deepika naidu transgender woman

38 वर्षीय दीपिका नायडू एक Transgender Women, जो है, एक Beautician, Classical dancer जो बहुत सी साहित्यक नृत्यकलाओ जैसे कत्थक, लावनी, भरतनाट्यम इत्यादि मे बडी निपुर्णता का प्रदर्शन करती हैं| Deepika एक Classical dance शिक्षिका हैं और ‘Deepika Beauty Parlor’ नाम से पार्लर चलाती है | वह दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक संघ मे समाजिक कार्यकर्ता है जो महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के विकास के लिए कार्य करते है, जिसके अंतर्गत वह महिलाओ को dancing और parlor का काम सिखाती है| 

दीपिका ठेठ केरेला अय्यर परिवार से संबंध रखती है| उनका जन्म समृद्ध मलयाली हिंदू ब्राह्मण परिवार लता अय्यर और राम्या अय्यर के घर एक लडके के रुप मे हुआ था| वह 5 बहन-भाई मे तीसरे नंबर पर आती है| उनसे 7 साल बडे भाई रवि अय्यर, 5 साल बडी बहन लक्ष्मी अय्यर और 1 और 2 साल छोटी बहनें ज्योति अय्यर और रेखा अय्यर है| अपना शुरुवाती जीवन उन्होंने एक लड़के के रूप मे ही व्यतीत किया हैं| जन्म से उनका नाम दीपक राम्या अय्यर था| उनके पिताजी जमींदार और माताजी classical dancer थी जो South Indian cultural association के dancer center मे कत्थक और भरतनाट्यम सिखाती थी|

उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा Govt Model Boys High sec. school Trivandrum और अपनी स्नातक शिक्षा Arts & Drama मे Govt College for women Trivandrum से प्राप्त की है| उनके बडे भाई ने जल्दी ही अपने पिता के साथ उनके काम मे हाथ बटाना शुरू कर दिया और वह भी एक जमींदार बन गए| लेकिन Deepak जो अब Deepika है का जीवन बहुत अलग था |


Transgender Women, पाया अपना अभिमान बन गई नारी शक्ति का प्रतीक  | जानिये उनकी प्रेरक कहानी


Jagdisha के साथ अपनी खास बात-चीत मे Deepika Naidu बताती है, मेरा सारा समय मेरी तीनो बहनों और अम्मा के इर्द-गिर्द गुजरता था| बहनो के साथ स्कूल, ट्यूशन जाना और गुडिया के साथ व घर-घर खेलना और स्कूल का homework करना | तीनो बहनों के अलावा चाचा की दो बेटियाँ भी हमारे घर पर ही रहती थी यानी 5 लड़कियों के साथ मै लड़का होकर भी हमेशा लड़कियों के खेल ही खेला करती थी|

जब Deepika 10 साल की थी, उनकी अम्मा चाहती थी की उनकी कोई बेटी उनकी तरह classical dancer बने |

Deepika ने बताया, परिवार की किसी भी लडकी को dance मे कोई interest ही नही था परन्तु मुझे लड़का होने के बावजूद भी कत्थक और भरतनाट्यम सिखने मे बहुत interest था| मैं बोली मुझे सिखना है और मैं अम्मा के साथ जाने लगी| मैंने कत्थक सिखा और धीरे-धीरे 14साल की उम्र तक भरतनाट्यम भी सिख लिया|


14साल की उम्र मे उनकी अम्मा ने दुष्यंत और शकुंतला वाले Drama मे उन्हें शकुंतला बनाया

मैं अपने स्कूल की दूसरी लड़कियों के साथ शकुंतला के पात्र के रुप मे लड़कियों की वेशभूषा मे बालों में गजरा लगाए और मटका लिए खड़ी थी, और लड़कियों ने कहा ये तो हम से ज्यादा सुंदर लग रहा हैं| 14साल के एक लड़के को लड़कियों के बीच मे उस वेशभूषा मे खडे होने मे एक झिझक और संकोच होती है परन्तु मैं तो बिना किसी झिझक के बडी सरलता से खडी थी और बाकी लडकियों के साथ हंसी-मजाक कर रही थी| 


लडकियों जैसे दिखने लगे आव-भाव

Drama  मे भाग लेने के बाद Deepak को लड़कियों की तरह वेशभूषा को धारण करने की लालसा बढती गई|

मै जब भी अपनी अम्मा और बहनो को सजते-संवरते और साड़ी पहनते देखती तो मुझे बहुत मन करता क्योंकि मुझे वो कपडे नही मिलते थे | बुरा लगता था, जब अम्मा और बहनो के साथ कपडे लेने जाती तब उनके कपडे एक दूकान से सुंदर-सुंदर साड़ियां और मेरे लिए दूसरी दुकान से pant-shirt, t-shirt या trouser खरीदे जाते थे| मुझे लडकियों के group मे ही रहना पसंद था | मेरी बहुत-सारी female friends थी, वो हमेशा मेरे dance और beauty की तारीफ करती थी |

मै भी उनके साथ make-up की बातें करती थी| मेरे अंदर girl-feeling घटने की बजाए बढ़ती जा रही थी| जब मैं 16 साल की थी तब अपनी बड़ी बहन के room मे जाकर ही पढा़ई करती और जब room मे कोई नही होता तब बहन के कपडे पहन-पहन कर देखा करती थी| एक दिन तो ऐसा हुआ बड़ी बहन अचानक room मे आ गई और मैने बहन के कपडे पहन रखे थे और मै तुरन्त जाकर चादर मे छुप गई| उस दिन बहुत डाँट पडी पर शायद कही न कही मेरी बड़ी बहन मुझे समझ गई थी क्योंकि कोई 16 साल का लड़का लड़कियों के कपडे क्यों पहनना चाहेगा |

कब खुद को पहचाना?

जब मैं 17 साल की थी, मेरी अम्मा ने राज्य स्तर पर साहित्यिक नृत्य भरतनाट्यम प्रतियोगिता का आयोजन किया था, प्रतियोगिता मे 6 महिलाएं (30+), जिसमे एक मेरी अम्मा भी थी, प्रदर्शन करने वाली थी| एकाएक उनमें से एक महिला प्रतियोगिता वाले दिन बीमार पड गई, अम्मा तो परेशानी मे पड़ गई, क्या होगा |

तभी मेरी बड़ी बहन अम्मा से बोली क्यों चिंता कर रही हो, दीपक कर लेगा | पर अम्मा को तो कोई 30+ महिला चाहिए थी, वो तो 17 साल की किसी लड़की को भी नही चुनती परन्तु बड़ी बहन के कहने पर अम्मा मान गई, क्योंकि कोई option भी नही था | और मैने सारी performance देखी और practice की हुई थी |

अब जब मै अपनी बड़ी बहन के साथ make-up room मे गई, वहाँ पर सिर्फ महिलाएं ही थी, अब make-up वाली aunty को मुझे कुछ ऐसे दिखाना था, जैसे मै भी कोई 30+ महिला हूँ | तो शुरूवात हुई waxing से जिसका चिल्ला-चिल्ला कर मै मजा ले रही थी| मुझे महिला का look देने के लिए सिंथेटिक स्तन और bum पर padding चिपकाई |

दोनो हाथो मे मेहंदी, सुंदर साड़ी, लम्बे बालों की विग और गजरा, ऐसा लगा जैसे मै खुद से मिल गई थी| और प्रतियोगिता के बाद मुझे बहुत सरहाना मिली| परन्तु उस वेशभूषा को मै छोड़ना नहीं चाहती थी| 

मैने dance-class जाना नहीं, छोड़ा क्योंकि वहाँ सफेद रंग का कुर्ता, लेगिन और दुपट्टा मिलता था| अब मुझे college और दूसरी जगहो से dance और drama के लिए प्रस्ताव मिलने लगे | अधिकतर मुझे महिला का रोल ही मिलता था|

शुरूवात मे drama के एक भाग में पुरूष और दूसरे भाग मे महिला, पर फिर केवल महिला का ही रोल मिलने लगा | इस तरह drama मे, मैं कभी माँ, बहू, बेटी या सास आदि के रोल निभाने लगी | मेरे male friend भी मेरी बहुत तारीफ करते थे| कई बार ऐसा होता था, घर मे तीन बहने होने के बावजूद मेरे लिए लड़कों की कॉल आती थी जो मुझसे फ्लर्ट करते थे और सच कहूं तो मुझे उनसे बात करना पसंद था |

इन सब के बीच एक घटना ने मुझे बहुत आहत किया| मैं(18) अपने collage से बहार एक drama मे perform करने गई, जहाँ मेरे दो दोस्त मुझसे drama के बाद मिलने आये, मैं उस समय room मे अकेली थी | पहले तो उन्होंने मेरी बहुत तारीफ की लेकिन फिर वो मुझे गलत तरीके से छुने लगे और एकाएक एक ने मुझे गर्दन से केश कर पकड़ लिया और दूसरा मेरे उन स्त्री वस्त्रों को उतारने लगा |

भाग्य से वह मेरे साथ कुछ ज्यादा गलत करते उससे पहले ही मेरी चचेरी बहन वहाँ आ गई, जिसे देख वे लडके भाग गये | मुझे कारण तो नही पता लेकिन मेरी नग्न अवस्था को देख मेरी बहन ने room मे रखे पुरूष वस्त्रों को न देते हुए मुझे स्त्री वस्त्रों को दिया | जिन्हें पहन मैं, मेरी बहन के साथ घर आ गई | हमने इस बारे मे सिर्फ़ मेरी बड़ी बहन लक्ष्मी को बताया और फिर सबने चुपी साध ली | कुछ दिन मै collage नही गई| लेकिन फिर collage, drama और dance मे सहज ही आप बीती को भुला दिया, क्योंकि उन लड़कों को उसके बाद मैंने कभी नहीं देखा | 


अप्पा ने करवा दी सादी

मेरे अंदर स्त्री गुण बढते जा रहे थे | मेरे एक drama को देखने के लिए मेरी अम्मा और बडी बहन देखने आई, जिसमे मैने गर्भवती महिला का रोल निभाया था | मुझमे स्त्रीत्व को ज्यादा देखते हुए मेरे अप्पा ने मेरा dance और drama छुड़वा दिया | अप्पा ने बिना मेरी इच्छा के मेरी(21) शादी भाग्या नाम की एक 26 वर्षीय लडकी के साथ करवा दी |

जिसे मैंने शादी के अगले दिन अपने बारे मे बता दिया था परन्तु उसे लगा मैं परेशान करने के लिये ऐसा बोल रही हूँ | धीरे -धीरे उसे भी एहसास होने लगा और घर मे रोज लड़ाई- झगड़े शुरु हो गए | वह अपने घर भी नही जा सकती थी क्योंकि उसके माता-पिता अब उसकी जिम्मेदारी नही लेना चाहते थे |

उनके अनुसार मै जो भी, जैसा भी उसका पति था | और अपने अप्पा के भय के कारण मै भी उसे इस रिश्ते से आजाद नही कर सकती थी| दूसरी ओर मेरे भाई ने दूसरी शादी कर ली थी क्योंकि पहली भाभी कोई संतान नही दे पाई| और हमारे दूसरे घर मे (जो अप्पा ने उन्हें दे दिया था) अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहने लगे | तीनो बहनो की शादी भी हो चुकी थी |

मेरी शादी के 8 या 9 महिने के बाद ही अप्पा का देहांत हो गया| अब घर में, मैं सिर्फ 3 महिलाओ अम्मा, भाभी(भाई की पहली पत्नी), भाग्या के साथ था | जिससे मेरा डर खत्म हो गया और मैंने फिर से drama और dance प्रोग्राम करने शुरु कर दिए| भाग्या भी एक स्कूल मे पढाने लगी और उसे अशोक नाम के एक पुरूष से प्रेम हो गया |

मैंने भी उसकी शादी उस पुरुष से करवाने का वचन दे दिया लेकिन उसे अभी समय चाहिए था, क्योंकि उसका प्रेमी बेरोजगार था | अब मेरे और भाग्या के बीच सब अच्छा होने लगा, हम दोस्तों की तरह रहने लगे| कुछ दिनों तक तो मैं अपने drama रोल के लिए drama place पर ही जा कर तैयार होती थी पर क्योंकि घर मे कोई पुरूष नही था तो मुझे किसी का भय नही था, इसलिए मैं घर से ही तैयार होकर जाने लगी |


जीवन का सबसे भयावह समय?

जिस पत्नी को अपनी दोस्त और सबसे करीब समझा उसी ने सबसे बडा धोखा दिया| एक दिन उसने अम्मा से कहा मैं और दीपक 10 दिनों के लिए कन्याकुमारी जाना चाहते है, उन्होंने तुरन्त सहमति दे दी | उन्हें लगा शायद उनके बेटे और बहु के बीच सब सही हो रहा है |

और दूसरी ओर मुझे मेरे  drama center मे call किया ओर कहा मैं और आप 10 दिनों के लिये कन्याकुमारी जा रहे है | अम्मा भी मान गई है और अशोक वहाँ पहले से मौजूद है | उसने हमारे एक दोस्त के यहाँ मिलने के लिया कहाँ, वह वही पर मेरा समान भी पैक करके ले कर आई | मैंने जब उससे अपने कपडे(t-shirt और trouser) माँगे तो देखा वह तो पूरे बैग मे मेरे सिर्फ स्त्री वस्त्रों (साड़ी, पेटीकोट आदि) को ही ले कर आई थी | मुझे समझ नहीं आ रहा था, वह ऐसा क्यों कर रही थी |

उसने मुझे उन्ही वस्त्रों में चलने के लिए राजी कर लिया और मैं उसके साथ चली गई| वहाँ अशोक एक 45 वर्षीय रमेश नाम के आदमी के साथ हमसे मिला| जिसे वह अपना बडा अधिकारी बता रहा था, जो कि दिल्ली से था और Indian Postal office मे अधिकारी था | वहाँ पहुँचते ही भाग्या के पुरे तेवर ही बदल गये उसने मुझे उस आदमी की ओर धकेला और बोली जा जिंदगी का कुछ लुफ्त उठा ले | भाग्या मुझे वहाँ अपनी बहन और उस आदमी को मेरा पति बता रही थी |

असल बात यह थी की इस पूरे trip का खर्चा रमेश ने ही उठाया था और भाग्या और अशोक ने उससे ₹30,000 लिए थे| वह पहले केरल आ चुका था और, मुझे और मेरे dance को देख चुका था, और उसके पास मेरी काफी photos भी थी| Hotel भी couple के रूप मे ही book किया गया |  मैने जब भाग्या से पूछा क्या हो रहा है ये सब, मुझे यहाँ नही रुकना घर जाना है| तब उसने बडे अजीब तरीके से कहाँ ज्यादा नखरे मत दिखा| मैने तो मानो हथियार ही गेर दिए और खुद को अपने मन के भय के कारण समर्पित कर दिया | वह और अशोक मुझे रमेश के साथ एक room मे छोड़ कर चले गए |

पहले तो उसने मीठी-मीठी बाते की और फिर करीब आने लगा और गलत तरीके से छुने लगा| मैने(23) उसे जब मना किया तो वह इतना घटिया था बोला चिल्ला गलत तू साबित होगा मै नही क्योंकि साड़ी में तू आया है | मैं अपनी कामवासना किसी औरत के साथ भी बुझा सकता हूँ पर तेरे साथ गर्भवती होने का खतरा नहीं है | और फिर उसने बहुत निर्दयता से मेरा बलात्कार किया | अगली सुबह जब भाग्या मुझसे मिली तब उसने मुझ पर तंग कसे और मेरा मजाक बनाया| पहले 4-5 दिन मुझे बहुत बूरा महसूस हुआ लेकिन रमेश की मीठी मीठी बाते और मेरे प्रति स्नेही व्यवहार के कारण मुझे लगने लगा वह मुझसे प्यार करता है | 7-8 दिनों के बाद मैं उसके साथ सहज हो गई |

हम वहाँ 10 दिनों के बदले 15 दिनों तक रुके | जब मैं और भाग्या घर पहुँचे तब मेरी बड़ी बहन आई हुई थी, वह मुझे देख कर ही समझ गई कि कुछ तो गलत हुआ है| उनके पूछने पर मैंने उन्हें सब सच बता दिया| अम्मा और बहन ने भाग्या को बहुत बूरा-भला कहाँ और उसी रात वह घर से ₹80,000 और कुछ सोने के गहने लेकर अशोक के साथ बैंगलोर भाग गई | अम्मा ने पुलिस मे शिकायत करने के लिए मना कर दिया क्योंकि उन्हें डर था इस सब से हमारी समाज मे बदनामी होगी |


एक गलत फैसले ने वेश्यवृत्ति की ओर धकेला और आत्महत्या करने पर हुई मजबूर

रमेश ने लगभग 15-20 दिनो के बाद मेरे घर call की और मुझसे बात की| उसने मुझे स्नेहपाष मे बांधा | मुझे दिल्ली आने को कहाँ और वही से अपना dance और drama  करने की सलहा दी | मेरे पास कोई साधन न जान वह स्वंय ही मुझे लेने आ गया और मैं भी बिना घरवालो को कुछ बताए उसके साथ चली गई |

उसने वहाँ मुझे अपने घर पर नही बल्कि एक flat मे ठहराया| 4 दिनों तक उसकी कोई खबर नही फिर अपनी व्यस्तता का बहाना बना मुझे शांत कर दिया और हमने मेरे लिए shopping की| flat में, मैं स्त्री वेश और बहार पुरूष वेश मे ही निकलती | 15-20 दिनो तक वह मेरे पास आते जाते रहे लेकिन मेरे काम के लिये किसी से मिलवाया नही और अब बहार घुमने जाना भी बंद कर दिया | पुछने पर जवाब मिला औरते घर के अंदर ही अच्छी लगती है| फिर वह 20 दिनो के लिए गायब सा हो गया और इसी बीच एक अन्य पुरूष एक औरत के साथ वहाँ आया और उसके साथ अपनी कामवासना पूरी कर चला गया | उस दिन रमेश के पास Call लग गई |

जब उसे यह सब बताया तो उसने कहाँ वह उसका दोस्त था और वह लड़की उसकी दोस्त है, इसके पास रहने के लिए जगह नही है इसलिए वह भी इसी flat मे रहेगी | मैने जब उस लड़की से बात की तो पता चला वह वेश्यावृत्ति मे है | अगले दिन रमेश आने वाला था, उसने मुझे साड़ी मे तैयार रहने को कहाँ मुझे समझ नही आया मै क्या करू पर फिर भी मै तैयार हो गई, वह अपना काम करके चला गया |

उस लड़की ने मुझसे पुछा क्या मे इस काम मे आना चाहती हूँ, तब जवाब मे मैने कहाँ नही मैं उनसे प्यार करती हूँ इसलिए यहाँ हूँ | यह सुन वह बोली मैं तो इस काम के पैसे लेती हूँ परन्तु तुम तो मुफ्त मे इस्तमाल हो रही हो | और उसकी यह बात सच थी अब वह मेरे लिए कभी नही आया 25 दिनो के बाद flat के मालिक ने मुझसे किराया मागा वरना जगह खाली करने को कहाँ | उस मुश्किल घड़ी में उस लड़की ने ही मेरी मदद की और अपने client से कह कर मुझे वहाँ रुकने दिया |

दिल्ली से केरल जाने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे इसलिये उस लड़की के कहने पर मजबूरन मुझे वेश्यावृत्ति का सहारा लेना पडा| उस लड़की ने ही मेरे लिए clients  ढूंढे और पर्याप्त पैसे इकट्ठे होने पर मेरा केरल आने का इंतजाम किया| अंततः मै अपने घर, अपनो के बीच पहुँच गई | मेरे अंदर की गलानी ने मुझे इतना तोड़ दिया की मैने नींद की गोलिया खाली | घरवालों ने बचा लिया पर मैने खुद को अंधेरे कमरे मे कैद कर लिया |


नामर्द की तरह जीवन भार रोने से अच्छा है, साडी और चूडियाँ पहन ले

मैं मेरी बहनों से भी नजरे नहीं मिला पा रही थी | एक दिन मेरी बड़ी बहन ने मेरे लिए एक बड़ा फैसला लिया | वो आई मेरे पास और बोली किसी लड़की से तुम्हारी शादी करवा देते है, अगर तुम सहमत हो तो| उस दिन पहली बार मैने खुद के लिए बोला “नही”| फिर बहन बोली तुम महिलाओं के प्रति आकर्षित हो या फिर पुरूषों के, क्योकि एक स्त्री होने के नाते मुझे तुम मे कोई पौरुष दिखाई नही देता|

अपनी बहन की बाते सुन मैं रो गई और उन्हें जवाब दिया “हाँ” मुझे पुरूषों की ओर आकर्षण होता है | तब मेरी बहन बोली – “नामर्द की तरह जीवन भार रोने से अच्छा है, साड़ी और चूडियाँ पहन ले और नारी सम्मान के साथ जीवन यापन कर”|

एक समलैंगिक को देख कर महिलाएं भी सम्मान नहीं सिर्फ़ सहानुभूति ही दे सकती है | तेरे लिए चूडियाँ और साड़ी ही तेरी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत का प्रतीक होगी |

अम्मा और बाकी दो बहनें ये सुन आश्चर्य में थी और उनके फैसले के विरोध में भी | बड़ी बहन दृढ थी और उसने मेरी (25) gynecologist से जाँच करवाई| जिससे पता चला मेरी body मे पुरुष-हार्मोन बहुत कम बनते है और मेरा पुरुष गुप्तांग भी 4 वर्षीय लड़के जैसा था | 

पुरुष-हार्मोन की कमी के कारण ही मेरी चाल-ढाल और भावनाएँ महिलाओं जैसी थी, इसलिए डॉक्टर ने महिला -हार्मोन लेने की सहल दी जिससे मेरी छाती में उभार आ सके और मैं स्त्री स्वरुप दिख सकूं | मैने महिला-हार्मोन के इंजेक्शन लेने शुरु कर दिए, पैसो की कमी होने के कारण बड़ी बहन ने अपने गहने बेच दिए, लेकिन मेरे इंजेक्शन नहीं छुटने दिए | मेरे लिए मेरी बडी बहन ही सत्य माँ स्वरुपा हैं |

मेरे कष्ट को महसूस कर अम्मा ने भी मुझे बेटी रूप मे स्वीकार कर लिया | मैं इस हार्मोन प्रक्रिया के दौरान एक किशोरी जो धीरे-धीरे यौवनावस्था की ओर बढ रही होजैसा महसूस कर रही थी| जीवन के इस पड़ाव में माँ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और मुझे भी मेरी अम्मा का साथ मिल गया | अम्मा ने मुझे अलग-अलग हील मे चलने का अभ्यास, खाना बनाना, कपडे धोना और महीला वस्त्रों की खरीदारी करना इत्यादि कामो को सिखाया| 28 की उम्र मे, मै पूर्ण स्त्री दिखने लगी परन्तु छोटा ही सही पर पुरुष-गुप्तांग  होने के कारण खुद को सहज नही कर पा रही थी, इसलिए बाहरी दुनिया से दूरी बना ली |

मेरी समस्या को समझ मेरी माँ ने मुझे उनकी पहचान की एक beautician रंजना aunty के beauty parlour मे भेजने का निर्णय लिया| मेरी अम्मा ने कहाँ मेरे सामने 60% Deepika और 40% Deepak है, लेकिन मुझे 100% Deepika चाहिए| रंजना ब्यूटी पार्लर मे 12 महिलाएं काम करती थी| शुरूवात मे सभी ने मेरा सहयोग किया, 3-4 औरते ऐसी भी थी जो मुझे चिढ़ाया करती थी| 2 महिने मे मैने लगभग काम सीख लिया था और अब मेरे काम से customer भी खुश थे जिस कारण उन 3-4 औरतो ने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया| एक दिन एक महिला ने सफाई करते समय chair को जानबूझकर मेरी ओर थकेला जो मेरे गुप्तांग मे लगा|

मै दर्द और असहाय महसूस कर रही थी| अब मैने aunty से जाकर बोला की औरते मुझे तंग करती हैं और छेडती है| तब बहुत ही प्रेम से उन्होंने मुझसे कहाँ तो उसमे क्या परेशानी है, एक औरत दूसरी औरत को हमेशा छेडती है, खासकर जब वह तैयार होती है| मैने फिर उन्हें बोला वो मुझे नामर्द, हिजडा और गंदी औरत बोलती है, यह सुन उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ मे लिया और बोली तुम्हे तो उनकी बातो मे खुद की सफलता देखनी चाहिए गंदी ही सही पर उन्होंने तुम्हे एक औरत माना है और बची बात नामर्द की तो इस शब्द से किसी पुरुष को क्रोध आ सकता है लेकिन एक महिला को कभी नही|

मैं एक औरत हूँ और अगर कोई मुझे नामर्द कहे तो उसमे बूरा मानने जैसा कुछ नही है क्योंकि वह सच है| तुम जबतक इस सच को नही स्वीकारोगी तब तक स्त्री नहीं कहलाओगी| उनकी इन बातो ने मेरे अंदर की Deepika को पूर्ण रूप से जागृत कर दिया| अगले दिन उस औरत से मेरा झगडा हो गया परन्तु मैने गर्व से उसकी सभी बातो को स्वीकृति दी मेरे आत्मविश्वास को देख वह औरत शरमिंदा हुई और उसने वहाँ काम भी छोड दिया| पार्लर मे सभी औरतो का व्यवहार मेरे प्रति बहुत अच्छा हो गया और मै सबके साथ मिलजुलकर काम करती, छुट्टी के बाद हम घुमने जाते और खरीदारी करने मे भी सहज हो गई| मेरी अम्मा को 100% Deepika मिल गई और अब मै अपने आप मे खुश हूँ|


लडकियों को dance सिखाना किया शुरु और साथ ही चला रही है खुद का ब्यूटी पार्लर

मैने(33) केरेला Transgender beauty contest मे  भाग लिया था जिसमे मै द्वितीय स्थान पर रही| dance और drama की ओर फिर से आते हुए मैने बच्चों को कथक, भरतनाट्यम इत्यादि नृत्य कलाएँ सिखानी शुरू की| मेरी समाज मे एक सही पहचान बनने के कारण जिन रिश्तेदारो ने मुझे बुरा-भला कहाँ था उन्होंने भी अपनी बेटीयो को मेरे पास dance सिखने के लिए भेजा|

मेरे (34) लिए सबसे खुशी का पल था जब केरेला के Lotus group  ने मुझे उनकी Saree Model के रूप मे मुझे चुना और प्रस्ताव दिया| मेरी model बनने की इच्छा जो कभी मै व्यक्त ही नही कर पाई थी स्वतः ही पूर्ण होने जा रही थी| साड़ी मॉडलिंग के लिए मुझे ₹84,000 मिले| इसके बाद वे मुझे अपनी bikini model बनाना चाहते थे, क्योंकि वे Transgender के लिए भी मॉडलिंग के हर दरवाजे खोलते हुए यह बताना चाहते थे की Transgender मॉडलिंग को भी अपना व्यवसाय चुन सकते है| मै भी मॉडलिंग करना चाहती थी इसलिए अपनी बडी बहन से पूछा और उन्होने सहमति दे दी लेकिन अम्मा से हमने यह बात छुपाई|

प्रकृति का फेर ऐसा था, कि Lotuse Group की वह सूटिंग कन्याकुमारी मे होनी निश्चित हुई थी| मै मेरी बडी बहन के साथ वहाँ गई उन्होंने एक resort, book किया हुआ था और सभी मॉडल और उनके एक family-member के लिए ठहरने का इंतजाम किया था| उन्हें इस सूट के लिए 4 महिलाओं की जरुरत थी, जो अलग अलग category को प्रदर्शित करती हो| हम चारो मॉडल एक ही room मे टहरे थे, जिसमे 20 वर्षीय, 30 वर्षीय, 34 वर्षीय महिलाएं और मै 34 वर्षीय Transgender महिला थी|

मेरे लिए यह बहुत सुखद अनुभव था कि उन महिलाओं ने मुझे घृणा की दृश्टी से नही देखा और अपने जैसी औरत ही समझा| उनके साथ मैने पूरी सूटिंग को सरलता और गर्वित होकर पूरा किया| सूटिंग के बाद हम वापस आ गये production ने सूट की अप्रकाशित नकल हमारे घर भेजी लेकिन उस समय मै घर पर नही थी और दुरभाग्य से वह नकल मेरे बडे भाई के हाथ लग गई|

बस फिर क्या होना था उसने वह नकल देख ली और अम्मा को उलटा-सीधा बोला| बडे भाई के इस व्यवहार के दो कारण थे, पहला अप्पा ने property का जो हिस्सा मुझे दिया था वह उसे हथीयाना चाहता है और मैने court मे case किया हुआ है कि आधा हिस्सा वह रखे और बाकी का आधा हम चारो बहनो और भाभी (भाई की पहली पत्नी) मे बट जाए|

दूसरा वह मुझे मरा हुआ मनता है, उसके लिए न मैं उसकी बहन हूँ, न ही भाई| अम्मा मुझसे नाराज हो गई और बात करना बंद कर दिया, इसलिए मैने Lotus Group से मेरी pictures को प्रकाशित न करने का आग्रह किया और इस मॉडलिंग के लिए मुझे जो 1लाख रुपये मिले थे मैने उन्हें वह लौटाने का वचन दिया| उन्होंने मुझे समझा और मेरा आग्रह स्वीकार किया और मुझे ₹80,000 लौटाने को कहाँ| 

Drama और Dance के साथ-साथ  मै (38) Deepika Beauty Parlor नाम से एक पार्लर भी चला रही हूँ |


बडे भाई ने किया दुर्व्यवहार 

मेरे समक्ष एक अचंभित बात आई, जब भाभी ने मुझे बताया कि वह अप्रकाशित नकल मेरे बडे भाई ने अपने पास रखी है| और उसने एक दिन मुझे यह कह कर बुलाया कि उसे एक property का कुछ हिस्सा बेचना है जिसके लिए मेरे हस्ताक्षर की जरुरत है| उसने मुझे अपने घर उस समय बुलाया जब उसकी पत्नी घर पर नही थी| मै गई और बोली बोलो किस लिए बुलाया है, तब वह बोला लो ये रहे पेपर इन पर हस्ताक्षर करो उसके बदले मै तुम्हे 3लाख रुपये दूंगा|

मैंने पेपर पढने को कहाँ तो भडक गया, क्या जरुरत है पेपर पढने की जब पैसे दे रहा हूँ| अप्पा की कितनी property है मालूम भी है, मैने कहाँ अगर बता सकते हो तो बता दो| उसका जवाब था पहले मेरे पास आकर बेठ तब सब बताऊगा| मै बेठी उसके पास जाकर तो वह मुझे छूने लगा और सारी property दिखाने लगा|

मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था, लेकिन मुझे उससे सारे भेद लेने थे इसलिये मै उसके दुर्व्यवहार को भी बरदाश्त कर रही थी| मुझे पता चला मैने तो सिर्फ अप्पा की 2करोड property पर ही court मे दावा किया जबकि 3करोड की property तो इसने छुपा रखी है| उसकी नजर से बचते हुए मैने उन सभी property-papers की फोटो खीच ली| वह तीनो बहनो को कुछ नही देना चाहता और उसने मुझे अपनी ओर आने को कहाँ जिसके बदले उसने मुझे 30% हिस्सा देने का प्रस्ताव रखा| लेकिन जैसे ही मेरा काम खत्म हुआ मैं उसे धक्का देकर भाग आई| 

मैने भाई होकर अपनी बहनो के लिए कुछ नही किया था पर एक लडकी बनने के बाद शायद एक दुश्विकृति वाले अपने ही भाई के छल को पकड पाई|


अत्याचार पुरूषो पर भी होता है, Police अधिकारी चचेरी बहन के साथ मिलकर बचाया 12 जबरन वेश्यावृत्ति मे फसे पुरूषों को

2016 मे जब केरेला सरकार ने redlight area पर अवरोध लगाया, उस समय एक सेक्स व्यपार से जुडी महिला ने लगभग 12 लडको को अपने कब्जे मे किया, जो कि घर से भागे हुए या रास्ता भटके हुए थे| उसने उन्हे जबरन महिला-हार्मोन दिए और रोज शाम को उन्हे सुन्दर लडकियों की तरह सजा कर उन्हें वेश्यावृत्ति करने पर मजबूर किया| वह सभी इतने डरे हुए और असहाय थे कि अपनी दशा के बारे मे किसी से नही बोल सकते थे|

एक महिला रिपोर्टर ने इस षड्यंत्र का पता लगाया था, तब मेरी चचेरी बहन ने मुझे उसकी मदद करने के लिए बोला| क्योकि मै Transgender  हूँ इसलिए आसानी से एक सेक्स वर्कर बनकर जा सकती थी| मैने उसकी मदद की ओर उस महिला से मिली और वहाँ हुई सभी बातो को मैने रिकॉर्ड कर लिया| अब पुलिस के पास उस औरत के खिलाफ सबूत था और हमने उन सभी 12 लडको को उसकी केद से बचा लिया| लेकिन शायद देर हो गई थी, क्योंकि 2साल तक इस दलदल मे फसे रहने के कारण वह अब सरल पुरूष जीवन जीने मे असमर्थ हो गए थे|


Film-Story से कम नही है इनकी प्रेम कहानी

मेरे पती श्रीकांत नायडू एक प्रिंटिंग प्रेस चलाते है| वें केरेला के पूर्व कॉर्पोरेटर है और politics मे है| उनकी पहली शादी 3साल ही चली क्योंकि उनकी पत्नी का देहांत हो गया था| उनकी एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है| मुझसे मिलने से पहले वो अकेले ही रहे है और अपनी बेटी का पालन पोषण किया|

मेरी मुलाकात उनसे ढाई साल पहले हुई थी, जब वे दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक संघ (South Indian Cultural association) मे trusty member बने| दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक संघ पीडित महिलाओं और Trangender और Transexual महिलाओं के हित के लिए कार्य करता है| Dance-center मे अधिकतर उनसे मुलाकात होती रहती थी हम दोनो का ही एक-दूसरे के प्रति आकर्षण हो रहा था| वह association की महिलाओं के लिए अच्छा काम कर रहे थे और political सहयोग भी दे रहे थे| मै उनके लिए टिफिन बना कर लाने लगी और वो भी मुझे चॉकलेट और फूल देते थे|

एक दिन वे मेरी dance-class के बाद मेरे पास आये और मुझे necklace पहनाया और बोले मै तुमसे शादी करना चाहता हूँ| जीवन मे पहली बार एक सच्चे इंसान से मिल रही थी, जिसने मुझे कोई सेक्स प्रयोजन का कोई साधन नही समझा बल्कि अपने जीवन मे जगह देने की इच्छा रखी| लेकिन मैने उन्हें मना कर दिया और वहाँ से घर चली गई|

दो दिन तक न मै उनसे मिली और न ही कोई बात की,  तब तीसरे दिन ये मेरे घर आये और मेरी बडी बहन और अम्मा के सामने मेरे साथ शादी का प्रस्ताव रखा| वे दोनो बहुत खुश हुई लेकिन मैने उस दिन भी मना कर दिया और उनसे कहाँ आपको किसी अच्छी लडकी के साथ शादी करनी चाहिए| और कुछ दिनो बाद जब केरल मे भयंकर बारिश आई थी, उस दिन उन्होंने ही association की महिलाओं के घर जाने के लिये बस का इंतजाम किया|

अब सिर्फ मै बची थी क्योंकि मेरे घर की तरफ काफी पानी भर गया था,इसलिये वहाँ जाने का कोई साधन नही था| उन्होंने मुझे अपने साथ उनके घर चलने को कहा और मै चली गई, मै पहले भी कई बार उनके घर जा चुकी थी| मैने उनके लिए खाना बनाया और फिर हम दोनो ने खाया, तब उन्होंने मुझसे पुछा जब तुम्हे मेरी इतनी परवाह है तो तुमने शादी के लिए मना क्यो किया| मैने जवाब दिया हमारी शादी को समाज स्वीकृति नही देगा, सब तरह-तरह की बाते बनाएगे| इसके जवाब मे उन्होंने कहाँ मैने समाज के बारे मे कभी नही सोचा और मुझे किसी की बातो से फर्क नही पडता|

फिर मैने उनसे पूछा क्या आप मेरे साथ खुश रह पायोगे, इस पर वे बोले मै चाहता हूँ तुम मेरे साथ खुश रहो| मेरे मन के सभी संशय खत्म हो गये और मैने शादी के लिए हाँ बोल दिया| और हमने शादी कर ली लेकिन जब 2019 मे section 377 कानून लागू हुआ तब मेरे पति ने कानूनी रूप से मुझसे शादी करनी चाही|

मै बहुत खुश थी क्योंकि सही मायने से अब उनकी पत्नी कहलाउगी न की समलैंगिक जोड़ा| कानून के हिसाब से मुझे अपने Transexul होने का प्रमाण देना था जो medical-report मे साबित हो गया लेकिन एक दिक्कत यह आई कि मेरा मेरी पत्नी भाग्या से तालाक नही हुआ था| अब मैने भाग्या से सम्पर्क किया और तालाक के लिए उसे बुलाया|

उसने मुझसे निर्वाह-व्यय (alimony) की मांग की| तब मेरे पति ने उसे 50 हजार रूपये देने को कहा और मैने उनके कहने पर उसे पैसे दे दिए| हमारी शादी हो गई परन्तु कुछ दिनो बाद मेरी तबियत खराब रहने लगी और gynecologist की सलाह से मैने हार्मोन ट्रांसफॉर्मेशनल करवाया|

2019 Women Day (8 मार्च) पर घरेलू हिंसा और परिवार विहीन महिलाओं को किया प्रेरित

महिला दिवस 2019 पर होने वाले प्रोग्राम मे कुछ घरेलू हिंसा से पीड़ित और परिवार से ठुकराई महिलाओं को शामिल किया गया था|  Association के मुख्य अधिकारी चाहते थे, कि मै उन औरतो के मरे हुए उत्साह को जागृत करू, क्योंकि उन्होंने इतनी पीडा सही है कि जीवन के महत्व को ही भूल गई है| उन महिलाओं को पहले मेरी पुरानी (लडके वाली) फोटो को दिखाया गया और फिर वर्तमान की फोटो को|

उसके बाद मैने उनसे पूछा की इन फोटो मे वह लडका कौन है तो उन्होंने कहा आपका भाई| फिर मैने पूरे उत्साह से उनसे कहाँ नही यह मै हूँ| औरत होना किसी कमजोरी का नाम नही है| हम औरतो मे अपार शक्ति है, बस उसे पहचानने की देर है और फिर हम मे इतनी काबलियत है की हम कुछ भी कर सकती है| स्त्री के हाथो की चुडिया किसी कमजोरी की निशानी नही है, मैने जब हाथ मे चुडिया पहनी तो हर एक चुडी की वृत्तीय शक्ति को खुद मे भर लिया| मै अपने नारीत्व पर गर्वित हूँ और मुझे नारी शक्ति का अभिमान है| 

वहाँ मौजूद सभी महिलाएं उत्साहित हुई और उन्होंने इस बात को समझा अगर मै कर सकती हूँ तो वह भी कर सकती है|


महिलाओं और  Matrimonial Site(वैवाहिक स्थल) से है, Deepika को शिकायत|  Deepika चाहती है कि महिलाएं Transgender Women को सम्मान की नजरो से देखे और उन्हें अपनी तरह महिला ही माने| इसके साथ ही Deepika चाहती है Matrimonial Site पर Transgender Women भी पंजीकृत हो सके|










5 thoughts on “Transgender Women, पाया अपना अभिमान बन गई नारी शक्ति का प्रतीक | जानिये उनकी प्रेरक कहानी”
  1. I sincerely agreee tht all should get equal right to live their lives according to their own wishes …

    I have known Dipika ji as a warm hearted , kind and extremely friendly lady and truly respect her and dicisions towards her life .
    Wishing all the best and immense success..

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