Natasha Noel

एक योगिनी, नृत्यांगना बचपन से जिनका जीवन निराशाजनक और दिशाहीन रहा फिर भी संघर्षो से हारी नही और अब प्रेरक के रूप में उभर रही हैं

 

सभी के जीवन में उतार-चढाव आते जाते रहते है| बस फर्क इतना होता है कोई की हीरे सा चमकदार, तो कोई कोयले सा काला हो जाता है|

जीवन के संघर्ष की तपन ही मनुष्य को निखरती है, अब कोई ये तपन बरदाश्त कर ओरो को भी प्रेरित करता है और कोई उस तपन में खुद को ही झुलसा लेता है और अपने जीवन को नकारात्मकता की ओर ढकेल देते है|

मुश्किलें बिन बुलाये मेहमान की तरह होती है, जो बिन बुलाये आ तो जाती है पर जबतक नही जाती तबतक उनका बोरिया-बिस्तरा बांधकर कर उन्हें जबरदस्ती भगा दिया न जाये| किन्तु मुश्किलों की महत्वपूर्ण खासियत यह होती है कि वो हमे पहले से अधिक सतर्क, मजबूत और होशियार बना देती है| इस बिन बुलाये मेहमान की सबसे अच्छी बात यह है कि ये जाते जाते एक सबक जरुर सिखा कर जाती है |

मुश्किलों से भरी ऐसी ही एक कहानी है जिन्होंने मुश्किलों को तो भगाया ही साथ में वो सबक भी लिया जिसने उनके जीवन को दिशा, शांति और खुद से प्यार करना सिखाया, उनका नाम है नताशा नोएल|

नताशा नोएल मुंबई की रहने वाली है जोकि एक डांसर और सर्टिफाइड योगा ट्रेनर हैं| उन्होंने अपनी पढाई सोफिया काँलेज से की है| उन्होंने चंद महीनों में ऐसे-ऐसे योगा पोज सीखें, जिसे करना बड़े-बड़ों के लिए आसान नहीं होता। नताशा के योगा पोज को देखकर लोग दंग रह जाते हैं।अपनी टोंड बॉडी की वजह से वे इस तहर के योग पोज कर लेती हैं।

मुश्किलों से भरा हुआ बचपन देखने के बाद उन्हें योग से शांति मिली| उनका जीवन बेहद मुश्किलों से भरा हुआ गुजरा लेकिन जब जब उन्हें मुश्किलों ने घेरा तब तब ओर ज्यादा मजबूत होसले से वह खाड़ी हो गई |

जब नताशा साढ़े तीन साल की थी तब उन्हें जन्म देने वाली माँ ने आत्महत्या कर ली थी| उन्होंने अपनी आँखों के सामने अपनी माँ जलते देखा और आज भी उनकी माँ का जलता हुआ चेहरा व चीखने की आवाजे उन्हें याद आती है| इन भयानक यादो से छुटकारा पाना उनके लिए बेहद मुश्किल है किन्तु अब वे उनसे निकलने का तरीका सीख रही है| वे समझ चुकी है कि उस घटना से उनका कोई वास्ता नही था, लेकिन फिर भी अपनी आधी जिंदगी खुद से नफ़रत करते हुए गुजार दी क्योकि वह खुद को इसके लिए जिम्मेदार समझती थी| उन्हें लगता था कि वे अपनी माँ की कुछ मदद कर सकती थी, जोकि उन्होंने नही की| पर अब वह समझ गई है, उनके बस में कुछ नही था|

इस कारण उनके बचपन की मासुमियत डर, वात्सलय से वंचित, असुरक्षित महसूस करने लगी थी| उनके पापा की बहन और उनका परिवार जो उनके अभिभावक है, उन्हें अपने साथ ले गये| उन्होंने उन्हें पर्याप्त प्यार और सुरक्षित महसूस कराने की हर मुमकिन कोशिश की किन्तु उनके लिए वह वात्सलय परिपूर्ण नही था| पर वह हमेशा खुश रहने की पूरी कोशिश करती थी|

पर अभी तो उनके जीवन में एक ओर जहर घुलना था| उनकी मानसिकता पर एक ओर घाव लगा| सिर्फ 7 साल की उम्र में उनके घर काम करने वाले नौकर ने उनका शारीरिक शोषण किया| ये अकृत्य जो उनके साथ हुआ उन्हें न तो उस समय समझ थी और न ही उन्हें याद आखिर क्यों और कैसे हुआ| याद है तो बस इतना कि एक पल में खेल रही थी दूसरे पल में उनकी योनि से खून के स्त्राव को देखा| इस खटना के बाद नौकर की माँ ने उनसे उसके बेटे के साथ भाग कर शादी करने को भी कहाँ| यहाँ तक की उस नौकर यह भी कहाँ की जीवन में उन्हें अब कोइ ओर प्यार नही करेगे| एक 7 साल की बच्ची जिसे सिर्फ अभी खेलने-कूदने, मस्ती करने का मालूम होता है, ऐसी उम्र उन्हें इतना कुछ झेलना पड़ा| ऐसी बाते जिनको समझने के वो अभी लायक ही नही हुई थी|

इन सब ने उनके मस्तिष्क में एक गहन चोट की जिससे वह खुद से नफरत करने लगी| ये खुद से नफरत उनकी दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही गई| उनके साथ गलत होना अभी बंद ही नही हुआ था| 8 से 15 साल की उम्र तक उनके ही रिश्तेदारों और चचेरे भाई, बहनों द्वारा उनके साथ लगातार शारीरिक और यौन शोषण होता रहा| नताशा अपने आप को जुल्मो से घिरा हुआ और बेचारा मान लिया था|

सच भी है जब भी कोई मुश्किल आती है या कोई खुद को असहाय महसूस करने लगता है तब जैसे पूरी दुनिया अपने विरोध में खड़ी हुई दिखाई देने लगती हैं| माना जाये या फिर समझा जाये तो घृणा, नफरत, बेर सबसे ज्यादा आसान शब्द है| जो इंसान को अन्दर ही अन्दर दिमक की तरह खोकला कर देता है|

नताशा को भी सब कुछ बेकार, निरर्थक लगने लगा था| वह अपने आप से इतनी नफरत करने लगी थी कि कभी शीशा भी नही देखती थी| इतनी घृणा हो गई थी कि वह अपने आप को घाव देने लगी| उन्होंने सभी आशायें छोड़ दी थी| खुद को दर्द दे कर, शरीर के अंगो को काट कर उस पीड़ा से जो उनके दिलोदिमाग में घर कर चुकी थी उससे उन्हें अच्छा लगता था|

वह बाथरूम में बैठकर रोती रहती थी और फर्श पर हमेशा खून फैला हुआ होता था| बस एक जिन्दा लास की तरह बन गई थी नताशा और हर सुबह बस एक ही सवाल हुआ करता था कि उनकी यह जिंदगी किस लिए है|

इन सब में बस एक बात उनके साथ अच्छी हुई थी| उनके माता-पिता को लगने लगा था की कुछ तो गलत हो रहा है उनके साथ क्योकि दिन-प्रतिदिन उनमे गुस्सा बढ़ता जा रहा था, अपने मन की बात कभी किसी के साथ बांटती नही थी| ये सब सोच कर उनके माता-पिता ने जब वह 10 साल की थी तब मनोदशा चिकित्सा करवाई| उनकी मानसिक चिकित्सक ने जब यह देखा की वे कुछ नही कहती है और न ही बोलती है| तब उन्होंने नताशा को पेपर और कलर दिए और उनसे कहाँ कि जो भी वह अनुभव करती है, वह जो चाहे पेपर पर बनाये तब उन्होंने ड्रा किया कलर भरे| उन्हें लगने लगा था की कला ही उनकी अभिव्यक्ति है और उन्हें जिंदगी का मुकाबला करना सिखा|

अपनी मानसिक चिकित्सक के कहने पर वह डांस में दिलचस्पी लेने लगी और 16 साल की उम्र में वह अच्छी डांसर बन गई थी| डांस में वह खुद को महसूस करने लगी थी| डांस उनकी जिंदगी, जूनून और प्यार बन गया था| 17 साल की उम्र में उनके जीवन में उनके पहले प्यार से मुलाकात हुई|

लेकिन 19 साल की उम्र में एक बार फिर उनकी ख़ुशी को नजर लग गई जब वह कॉलेज के दूसरे साल में थी तब वह गिर पड़ी| जिस कारण उन्हें काफी चोट लगी| डॉक्टर ने उन्हें एक सप्ताह के लिए आराम करने की सलह दी| लेकिन उन्होंने डॉक्टर की सलाह नही मानी और डांस करना नही छोड़ा क्योकि डांस ही उनकी जिंदगी था जिसे वह कभी नही छोड़ना चाहती थी और सिर्फ चल-फिर सकना व आराम करना उन्हें बिल्कुल पसंद नही था |

उनका ये फैसला सही साबित नही हुआ, आराम न करने के कारण उनके घुटने की  मेनलिसस और कॉर्नियल मांसपेशियों फट गई और पानी भर गया| जिस कारण वह अब डांस बिल्कुल नही कर सकती थी| उन्होंने एक बार फिर खुद को संभाला और अपनी अंग्रेजी साहित्य से स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी की |

क्योकि डांस करने के लिए अभी वह सक्षम नही हो पाई थी तो उन्होंने फ़ोटोग्राफ़ी करना शुरू किया| वह डांसर्स की फोटो उतारने लगी थी पर इससे वह पूरी खुश नही थी| वह ख़ुशी उन्हें नही मिल रही थी जो उन्हें चाहिए थी और फिर 21 साल की उम्र में उस व्यक्ति से उनका संबंध ख़त्म हो गया जिससे वह बहुत प्यार करती थी|

15 साल की उम्र से वह शराब और सिगरेट का सेवन कर रही थी| कुछ भी अनुभव न कर पाना कुछ भी समझ न पाना मानसिक निराशा के कारण वह ऐसा करती थी| 20 साल की उम्र में उन्होंने नशीले पदार्थो का सेवन करना बंद कर दिया था फिर 5 साल के संबंध के टूट जाने के बाद वह बहुत खाना खाने लगी| उन्हें खाने से एक दोस्त की तरह प्यार हो गया, जिस वजह से उनका वजन काफी बढ़ गया शरीर बेडौल हो गया था|

उनके दिमाग में अब खुद से सवाल चलने शुरू हो गये थे, क्यों वे ऐसा कर रही हैं,क्यों अपने शरीर को बीमारी का घर बना रखा है| क्योकि वे व्यायाम नही कर सकती थी इसलिए उन्होंने पौष्टिक खाना खाना शुरू किया| अब उनकी स्थिति में सुधार आना शुरू हुआ| फिर उन्होंने  योगा सीखने की शुरुवात की|

नताशा नोएल काफी किताबे लाई उनसे पढ़ा और कई वीडियोज देखे उनसे भी सीखा| आखिरकार औपचारिक रूप से योगा सिखने के बाद उन्हें योगा टीचर का प्रमाणपत्र मिल गया|

आज न केवल वह योगा करती है बल्कि लोगो को योग के साथ-साथ डांस भी सिखाती है| नताशा की योगा के प्रति दीवानगी को लेकर हजारों लोग मोटिवेट होते हैं। नताशा पब्लिक प्लेस में भी योगा के लिए जानी जाती हैं। इंस्ट्राग्राम पर नताशा के 1 लाख 12 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, जबकि फेसबुक पर भी उन्हें फॉलो करने वालों की संख्या हजारों में है।

नताशा की खास बात है कि वे बेहद कम जगह में भी योगा कर सकती हैं। वह चाहे खिड़की की बेहद तंग जगह हो या ड्राइंग रूम का सोफा हो।योगा के प्रति उनकी दीवानगी ऐसी है कि वो रेलवे ट्रैक, ऑटो, सड़क, ट्रेन, पहाड़, मेट्रो ट्रेन के सफर जैसे पब्लिक प्लेसेस पर भी वे योगा कर लेती हैं।

Jagdisha,  नताशा  और उनकी आत्मनिर्भरता व साहस और समाज को बदलने के जज़्बे को सलाम करता है  और उनके इस साहसी कदम से अनेकानेक महिलाओं को हिम्मत और प्रेरणा मिलेगी |  निश्चित रूप से समाज के लोग नताशा नोएल की हिम्मत और साहस से प्रेरित होंगे | 

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