Gauhar Jaan

जिंदगी की राह इतनी भी आसान नही, पहचान उसी की बनती हैं जो संघर्षो का डट कर मुकाबला करने में विश्वास रखता है | वक्त तो गुजरता जाता हैं, कोई इस वक्त के साथ अपनी छाप छोड़ जाता हैं, तो कोई अपनी ही उधेड़- बुन में रह जाता हैं |

शताब्दियो से जाति, धर्म, ऊँच-नीच और नारी समाज पर होते शोषण का एक पूरा इतिहास है किन्तु शोषण के विरुद्ध उठती बहुत सी आवाजे हैं जिसके कारण समाज में बहुत से बदलाव आयें और बहुत अभी बाकि भी हैं |

महिलाओं के शोषण, धोखाधड़ी संघर्ष, और भारत को गर्वित करने वाली कहानी है- गौहर जान की | गौहर जान भारत की उन महान हस्तियों में से एक थीं, जिन्होंने न सिर्फ भारतीय संगीत को नई बुलंदियों पर पहुंचाया बल्कि दुनियाभर में देश का सिर भी गर्व से ऊंचा किया |

वह पहली सिंगर थीं, जिन्होंने अपने गाए गानों की रिकॉर्डिंग करवाई थी और इसीलिए उन्हें भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार के नाम से जाना जाता है |

गौहर जान की कहानी को विक्रम संपथ ने सालों की रिसर्च के बाद ‘माई नेम इज गौहर जान’ किताब के जरिए सबके सामने रखा |

गौहर जान का जन्म 26 जून 1873 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में हुआ था | उनका जन्म एक क्रिश्चियन परिवार में हुआ था | पहले उनका नाम एंजेलिना योवर्ड था | गौहर के दादा ब्रिटिश थे जबकि दादी हिंदू थीं | उनके पिता का नाम विलियम योवर्ड, वे इंजिनियर थे और मां का नाम विक्टोरिया था, वें एक प्रशिक्षित डांसर और सिंगर थीं |

किन्तु उनके माता-पिता की शादी चल नहीं पाई और 1879 में, जब एंजलिना सिर्फ 6 साल की थीं उनका तलाक हो गया, जिसके बाद वह बनारस आ गईं | इसके बाद उनकी माँ ने कलकत्ता में रहने वाले मलक जान नाम के शख्स से शादी कर ली और इस्लाम धर्म कबूल कर लिया | जिसके बाद उनकी माँ ने अपना नाम बदलकर मलका जान और बेटी एंजेलिना का नाम बदलकर गौहर जान रख दिया था |

उस समय मलका जान स्‍थापित गायिका और नृत्‍यांग्‍ना बन चुकी थीं | उन्‍हें लोग ‘बड़ी मलका जान’ के नाम से जानते थे | 1883 में मलका जान कलकत्ता में नवाब वाजिद अ‍ली शाह के दरबार में नियुक्‍त हो गईं | फिर तीन सालों के अंदर उन्‍होंने कलकत्ता के 24 चितपोरे सड़क पर खुद का घर खरीद लिया | यहीं पर गौहर जान की ट्रेनिंग शुरू हुई |

गौहर जान ने पटियाला के काले खान उर्फ ‘कालू उस्‍ताद’, रामपुर के उस्‍ताद वजीर खान और पटियाला घराने के संस्‍थापक उस्‍ताद अली बख्‍श जरनैल से हिन्‍दुस्‍तानी गायन सीखा | इसके अलावा उन्‍होंने महान कत्‍थक गुरु बृंदादीन महाराज से कत्‍थक, सृजनबाई से ध्रुपद और चरन दास से बंगाली कीर्तन में शिक्षा ली | जल्‍द ही उन्होंने ‘हमदम’ नाम से गजलें लिखना शुरू कर दिया | यही नहीं उन्‍होंने रबींद्र संगीत में भी महारथ हासिल कर ली थी |

गौहर का 13 साल की उम्र में बलात्कार हुआ था | इस सदमे से उबरते हुए गौहर संगीत की दुनिया में अपना सिक्का जमाने में कामयाब हुईं |

गौहर जान ने 1887 में शाही दरबार दरभंगा राज में अपना हुनर दिखाया और उन्‍हें बतौर संगीतकार नियुक्‍त कर लिया गया | इसके बाद उन्‍होंने 1896 में कलकत्ता में प्रस्‍तुति देना शुरू कर दिया | उन्हें दिसंबर 1911 में दिल्‍ली दरबार में किंग जॉर्ज पंचम के सम्‍मान में आयोजित कार्यक्रम में बुलाया गया, जहां उन्‍होंने इलाहाबाद की जानकीबाई के साथ गाना गया |

उनका दबदबा ऐसा था कि रियासतों और संगीत सभाओं में उन्हें बुलाना प्रतिष्ठा की बात हुआ करता थी | गौहर जान को जब कोई नवाब अपने यहां महफिल सजाने के लिए बुलावा भेजते तो उन्हें लाने के लिए पूरा का पूरा काफिला भेज दिया करते थे क्योंकि वो बड़े तामझाम के साथ सफर करती थीं |

19वीं शताब्दी में गौहर जान सबसे महंगी सिंगर थीं | ऐसा कहा जाता है कि वो सोने की एक सौ एक गिन्नियां लेने के बाद ही किसी महफिल में जाती थीं और वहां गाती थीं | शुरुआती दिनों में गौहर बेहद अमीर महिला थीं | उनके पहनावे और जेवरात उस वक्त की रानियों तक को मात देते थे |

1902 से 1920 के बीच ‘द ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया’ ने गौहर जान के हिन्दुस्तानी, बांग्ला, गुजराती, मराठी, तमिल, अरबी, फारसी, पश्तो, अंग्रेजी और फ्रेंच गीतों के 600 गाने रिकॉर्ड किए थे | वह दक्षिण एशिया की पहली ऐसी सिंगर थीं, जिनके गाने ग्रामोफोन कंपनी ने रिकॉर्ड किए और गाने के लिए उन्हें करीब 3000 रुपये दिए गए | गौहर जान अपने टैलेंट के कारण काफी मशहूर हो गईं थीं और खूब शानो – शौकत से रहती थीं | गौहर अपनी हर रिकॉर्डिंग के लिए नए कपड़े और जेवर पहनकर आती थीं | वो अपने गायन और रिकॉर्डिंग उद्योग के शुरुआती दिनों में ही करोड़पति बन गईं |

गौहर जान ने 20 भाषाओं में ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती, भजन और तराना के जरिए हिन्‍दुस्‍तानी शास्‍त्रीय संगीत को दूर-दूर तक पहुंचाया |

प्रौढ़ावस्था में गौहर अपनी उम्र से आधे एक पठान से शादी तो कर ली लेकिन वो चली नहीं | मामला कोर्ट कचहरी तक पहुंच गया जिसमें गौहर को अपनी जायदाद बेचनी पड़ी | कुछ समय बाद गौहर जान मैसूर के महाराजा कृष्‍ण राज वाडियार चतुर्थ के आमंत्रण पर मैसूर चली गईं | हालांकि 18 महीने बाद 17 जनवरी 1930 को मैसूर में उनका निधन हो गया |

गौहर जान दक्षिण एशिया की पहली गायिका थीं जिनके गाने ग्रामाफोन कंपनी ने रिकॉर्ड किए | उनके गानों की बदौलत ही भारत में ग्रामोफोन को लोप्रियता हासिल हुई |

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