transgender uruj husain
“बदलाव अनिवार्यता के पहियों पर रोल करता हुआ नहीं आता बल्कि निरंतर संघर्ष से आता है |”
ट्रांसजेंडर्स (Transgender) भी मेनस्ट्रीम (mainstream) में आएं और खुद की समाज मे अच्छी पहचान बनाएं इस इच्छा के साथ उद्यमिता की राह को पकड उरूज हुसैन (Urooz Hussain) कर रही है अपने समुदाय के दूसरे लोगों को भी प्रेरित |
अगर नजरिये की बात की जाए तो पहली नजर मे Transgender को लोग सिर्फ एक किन्नर, ताली बजाकर भीख मांगने वाले या सेक्स वर्कर्स के तौर पर ही देखते है| लेकिन असलियत इससे काफी अलग है। आज समाज में Transgender भी प्रतिष्ठित पदो पर विद्यमान है| ऐसी ही मिशाल है Transgender Woman उरूज हुसैन एक उद्यमी, एक सामाजिक कार्यकर्ता और साथ ही साथ वह ‘लव नोएडा’ की सह संस्थापक भी हैं |
उरूज हुसैन कार्यस्थल (Workplace) पर दुर्व्यवहार और उत्पीडन से तंग आ गई थीं। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना व्यवसाय शुरू किया है| उन्हें उम्मीद है कि वह अपने समुदाय के दूसरे लोगों को भी प्रेरित करेंगी ।
27 वर्षीय उरूज हुसैन रूढ़िबद्ध धारणा (Stereotype) तोड़ कर, खुद के दम पर नोएडा के सेक्टर 119 में “स्ट्रीट टेम्पटेशन” नाम का एक रेस्टोरेंट (Restaurant) चला रहीं हैं। वह अपने समाज के लोगों के लिए प्रेरणा हैं। उरोज हुसैन का यह रेस्टोरेंट लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है| यहां पर लोग लजीज ब्यंजनों का स्वाद लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं |
उरूज हुसैन बिहार के एक छोटे से शहर से आती हैं| उन्होंने भी एक सामान्य बच्चे की तरह जन्म लिया था। धीरे-धीरे उन्हें ये एहसास होने लगा कि उनका शरीर ही सिर्फ लड़कों जैसा है, लेकिन अनुभूति लड़कियों जैसी है। इसी वजह से उन्हें परिवार और समाज में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका परिवार, दोस्त सब चाहते थे कि वह एक लड़के की तरह बर्ताव करें। उन्होंने ऐसा करने की काफी कोशिश भी की, लेकिन हो नहीं पाया।
10 वीं कक्षा में उन्होंने खुद पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था| कक्षा के लड़के उनका मज़ाक बनाते और परेशान करते लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, ग्रैजुएशन की और फिर होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी पूरा किया| 2013 में वह दिल्ली आ गई। 22 साल तक वह एक लड़के के रूप में रहीं। कार्यस्थल पर एक पुरुष कर्मचारी के तौर पर काम किया| इंटर्नशिप (internship) के दौरान कार्यस्थल पर उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव हुआ। लोग उन्हें गलत तरीके से छूने की कोशिश करते थे। परेशान होकर उन्होंने खुद को लोगों से दूर रखना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई और सोचा कि हिम्मत नहीं हारनी है। साल 2014 में उरूज ने खुद को बदलने के लिए साइकोमैट्रिक टेस्ट (Psychometric test) कराने के बाद लेजर थेरेपी ट्रीटमेंट (Laser therapy treatment) कराना शुरू किया। इस दौरान वह घर में बंद रहीं, अकेलापन महसूस भी हुआ। कई बार आत्महत्या करने के विचार भी आते थे, लेकिन आज वह अपनी शारिरिक संरचना से खुश हैं।
2014 से 2015 के बीच उनका हार्मोन ट्रांसफॉर्मेशनल पीरियड (Hormone transformational period) था। इसके बाद 2015 से 2017 तक उन्होंने दिल्ली के ललित होटल में काम किया। वहां उन्होंने एक महिला कर्मचारी के तौर पर काम किया। चूंकि ललित ग्रुप एलजीबीटी कम्युनिटी को सपोर्ट करता है, इसलिए उन्हें वहां किसी तरह की परेशानी नहीं हुई, ना ही किसी तरह का उत्पीडन झेलना पडा।
चूंकि उरूज हुसैन ने हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट का कोर्स किया था, इसलिए इंटर्नशिप के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि कुछ अपना ही काम करेगी। 22 नवंबर 2019 को उन्होंने नोएडा में एक रेस्टोरेंट की शुरुआत की। रेस्टोरेंट शुरू करने के पीछे उनका मकसद था कि इससे सभी Transgender को खुद के दम पर कुछ करने और अपने आप को ओर मजबूत बनाने की प्रेरणा मिलेगी |
एक ट्रांसवुमन (Transwoman) होने की वजह से उरूज को रेस्टोरेंट शुरू करने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे पहले तो उन्हें शॉप (Shop) मिलने में बहुत दिक्कतें आई। उन्हें कोई Shop देने को तैयार नहीं था। तब उनके एक दोस्त अजय वर्मा ने उनकी मदद की, आज वो उनके बिजनेस पार्टनर भी हैं। उरूज की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुईं। रेस्टोरेंट शुरू होने के 4 महीने बाद ही लॉकडाउन लग गया। जुलाई में उन्होंने दोबारा से रेस्टोरेंट खोला। अभी रोजाना 4 से 5 हजार रुपए के ऑनलाइन ऑर्डर आते हैं। वह इस रेस्टोरेंट को बढ़ाने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं |
उरूज हर शहर में रेस्टोरेंट खोलना चाहती हैं | अभी उनके रेस्टोरेंट में सात लोगों की टीम काम करती है। इनमें 2 शेफ हैं।
उरुज को बॉलीवुड से भी शिकायत है। बॉलीवुड मूवीज में ट्रांसजेंडर्स को या तो मजाक के तौर पर दिखाया जाता है या सेक्स सिंबल के रूप में। इसलिए सोसाइटी (Society) भी ट्रांसजेंडर्स को मजाक या सेक्स के नजरिए से ही देखती है। उरूज चाहती हैं कि बॉलीवुड में ट्रांसजेंडर्स को मीनिंगफुल किरदारों में दिखाना चाहिए, ताकि सोसाइटी को असल ट्रांसजेंडर्स के बारे में पता चल सके।
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