dhanya ravi

धान्या रवि ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा रोग (ओआइ) जिसे अस्थि भंग रोग भी कहते है से पीड़ित हैं | यह एक दुर्लभ और आनुवांशिक बीमारी है जिसमें ग्रसित की हड्डियां बहुत कमजोर होती हैं | जिस कारण उन्होंने जन्म के बाद से 300 से अधिक फ्रैक्चर का सामना किया है | वह सार्वजनिक वार्ता, फंड जुटाने और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से दुर्लभ बीमारियों के आनुवंशिक और शुरुआती निदान की अभिवक्ता हैं |


धान्या का जन्म नवम्बर 1989 में नॉर्मल डिलीवरी से हुआ था | परिवार मे खुशी का महौल था | उसके माता-पिता रवि और निर्मला बहुत खुश थे, लेकिन नवजात शिशु के लगातार रोने और स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे | धान्या के जन्म के 56वें दिन उनका नामकरण होना था | उस दिन वह लगातार रोती रही | घरवालों ने कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन डॉक्टर भी इसके पीछे के कारण का पता नहीं लगा सके | चिकित्सा विशेषज्ञों ने नवजात शिशु में दुर्लभ बीमारी के लक्षणों की पहचान की थी | वह था उनका पहला फ्रैक्चर उनकी जांघ की हड्डी टूट गई थी | तब डॉक्टरों ने उनके माता-पिता को उनकी बीमारी ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा रोग (ओआइ) यानी हड्डी भंगुर रोग के विषय मे परिचित करवाया | और यह भी बतलाया कि धान्या कभी आम जीवन नही जी पाएगी |


धन्या को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए, उनके माता-पिता ने देश के बहुत से अस्पतालों के चक्कर लगाए लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं मिला | इस आनुवांशिक बीमारी के इलाज के दौरान धान्या को कई फ्रैक्चर झेलने पड़े | यहां तक कि अगर वह एक बार छींक भी देतीं तो उनकी किसी हड्डी के फ्रैक्चर होने का खतरा रहता था | जिसके कारण बचपन से उनका अधिकतर समय अस्पताल आने-जाने में बिता है |


धान्या का इलाज रोडिंग प्रक्रिया (फ्रैक्चर हुई हड्डी को मेटल की रोड के सहारे रखना) से भी नहीं हो पाया क्योंकि जागरूकता की कमी के कारण उनके पैरंट्स और डॉक्टर्स में काफी अस्पष्टता थी | इस बीमारी के इलाज के लिए उनके माता-पिता धान्या को देश भर के कई अस्पतालों में ले गए | आखिर में वेल्लोर स्थित क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग से उन्हें स्थिति के बारे में समझ आया कि अब ध्यान रखना ही इसका इलाज है |

एक ऐसी उम्र जिसमे बच्चे खिलौने खरीदने में व्यस्त होते है, उस उम्र मे धान्या अपनी व्हीलचेयर चुनने में व्यस्त थीं | समय का एक पहलू यह भी था जब लोग 14-वर्षीय धान्या से उनकी स्थिति के पीछे का कारण पूछते थे तब खुद के लिए खेद महसूस करने या शर्मिंदा होने के बजाय, वह धैर्य के साथ अपनी स्थिति के विषय मे बताती थी |

जोखिम भरे स्वास्थ्य के कारण उनके पास मेनस्ट्रीम स्कूल का विकल्प सम्भव नहीं था | तब उनके पड़ोस रहने वाली विक्टोरिया नाम की महीला ने उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी ली और रोज उन्हें 1 घंटे के लिए घर मे ट्यूशन देना शुरू कर दिया | उन्होंने यह अपनी इच्छा से किया | यह उनका धान्या लिए प्यार था | उन्होंने हाई स्कूल (10वी) तक धान्या को पढ़ाया | बाद मे उन्होंने इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी से प्रारम्भिक पाठ्यक्रम पूरा किया और इसके साथ-साथ उन्होंने क्लांबर नॉलेज एंड करियर्स प्राइवेट लिमिटेड से नोवल राइटिंग का भी सर्टिफिकेट लिया |

युवावस्था में भी उनका अस्पतालों के चक्कर लगाना जारी रहा लेकिन धान्या ने कभी इसे खुद पर हावी नहीं होने दिया | धान्या कभी अपनी स्थिति से विचलित नही हुई हमेशा अपने जीवन के प्रति सकारात्मक रही | धान्या के जीवन मे टर्निंग पाइंट आया जब उन्होंने जीवन के दूसरे पक्षो को जाना जो किसी भी निर्भरता, कमजोरी या दर्द को दूर करने वाले है

धान्या शास्त्रीय संगीत, सिनेमा और उपन्यासों की दुनिया से बहुत प्रभावित थी | वह संगीतकार और गायक ए आर रहमान, के जे येसुदास और रवींद्रन मास्टर के संगीत को सुनकर बड़ी हुईं, जो केरल के एक लोकप्रिय दक्षिण भारतीय संगीतकार और पार्श्व गायक है | संगीत ने हमेशा उनकी मनोदशा को मधुरता देने मे मदद की |प्रीति शेनॉय और डॉ पॉल लेखको से प्रभावित हो धान्या को उत्सुक पाठक और कल्पना जैसे विषयों पर लेखन करने के प्रति झुकाव हुआ |

धान्या जीवन में टर्निंग पॉइंट तब आया जब उन्हें इंटरनेट के बारे में जानकारी दी गई | धान्या ने संगीत से जुड़े कई चैट फोरम और ग्रुप जॉइन कर लिए और इसके कारण उनके कई दोस्त भी बन गए | उन्हें बीनू नाम के एक लड़के के बारे में पता चला जो कि इसी बीमारी से ग्रसित था | बीनू को अपनी सर्जरी के लिए पैसों की जरूरत थी | इस खबर से धान्या को लगा कि उन्हें कुछ ऐसा करने की जरूरत है जिससे उन्हें जीवन जीने का उद्देश्य मिले |

वह मदद करने के लिए बीनू की केयरटेकर लता नैयर के पास गई जो कि एक समाजसेविका थीं | उन्होंने बीनू की सर्जरी के लिए अपने दोस्तों से ऑनलाइन मदद के लिए अनुरोध किया | कुछ ही समय में उनकी मदद करने के लिए कई लोग आगे आए | सर्जरी से पहले बीनू केवल रेंगकर चलता था लेकिन अब वह वॉकर की मदद से आराम से चल सकता है | आज वह कोच्चि के एक हेल्थ सेंटर में सहायक के तौर पर काम करता है | किसी की मदद करने के लिए लोगों को एकत्रित करने के अपने इस अनुभव से धान्या से महसूस किया कि वह आगे कुछ करना चाहती हैं | जब लता नैयर ने ऑस्टियोजेनेसिस इम्पर्फेक्टा से पीड़ित लोगों की मदद के लिए भारत का पहला एनजीओ (अमृतावर्शिनी चैरिटेबल सोसायटी) खोला तो इसमें धान्या ने अहम रोल निभाया | वह टीवी इंटरव्यू, डिबेट और भाषणों के जरिए लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने लगी |

उन्होंने निंगलक्कुम अकम कोड्डीससवरन, आइडिया स्टार सिंगर-6 और अश्वमेधम जैसे कई प्रसिद्ध मलयालम टेलिविजन प्रोग्राम में भाग लिया | साथ ही ओआरडीआई और वन स्टेप एट ए टाइम जैसे संगठनों की मदद से वह बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने और ऐसे लोगों के अधिकारों के विषय में बताने लगीं | वह सभी प्रेग्नेंट महिलाओं से आनुवांशिक जॉच की अनिवार्यता का समर्थन करती है | इसके साथ पुनर्वास को आगे बढ़ाने के लिए शीघ्र निदान की सलाह देती हैं | वह दवाइयों और थैरपी के अलावा फैमिली काउंसलिंग पर भी जोर देती है |

पिछले कुछ वर्षों से, वह कई गैर-सरकारी संगठनों के साथ जुड़ी हुई हैं जो दुर्लभ और आनुवांशिक बीमारियो से सम्बन्धित कार्य करती हैं | मैराथन जैसी प्रतिस्पर्धाओ, TEDx टॉक्स से लेकर शिक्षण संस्थानों में प्रेरक भाषण देने तक, धान्या अपनी क्षमता से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं | इस तरह के आयोजनों ने उनके सामाजिक दायरे को भी बढ़ाया है, और अब उनके कई दोस्त हैं जो उसकी स्थिति को समझते हैं और हमेशा उनकी मदद के लिए तैयार रहते हैं | ऐसी ही एक दोस्त थैलेसीमिया की मरीज नमिता कुमारी है | नमिता ease नामक वेबसाइट प्लेटफॉर्म फॉर रेयर डिसीज (OPFORD) चला रही है | यह दुर्लभ बीमारियों के निदान, उपचार और देखभाल में सुधार के लिए दुर्लभ बीमारी के रोगी समुदायों, माता-पिता और देखभाल करने वालों को जोड़ने के लिए एक डिजिटल मंच है | धान्या अपने साथियों के साथ नमिता की वेबसाइट द्वारा जागरूकता फैलाने में मदद करती है |

आनुवांशिक बीमारी से पीड़ितों की मदद करने में उनके प्रयासों के लिए उन्हें कई अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया हैं | उन्हें 2012 मे ब्रेव बैंगल अवॉर्ड, 2014 मे एनुअल इंस्पायर्ड इंडियन फाउंडेशन (आईआईएफ) अवॉर्ड, डिपार्टमेंट ऑफ पीडब्लयूडी इंडिया की ओर से साल 2018 का रोल मॉडल कैटिगरी में नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित हुई हैं |
धान्या एक व्यक्तिगत ब्लॉग चलाने के साथ-साथ फ्रीलांस कॉन्टेंट राइटर, डिजिटल मार्केटर और कॉलमिस्ट के तौर पर भी काम कर रही हैं |

हमेशा व्हीलचेअर पर बैठे रहने और ऐसी बीमारी में जकड़े रहने के बावजूद भी वह आराम से यात्रा करती हैं | वह अमेरिका में अपने भाई और परिवार के पास रहती हैं | वह भारत के कई एनजीओ का सहयोग करने के साथ ही ऑफलाइन और ऑनलाइन मीडिया के लिए फ्रीलांस कॉन्टेंट राइटर, डिजिटल मार्केटर और कॉलमिस्ट के तौर पर काम कर रही हैं |

धान्या एक व्यक्तिगत ब्लॉग ‘Dhanya Ravi – Where words speak’ भी सुचारू रुप से चला रही है | वह नियमित रूप से अपने व्यक्तिगत अनुभवों के साथ अपने ब्लॉग को अपडेट करती है और लोगों द्वारा उनकी चुनौईतियों को दूर करने में मदद करने के लिए उनके द्वारा उद्धृत उद्धरणों का उपयोग करती है।

TEDx और जोशटॉक स्पीकर, धान्या रवि को डी -30 डिसएबिलिटी इंपैक्ट 2020 सम्मान की सूची में नामित किया गया है | जिसे एक डायवर्सिबिलिटी – डिसेबिलिटी एम्पावरमेंट वैश्विक आंदोलन पुरस्कार द्वारा लॉन्च किया गया था | विकलांगता अधिनियम के साथ अमेरिकियों की 30 वीं वर्षगांठ के महत्व को चिह्नित करने के लिए आंदोलन शुरू किया गया था |

यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है,
हवा की ओट लेकर चिराग़ जलता है |

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