dulari devi

पेंटिंग कलाकारी से पहले घर-घर जा कर किया करती थी झाड़ू-पोंछा | मिथिला पेंटिग की यह कलाकार कभी स्कूल नही गईं| पढी़-लिखी न होने के बावजूद उनकी पेंटिग कलाकारी में प्रबीणता अद्भुत हैं| अगर बात लिखने-पढ़ने की करे तो वह अपना हस्ताक्षर और अपने गांव का नाम भर लिख पाती हैं। लेकिन, 54 वर्षीय महिला के कला-कौशल की चर्चा कला जगत की नामचीन पत्र-पत्रिकाओं में होती है। इनके प्रशंसकों में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का नाम भी शामिल हैं।

हम बात कर रहे हैं बिहार के मधुबनी जिले के रांटी गांव की रहने वाली 54 वर्षीय मिथिला पेंटिंग कलाकार दुलारी देवी की| उनकी शानदार प्रतिभा के लिये इस साल (2021 में) पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। दुलारी देवी की संघर्ष गाथा हर महिला और परिस्थितिओं के सामने घुटने टेक देने वालो के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं|

मधुबनी जिले के राजनगर प्रखंड के रांटी गांव निवासी दुलारी देवी का जन्म मल्लाह जाति के एक अत्यंत निर्धन परिवार में हुआ था| निर्धनता के कारण वह पढ़ लिख नही पाईं| केवल 12 वर्ष की आयु में अनके पिता ने उनकी शादी करवा दी| वह शादी 7 वर्ष ही चली| उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया था, परन्तु वह केवल 6 माह ही जीवित रही| बेटी की अचानक मृत्यु के बाद वें अपने मायके आईं और फिर यहीं रह गईं। क्योंकि उनके पति ने किसी ओर स्त्री के साथ पुनः विवाह कर लिया था|

Padam Shri Awardee 2021 Dulari Devi


अपनी जीविका चलाने के लिए उन्होंने आस-पास के घरों में झाड़ू-पोंछा करना और बर्तन धुलने का काम शुरू कर दिया| साथ ही वह चावल के खेतो में धान की वुबाई के लिए मजदूरी भी करती थी|

भाग्य ने साथ दिया और दुलारी देवी प्रतिष्ठित मिथिला कलाकार पद्मश्री महासुंदरी देवी और उनकी देवरानी कर्पूरी देवी के घर पर घरेलू काम करने लगी| उनके घर सुंदर चित्रकारी की कला को करते हुए जब उन दोनो को देखती, तब उन्हें इस कला को सिखने का उत्साह हुआ| महासुंदरी देवी से उन्होंने इस कला को सिखने की अपनी इच्छा प्रगट की तब उन्होंने 1माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम मे दुलारी देवी का नाम दर्ज करवाया और वहाँ उन्होंने लाइन, बॉर्डर और स्केच आदि बनाना सिखा|

उन्होंने कर्पूरी देवी से मिथिला चित्रकारी की कला के जटिल चित्रो को सिखाने का आग्रह किया| कर्पूरी देवी ने उनके आग्रह को स्वीकृति देते हुए दुलारी देवी को बिना किसी भेदभाव के अपने घर से यह कला सिखाना शुरु कर दिया|
इस दौरान खाली समय में दुलारी देवी अपने घर-आंगन को मिट्टी से लिप-पोतकर, लकड़ी की कूची बना अपनी कल्पनाओं को आकृति देने लगीं।

दुलारी देवी ने कर्पूरी देवी की मदद से गौरी मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे एक स्थानीय चित्रकला संस्थान में पंजीकरण किया और वहां 200 रुपये प्रति माह के वेतन पर 16 साल तक काम किया।

कर्पूरी देवी का साथ पाकर उन्होंने मिथिला चित्रकला के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली। दुलारी देवी अब तक 7 हजार मिथिला पेंटिंग विविध विषयों पर बना चुकी हैं।

दुलारी देवी मिथिला कला के ‘कचनही’ और ‘भरणी’ दोनों रूपों में कुशल हैं| दुलारी देवी मिथिला क्षेत्र के पारंपरिक राम- सीता चित्रों की चित्रकारी, कई समकालीन विषयों और सामाजिक विषयों जैसे बाल विवाह, एड्स के प्रति जागरूकता, भ्रूण हत्या आदि, इसके अलावा, उनकी दिनचर्या, ग्रामीण दृश्य, जिसमें पेड़, खेत, जानवर आदि शामिल हैं की चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध हैं| साथ ही वें गणेश छवियों की चित्रकारी में विशेष अनुभवी चित्रकार हैं|

दुलारी देवी मिथिला कला संस्थान में आने वाले युवा चित्रकारों को प्रशिक्षित करती है और उन उपकरणों और संसाधनों से प्रभावित होती है जो उन्हें उनके साथ कला को बेहतर और तेज़ी से सीखने में मदद करते हैं। सभी के साथ स्नेह और उदार भाव रखने वाली, दुलारी देवी अपने गाँव में होने वाली शादियों में अपनी पेंटिंग के लिए शुल्क नहीं लेती हैं। उन्होंने मिथिला कला के क्षेत्र में अपने दशकों के योगदान के फलस्वरूप कई प्रशंसा और मान्यता प्राप्त की है।
2012-13 में दुलारी देवी राज्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं।

गीता वुल्फ की पुस्तक ‘फॉलोइंग माइ पेंट ब्रश’ और मार्टिन लि कॉज की फ्रेंच में लिखी पुस्तक मिथिला में दुलारी की जीवन गाथा व कलाकृतियां सुसज्जित हैं। सतरंगी नामक पुस्तक में भी इनकी पेंटिग ने जगह पाई है। इग्नू के लिए मैथिली में तैयार किए गए आधार पाठ्यक्रम के मुखपृष्ठ के लिए भी इनकी पेंटिग चुनी गई।

पटना में बिहार संग्रहालय के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुलारी देवी को विशेष तौर पर आमंत्रित किया। वहां कमला नदी की पूजा पर इनकी बनाई एक पेंटिग को जगह दी गई है।

अंत में Jagdisha का अपने पाठकों को यही संदेश हैं कि धैर्यवान मनुष्य सभी आपदाओं से सहज ही मुक्त हो जाते हैं|
धीरे धीरे रे मना, धीरे सबकुछ होय,

माली सीचे सौ घड़ा ऋतु आये फल होय ! – संत कबीर
Jagdisha की ओर से दुलारी देवी को अनेकानेक शुभकामनाएं और नारी शक्ति को प्रणाम|

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