pooja devi

“अभ्युदय की राह मे विलीनता ही स्पष्ट मार्ग है लक्ष्य प्राप्ति का”

मन मे अगर हो दृढ़ हौसला तो सफर मुश्किल भले ही हो सकता है किन्तु मंजिल मिल ही जाती हैं| पूजा देवी, अपने सफर को चुनकर, गंतव्य तक पहुँच कर बन गई हैं महिलाओं के लिए आदर्श |
संपूर्ण रूढ़िवादी विचारधाराओं को तोड़ते हुए, कठुआ जिले की पूजा देवी जम्मू-कश्मीर की पहली महिला बस चालक बन गई हैं। तीन बच्चों की मां पूजा देवी ने गुरुवार 24 दिसम्बर 2020 को पहली बार जम्मू से कठुआ के बीच बस स्टीयरिंग संभाला। इस दौरान उनका 7 वर्षीय बेटा भी बस में उनके साथ था| पूजा देवी ने यह व्यवसाय अपने परिवार के प्रतिकूल व्यवहार के बावजूद भी अपनाया और अब वह सोशल मीडिया पर भरमार प्रशंसकों की प्रशंसनीय पात्र बनी हुई है।
लेकिन उनका ये सफर इतना आसान नहीं था। आज उनकी कहानी से सभी को ये संदेश मिल रहा है, कि महिलाए किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। भारी वाहन चलाना उनका बचपन से ही सपना था| वह सपनो मे स्वयं को बस या ट्रक चलाते हुए देखती थी| अत्यंत संघर्ष करने के बाद आज वो उस मंजिल पर पहुंच गई हैं जहां वो पहुंचना चाहती थीं।
पूजा देवी एक किसान की बेटी है| उनकी आर्थिक हालत ज्यादा अच्छी नही थी| गरीब परिवार से होने के कारण वह पढ़ लिख नही पाई| परन्तु हमेशा से अपने बडी गाडी चलाने के सपने को पूरा करना चाहती थी| 30 वर्षीय पूजा देवी कठुआ जिले के संधार-बसोहणी गांव की रहने वाली हैं| उनके तीन बच्चे है एक बेटी और दो बेटे| उनकी बेटी 10वी कक्षा की छात्रा है| बडा बेटा 7वी कक्षा और छोटा बेटा दूसरी कक्षा मे पढ़ते है |
उनके परिवार व ससुराल वाले उनके ड्राइवर(Driver) बनने के इस फैसले के विरूद्ध थे| शुरूआत में उनके पति जोकि एक श्रमिक है, भी नही चाहते थे कि वह ड्राइवर बने क्योंकि वे महिलाओं के लिए इस व्यवसाय को अच्छा और सुरक्षित नहीं समझते| लेकिन पूजा देवी ने उन्हें ये कहकर मना लिया कि ड्राइविंग उनका सपना है जिसे वे हर हाल में पूरा करना चाहती हैं।
सबसे पहले उन्होंने कार चलाना सीखा। शुरुआत मे उन्हें काफी परेशानी हुई| ज्यादातर वाहन मालिक यह कह कर सिखाने से मना कर दिया करते थे कि कही उन्होंने कार किसी से टकरा दी और घायल या दम तोड दिया तो उनके लिए मुसीबत हो जाएगी| परन्तु जैसे-तैसे उन्होंने ड्राइविंग(Driving) सीख ली| और अपना ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) बनवा लिया| उसके बाद वह एक प्रतिष्ठित ड्राइविंग संस्थान में ड्राइविंग इंस्ट्रक्टर बनीं जहाँ उन्हें 10 हजार रुपये मिलते थे| वह टैक्सी भी चलाया करती थी| फिर उन्होंने भारी वाहन भी चलाना सिखा| उन्होने अपने मामा राजिंदर सिंह से ट्रक ड्राइविंग सीखी| बाद में उन्होंने भारी वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन दिया |
जब उन्हें भारी वाहन चलाने का लाइसेंस मिला तो उन्होंने बस यूनियन से संपर्क किया| जम्मू-कठुआ रोड बस स्टेशन के प्रेजिडेंट कुलदीप सिंह ने उनका आवेदन स्वीकार किया और उनकी ड्राइविंग पर भरोसा दिखाते हुए उन्हें जम्मू-कठुआ के बीच पैसेंजर बस (Passenger Bus) चलाने की जिम्मेदारी सौंपी |
पूजा देवी ने सिर्फ अपना सपना ही नही पूरा किया अपितु अपने परिवार की आर्थिक हालत को भी सुधारने मे सहयोग कर रही हैं |
जहाँ ड्राइवर अपने बच्चों को नही सोचते कि वे उनकी तरह ड्राइवर बने वही यात्री बस ड्राइवर बन पूजा देवी ने सभी वर्जनाओं को तोड दिया कि सिर्फ पुरुष ही यात्री बस ड्राइव कर सकते हैं| जब महिलाएं लडाकू विमान उड़ा सकती हैं, एक्सप्रेस ट्रेन चला रही हैं और डॉक्टर, पुलिस ऑफिसर बन सकती हैं| तो फिर पेशेवर ड्राइवर क्यों नहीं बन सकती?
बस स्टॉप (bus stop) पर लोगों ने पूजा देवी का अभिवादन किया। उन्हें अन्य ड्राइवरों का सहयोग और लोगों का प्यार मिल रहा है।
पूजा देवी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपने सपने पूरे करना चाहती हैं लेकिन परिवार के दबाव की वजह से ऐसा नहीं कर पातीं।
जगदिशा पूजा देवी का

अभिनंदन

करते हुए उनके सफल भविष्य की कामना करते है|

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