शिक्षा पूरी की|

डा. मृदुला सिन्हा : गोवा की प्रथम महिला पूर्व राज्यपाल, शिक्षिका, प्रतिष्ठित साहित्यकार, प्रखर प्रवक्ता, मितभाषी और विदुषी


मोतिहारी के डॉ एसके सिन्हा महिला कॉलेज में मृदुला जी नें व्याख्याता पद पर कार्य किया| इसी बीच डा. राम कृपाल सिन्हा को डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त हुई| फिर मृदुला जी ने मुजफ्फरपुर में स्कूल खोला और 1968 से 1977 तक वे मुजफ्फरपुर के भारतीय शिशु मंदिर में प्रधानाध्यापिका रहीं|


गंवई संस्कृति-परंपरा मृदुला सिन्हा को भाती थीं| डा. राम कृपाल सिन्हा के प्रोत्साहन से ही मृदुला जी ने लोक कथाओं को लिखना शुरू किया| मृदुला जी का साहित्य सृजन अलंकृत होता रहा| वह गांव की माटी की महक पर लोक कथाएं लिखने लगीं, जो कि साप्ताहिक हिन्दुस्तान, नव भारत टाईम्स, धर्मयुग, माया, मनोरमा आदि पत्र-पत्रिकाओं में लगातार छपती रहीं|

बाद में उनकी लोक कथाएं दो खंडों में बिहार की लोक-कथाएं के नाम से प्रकाशित होने लगी| उनकी लोक कथाओं मे रूची कभी नही घटी और वे हमेशा सृजन करती रहीं- चाहें वो शिक्षिका रहीं, चाहें समाजसेविका या फिर सक्रिय राजनीतिज्ञ यहां तक कि गोवा के राजभवन मे भी कलम का साथ न छोडा|

उपन्यास और किताबे

मृदुला जी ने विविध विषयों पर 46 से अधिक किताबें लिखी हैं। उनके साहित्यिक कार्य में ‘ज्यों मेहंदी को रंग’ (उपन्यास-जिस पर दूरदर्शन पर टीवी सीरियल और लघु कथा ‘दत्तक पिता’ बना), ‘नई देवयानी’, ‘घरवास’, ‘सीता पुनी बोली’, ‘देखन में छोटन लगे’, ‘यायावरी आंखों से’, ‘ढाई बीघा जमीन’, ‘मात्र देह नहीं है औरत’, ‘एक दीये की दिवाली’ ‘अपना जीवन’, ‘अंतिम इच्छा’, ‘परितप्त लंकेश्वरी’, ‘मुझे कुछ कहना है’, ‘औरत अविकसित पुरुष नहीं हैं’, ‘चिंता और चिंता के इंद्रधनुषीय रंग’, ‘या नारी सर्वभूतेषु’, ‘एक साहित्यतीर्थ से लौटकर’ शामिल हैं।

ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जीवनी–एक थी रानी ऐसी भी, इस पर फिल्म भी बन चुकी हैं|

उन्होंने बच्चों के लिए ‘आईने के सामने’, ‘मानवी के नाते’ और ‘बिहार की लोक कथाएं’ जैसे निबंध भी लिखे हैं।

मृदुला जी कों 21 शोधकर्ताओं को इनकी कृतियों पर शोध के लिए बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय द्वारा पीएच.डी/डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया| उन्हें कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हैं|
मृदुला जी ‘पाँचवाँ स्तम्भ’ मासिक पत्रिका का निरंतर संपादन किया करती थीं|


उनका राजनीतिज्ञ सफर

मृदुला जी के पति डॉक्टर रामकृपाल सिन्हा बिहार में कैबिनेट मंत्री और केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहे। वे भाजपा के केंद्रीय कार्यालय के प्रभारी भी रहे।

1967 के चुनाव में धीरे-धीरे उनकी रुचि राजनीति में बढ़ती गई।

वे महिला मोर्चा की प्रथम अध्यक्ष थीं। उन्होंने जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व वाली ‘समग्र क्रांति’ में सक्रियता से भाग लिया था|

वे अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमन्त्रित्व-काल में केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष भी रहीं। वे भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय कार्यसमिति की सदस्य भी थीं|

पीएम मोदी ने उन्हें स्वच्छ भारत अभियान का एम्बेस्डर बनाया था| 31 अगस्त 2014 को गोवा की राज्यपाल बनीं और 2 नवंबर, 2019 तक उन्होंने इस पद का कार्यभार संभाला| गोवा के राज्यपाल के रूप में वे गोवावासियों के बीच बहुत लोकप्रिय थीं|

गोवा के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने दैनिक पूजा के लिए राजभवन में एक गाय और एक बछड़े का भी पालन पोषण किया।

मृदुला जी को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से साहित्य भूषण सम्मान व दीनदयाल उपाध्याय, 2017 में अखिल भारतीय तेरापंथीय हीरालाल द्वारा आचार्य तुलसी कार्तिकेय पुरस्कार प्राप्त हैं|

ख्यातिप्राप्त विदुषी मृदुला जी का 18 नवंबर को दुखद निधन हो गया और वह महान आत्मा परमात्मा में लोप हो गईं| Jagdisha उस महान आत्मा के प्रति नतमस्तक हैं|

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